चंडीगढ़/नई दिल्ली, 26 मार्च: आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने आज लोकसभा में ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025’ का पुरजोर विरोध किया। यह विधेयक गुजरात के आनंद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट को राष्ट्रीय महत्व के विश्वविद्यालय में बदलने का प्रस्ताव रखता है।
उन्होंने सहकारी क्षेत्र को कृषि और ग्रामीण डेयरी समुदायों की रीढ़ बताते हुए महाराष्ट्र और पंजाब में हुए उल्लेखनीय विकास को रेखांकित किया। मीत हेयर ने आपत्ति जताई कि किसी एक राज्य को विशेष प्राथमिकता देना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को केवल एक क्षेत्र तक सीमित रखना तर्कसंगत है?
उन्होंने सुझाव दिया कि सभी राज्यों में क्षेत्रीय सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने चाहिए, जिससे सहकारी क्षेत्र के प्रबंधन और तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा मिले।
उन्होंने यह भी बताया कि जब पंजाब के खेल मंत्री ने खेलो इंडिया खेलों के लिए वित्तीय सहायता मांगी थी, तब 1800 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिनमें से 1400 करोड़ रुपये सिर्फ गुजरात में एक स्टेडियम निर्माण में लगा दिए गए, जबकि शेष राज्यों को मात्र 400 करोड़ रुपये दिए गए।
मीत हेयर ने मिल्कफेड और मार्कफेड के योगदान को सराहते हुए, राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की वकालत की। उन्होंने राष्ट्रीय संस्थानों में सर्वोत्तम शिक्षकों और विशेषज्ञों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, खासतौर पर पंजाब के अनुभवी विशेषज्ञों की भूमिका को रेखांकित किया।