चंडीगढ़, 25 मार्च:
पंजाब के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री अमन अरोड़ा ने घोषणा की कि राज्य को ग्रीन एनर्जी उत्पादन में अग्रणी बनाने के लिए एक नई पहल पर विचार किया जा रहा है। इस योजना के तहत कृषि क्षेत्र में स्थापित सोलर पंपों के माध्यम से उत्पादित अतिरिक्त सौर ऊर्जा को किसानों के लिए लाभदायक बनाया जाएगा।
पंजाब विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सुजानपुर के विधायक नरेश पुरी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में अमन अरोड़ा ने बताया कि यह कदम किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को भी बढ़ावा देगा। इस प्रस्तावित नीति के तहत, किसान अपनी आवश्यकता से अधिक उत्पन्न सौर ऊर्जा को ग्रिड में भेज सकेंगे, जिससे उन्हें वित्तीय लाभ मिलेगा। यह पहल पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और राज्य की ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने में सहायक होगी।
किसानों के लिए सौर ऊर्जा का दोहरा लाभ
मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, "हम किसानों को नवीकरणीय ऊर्जा में भागीदार बनाकर न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि उनकी आय बढ़ाने के भी अवसर प्रदान कर रहे हैं।" उन्होंने बताया कि पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी (PEDA) के माध्यम से 20,000 सोलर पंप स्थापित किए जाने हैं, जिनमें से 5,000 से अधिक पंप पहले ही किसानों को आवंटित किए जा चुके हैं।
सरकारी इमारतों पर बढ़ेगा सोलर एनर्जी का उपयोग
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 4,474 सरकारी इमारतों पर 34 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो हर साल 4.9 करोड़ यूनिट बिजली उत्पन्न कर रहे हैं। आगे की योजना के तहत अगले दो वित्तीय वर्षों में 100 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने की योजना है।
ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा प्लांट का फायदा
मंत्री ने बताया कि ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर पावर प्लांट उपभोक्ताओं के स्तर पर स्थानीय बिजली उत्पादन को बढ़ावा देते हैं, जिससे बिजली वितरण में होने वाले नुकसान में कमी आती है। साथ ही, इससे पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को नवीकरणीय ऊर्जा खरीद के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि दिन के समय उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में वापस भेजा जा सकता है, जिससे राज्य की ऊर्जा मांग और आपूर्ति के अंतर को संतुलित किया जा सकेगा।
पंजाब को मिलेगा हरित ऊर्जा राज्य का दर्जा
सरकार के इन प्रयासों से पंजाब को हरित ऊर्जा राज्य बनाने में तेजी आएगी। नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में मदद मिलेगी।