अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में जब वैश्विक व्यापार नीतियों में सख्ती देखने को मिल रही थी, उस समय भारत को टैरिफ में राहत मिलना एक चौंकाने वाला लेकिन रणनीतिक फैसला साबित हुआ। अमेरिका ने उस समय करीब 60 देशों के लिए टैरिफ में कटौती को नकार दिया था, लेकिन भारत को विशेष छूट देकर एक अलग संदेश दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन शुरू में भारत को इस सूची से बाहर रखने के पक्ष में था, लेकिन अंतिम समय में हुए कुछ कूटनीतिक संवाद और रणनीतिक बातचीत के बाद ट्रंप ने अपने निर्णय को रातोंरात बदल दिया। यह फैसला न केवल व्यापारिक नजरिए से अहम था, बल्कि यह अमेरिका और भारत के बीच गहराते रणनीतिक रिश्तों का संकेत भी था।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को यह छूट इसलिए मिली क्योंकि उस समय अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत को एक अहम सहयोगी के रूप में देख रहा था। इसके अलावा, भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल बाजार और मजबूत लोकतांत्रिक प्रणाली भी अमेरिका के लिए आकर्षण का केंद्र थीं।
टैरिफ में मिली इस राहत से भारत के कई निर्यातकों को बड़ा फायदा हुआ, खासकर टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, और ऑर्गेनिक उत्पादों के क्षेत्रों में। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका के बीच व्यापार संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।