नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर देशभर के मुसलमानों में गहरी असंतोष की भावना देखी जा रही है। इसी क्रम में अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से तत्काल मुलाकात का समय मांगा है। बोर्ड का कहना है कि यह बिल न केवल मुस्लिम समाज की धार्मिक और सामाजिक पहचान पर असर डालता है, बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में भी अनुचित हस्तक्षेप का रास्ता खोलता है।
बोर्ड के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है। उनका दावा है कि सरकार की ओर से लाया गया यह कानून धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विपरीत है और इससे वक्फ की संपत्तियों की निष्पक्षता और संरक्षण को खतरा हो सकता है।
बोर्ड ने अपने पत्र में राष्ट्रपति से अपील की है कि वे मुस्लिम समाज की भावनाओं को समझें और इस मुद्दे पर संवैधानिक तरीके से हस्तक्षेप करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि देश में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा है।
इस मुद्दे पर मुस्लिम संगठनों के साथ-साथ कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि इस तरह के विधेयक से सामाजिक सद्भाव पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अब यह देखना अहम होगा कि राष्ट्रपति कार्यालय से क्या प्रतिक्रिया मिलती है और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।