लोकसभा में मंगलवार को वक्फ संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया, जिससे राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने इसे ऐतिहासिक भूल बताया। सपा सांसद ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह फैसला इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर असर डालेगा और इससे अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्तियों पर असर पड़ सकता है।
संसद में बहस के दौरान कई विपक्षी सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। हालांकि, सरकार ने इसे जरूरी सुधार बताते हुए कहा कि यह बदलाव प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने के लिए किया गया है।
विधेयक पारित होने के बाद सपा सांसद ने कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक रूप से गलत साबित होगा और आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने सरकार पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
अब यह देखना होगा कि राज्यसभा में इस विधेयक को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है और क्या इसे वहां भी मंजूरी मिलेगी या नहीं।