उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री पद की संभावित दावेदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह "योगी" हैं और हमेशा के लिए राजनीति में नहीं रहेंगे। उनके इस बयान से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि उनका उद्देश्य केवल जनसेवा और धर्म के प्रति समर्पण है। उन्होंने कहा, "मैं योगी हूं, मेरा जीवन त्याग और सेवा के लिए समर्पित है। सत्ता और पद के पीछे भागना मेरे स्वभाव में नहीं है।"
योगी आदित्यनाथ के इस बयान को कई तरह से देखा जा रहा है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने यह बात कहकर भविष्य की अटकलों को विराम देने की कोशिश की है, जबकि कुछ इसे उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ, जो गोरखनाथ मठ के महंत भी हैं, अपनी कड़ी प्रशासनिक शैली और हिंदुत्ववादी छवि के लिए जाने जाते हैं। 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही उन्हें बीजेपी के शीर्ष नेताओं में गिना जाने लगा। उनके समर्थक उन्हें भविष्य में राष्ट्रीय नेतृत्व में भी देखने की इच्छा रखते हैं।
अब उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा छिड़ गई है कि क्या यह उनकी सच्ची मंशा है या एक राजनीतिक संदेश। हालांकि, फिलहाल उन्होंने साफ कर दिया है कि वे राजनीति में स्थायी रूप से नहीं रहना चाहते।