म्यांमार इस वक्त गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण चारों ओर तबाही का मंजर नजर आ रहा है। अब तक करीब 3000 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई हजार लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे से शवों को बाहर निकालने में जुटे हुए हैं।
प्राकृतिक आपदा ने कई गांवों और शहरों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। मकान, सड़कें और पुल सबकुछ बर्बाद हो गया है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। खाने-पीने की वस्तुओं और साफ पानी की भारी कमी देखी जा रही है।
सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय राहत संगठन भी राहत कार्यों में लगे हुए हैं। हेलिकॉप्टर और नावों के जरिए दूर-दराज के इलाकों तक मदद पहुंचाई जा रही है। बावजूद इसके, स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। स्थानीय लोग भय और अनिश्चितता के माहौल में जीवन बिता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस त्रासदी के पीछे जलवायु परिवर्तन और कमजोर बुनियादी ढांचे की बड़ी भूमिका है। आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों तक अभी भी पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
पूरे म्यांमार में शोक और संकट का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की गई है ताकि इस आपदा से प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता मिल सके और पुनर्वास कार्य जल्द शुरू हो सके।