उम्र की दहलीज से कहीं आगे 33 वर्षीय लेखक व सॉफ्टवेयर इंजीनियर सपन सक्सेना


भुपेंद्र शर्मा, चंडीगढ़: सपन सक्सेना नाम है उन चंद खास शख्सियतों में से एक, जिन्होंने अपनी छोटी उम्र में ही तीन पुस्तकों की रचना कर यह साबित कर दिया कि परिपक्वता व सफलता कभी किसी उम्र की मोहताज नहीं होते, यह अल्प आयु में भी हासिल किये जा सकते हैं बशर्ते आपके अंदर कुछ कर गुजरने का जजबा और जुनून हो। सपन ने महज़ 33 वर्ष की आयू में दो किताबों और एक कॉमिक बुक की रचना कर पूरे देश के आचंभित कर दिया है। सपन यूं तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमती नगर से ताल्लुक रखते हैं मगर मौजूदा हालात में वे अमरीका के नेशोआ क्षेत्र के वाशिंदे हैं और बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी आजीविका कमा रहे हैं। सपन को माइथॉल्जी पर लिखने का खासा शौक है। आपने पहली पुस्तक फाइंडर्स कीपर्स की रचना वर्ष 2014 में की थी जिसकी जमकर सराहना हुई। हालांकि सपन अमरीका में सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं इसके साथ साथ पुस्तक लेखन में रुझान पर जब सवाल किया गया तो वे मुस्कुरा दिये और कहा कि उनके लेखन के पीछे उनकी प्रेरणा उनके यूको बैंक चंडीगढ़ के ज़ोनल हैड पिता जी श्री यू.सी.सक्सेना जी रहे हैं, उन्होंने ही मुझे माइथॉल्जी पर लिखने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि इसमें कुछ भी झूठ नहीं लिखा जा सकता यह सत्य पर आधारित होता है। शुरुआती दौर में सपन जी ने भारतीय माइथॉल्जी पर ब्लॉग लिखने शुरु किये जिसे कई नामी समाचार पत्रों व पत्रिकाओं ने अपने यहां प्राथमिकता से छापना शुरु किया। इसके बाद आप ने अपने इस कौशल को पुस्तक के रूप मे संजोने का फैसला लिया जिसमें आपकी धर्म पत्नि सुरुचि जी ने आपका खासा साथ दिया। सपन मानते हैं कि विश्व में सभी सफल व्यक्तियों के पीछे महिलाओं का साथ रहता है इस में कोई दो राय नहीं है। माइथॉल्जी पर विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान शिव जी की तीसरी आंख का जिक्र हमारे वेद पुराणों में है वह वैज्ञानिक जांच की कसौटी पर एकदम खरा उतरता है, उन्होंने बताया कि योग में तीसरी आंख जो ठीक माथे पर दो आंखों के बीच होती है उसे कुंडलिनी के जरिए जागृत किया जाता है। इसे आधुनिक साइंस में पीनल ग्लैंड के नाम से जाना जाता है। उन्होंने एक और संस्कृत भाषा के दोहे का उदाहरण देते हुए बताया कि यदि उसे आगे से पीछे की ओर पढ़ा जाये तो वह राम भगवान की कहानी के रूप में सामने आती है परंतु यदि उसे पीछे से आगे की ओर पढ़ा जाये तो यही कथा भगवान कृष्ण की बन जाती है। उक्त तथ्य हमें हमारी माइथॉल्जी में पढ़ने को मिलते हैं जो शतप्रतिशत सत्य हैं। उन्होंने बताया कि फाइंडर्स कीपर्स पुस्तक में उन्होंने तुलसी दास द्वारा शैव और वैष्णवों के झगड़ों को मिटाने की अद्भुत भूमिका का भी जिक्र किया है। वे मानते हैं कि माइथॉल्जी पर लिखने के लिए आपको पर्याप्त समय और गहन रिसर्च की आवश्यकता होती है यही वजह है कि आपको पहली पुस्तक लिखने में पूरा एक साल लग गया मगर जैसे ही यह मार्केट में आयी इसकी सबने तारीफ की। आपने माइथॉल्जी के आधार पर इस पुस्तक को भी 108 अध्यायों में बांटा है क्योंकि हिंदू धर्म में पवित्र माला के 108 मनके होते हैं जो अपने एक सर्कल में भगवान के पूरे मंत्र को संजोने की ताकत रखते हैं। आपने इसके बाद जो दूसरी पुस्तक उन्स-द केप्टिीवेशन लिखी वह पूूरी तरह से भिन्न विषय पर है। इस पुस्तक में प्यार के सात स्तरों का जिक्र किया गया है जो सूफी फिलास्फी पर आधारित है और इसे भारतीय ही नहीं विदेशी युवा पीढ़ी ने भी खासा पसंद किया है। उन्स में प्यार के सात स्तरों पर पूछे गये प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बड़ी संजीदगी से बताया कि उन्होंने यह विषय उर्दू की उस फिलास्फी से लिया है जिसमें इसका भरपूर जिक्र है। इस पुस्तक में युवाओं के लिए प्यार के अलावा थ्रिल भी है। उन्होंने बताया कि जब भी वे किसी पुस्तक की रचना का फैसला करते हैं तो उनकी सबसे पहली प्राथमिकता अच्छी किताब लिखने की रहती है न कि इसे लंबा खींचने की। वे चाहते हैं कि उनकी पुस्तक जो भी पढ़े उसे पसंद आये। आपकी उन्स पुस्तक को अमेज़न और गुड रीड्स पर काफी अच्छा रिस्पांस मिला है। उन्स में प्यार को आपने तीन विभिन्न ऋतुओं बसंत, पतझड़ और सर्द ऋतुओं के साथ जोड़ा है। इसमें प्यार की व्याख्या की है बसंत को टीन एज लव के साथ, पतझड़ को अडल्ट एज और सर्द को परिपक्व अवस्था के प्यार में संजोया है इसे पढ़ कर पाठक हर स्टेज की गंभीरता को करीब से देखने व जानने की चेष्टा करता है जो पूरी पुस्तक में रोमांच खत्म नहीं होने देता। इसे नई ऊम्र के पब्लीशर ने छापा है। उसका लक्ष्य युवा पीढ़ी है जो ज्यादातर सोशल मीडिया और आॅनलाइन पर हर दम सक्रिय रहती है। पुस्तक लेखन की कला सपन को गॉड गिफ्टिड है। जब सपन से यह पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी पुस्तक लेखन का रहीं से औपचारिक प्रशिक्षण लिया है तो वे मुस्कुरा दिये उन्होंने बताया कि इस विधा में सिवाय उनके पिता जी के और कोई गुरु नहीं है। हालांकि उन्होंने इसकी कुछ जानकारी आॅनलाइन जरूर प्राप्त की मगर इसे शब्दों में पिरो कर पाठक के सामने संजोने की कला उनकी अपनी ही है। इस नई पीढ़ी के लेखक को केवल लिखने का ही शौक नहीं है वे हर उस अच्छे लेखक की रचना की तारीफ भी करते हैं जिसे वे दिल से पसंद करते हों भले ही वह रचना भारतीय लेखक अमीश त्रिपाठी की हो या फिर विदेशी रस्किन बॉंड या फिर शेरलॉक हॉम्स की। पुस्तक लेखन में मिलने वाली चुनौतियों पर इस युवा पीढ़ी के उभरते लेखक का कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा चुनौती समय की रहती है चूंकि वे स्वयं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और 12 घंटों से ज्यादा समय अपने काम में बिताते हैं इसके बाद उन्हें अपनी पुस्तक के विषय पर गंभीरता से न केवल रिसर्च की आवश्यकता पड़ती है बल्कि तर्कसंगत आंकलन की भी जिसमें उनका साथ उनकी धर्मपत्नि देती हैं वही उनकी गाइड का काम भी करती हैं और सहयोगी का भी। वे उनके द्वारा सोचे गये विषयों को तर्क की कसौटी पर तोलती हैं और फिर उसे आधुनिक परिवेश में विचारती हुईं इसे फाइनल टच देती हैं वे सपन के द्वारा लिखी गई पुस्तक को बार बार पढ़ कर उसे समझती भी हैं और पॉजीटिव क्रीटिसिज़्म भी करती हैं, ऐसा कहना है सपन का।
मधुरभाषी व मिलनसार सपन का कहना है कि यूं तो उनका ध्येय केवल और केवल पुस्तक लिखने का है और रहेगा मगर उन्हें हाल ही में बॉलीवुड के एक प्रोड्यूसर ने टेलीसीरियल के लिए संपर्क किया है वे चाहती हैं कि आप उनके लिए विस्तृत स्क्रिप्ट की रचना करें जो फिलहाल सपन के लिए समय के अभाव के चलते संभव नहीं है। आपका मानना है कि वे अलग से किसी अन्य विधा के लिए फिलहाल वक्त नहीं निकाल पायेंगे। अपनी पुस्तक की रचना के लिए ही उन्हें रोजाना देर रात को डेढ़ घंटा निकालना होता है। जिस प्रकार सपन को घर में अपनी धर्मपत्नि जी से काफी स्पोर्ट मिलती है ठीक उसी प्रकार वैचारिक परिपक्वता और उसे कागज़ों पर उकेरने की ताकत उनके पिता जी से मिलती रहती है। आपके पिता जी हर वक्त आपको कुछ न कुछ लिखने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इनके अलावा माता जी से ओवर आल स्पोर्ट मिलती है जिसमें उनका मनोबल कायम रखना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए साहस जुटाना सब माता जी से मिलता है। सपन ने माइथॉल्जी पर आधारित एक कॉमिक पुस्तक रुद्रा भी लिखी है जिसे बच्चों ने काफी पसंद किया है। जब सपन से पूछा गया कि आप अमरीका में रहते हैं और वहीं पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर का काम भी करते हैं ऐसे में हिंदुस्तान से काफी दूर आप हिंदुस्तानी पाठकों के लिए कैसे और किस प्रकार लिख पाते हैं जबकि आपके पास तो माहौल विदेशी होता है, इस पर उन्होंने बताया कि अमरीका में जिस क्षेत्र में वे रहते हैं वहां एक साल में एक समय ऐसा आता है जब दो तीन महीनें बर्फ गिरने के कारण बाहर के सारे काम काज बंद हो जाते हैं आपको घर में ही रह कर आॅनलाइन काम करना होता है, उन हालातों में आपके पास अपने लिए और अपने लिखने के कौशल को निखारने के लिए खासा वक्त रहता है। हिंदुस्तानी माहौल पर उन्होंने बताया कि उनके घर के आसपास तीन बड़े मंदिर हैं जिनमें भारत के विभिन्न हिस्सों से आये लोग अपने इष्ट को नम्न करने आते हैं इससे उन्हें वहां अपने देश का संपूर्ण एंबिएस मिलता है जो शायद भारत के किसी एक हिस्से में रहकर भी नसीब न हो पाता। वे हमारे देश के सभी प्रांतों के वहां मनाये जाने वाले त्यौहारों में बढ़ चढ़ कर शरीक होते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी धर्म पत्नि जी भी लिखने का शौक रखती हैं तो उन्होंने कहा कतई नहीं। उल्टा उन्हें तो पढ़ने का और अच्छी क्रिटिक होने का शौक है। वे बेस्ट क्रिटिक हैं, एनालाइजर हैं। निजी तौर पर सपन धर्म पत्नि जी को पेंटिंग और सिंगिंग का शौक है जो वे यू ट्यूब पर सक्रिय रह कर पूरा करती रहती हैं। सपन के पिता जी जाने माने सफल बैंकर हैं और मौजूदा हालात में यूको बैंक के चंडीगढ़ ज़ोन के प्रमुख भी हैं जब सपन से पूछा गया कि वे बैंकिंग में क्यों नहीं गये तो उन्होंने मुस्कुरा कर कहा कि मैं बैंकिंग में पूरी तरह से मिसफिट हूं और नहीं चाहता था कि देश का मेरी वजह से नुकसान हो…हा हा हा।
33 वर्षीय सपन अपने लिखने के शौक के चलते एक परिपक्व इन्सान की तरह बात करते हैं इन्हें लुटेरा, प्यासा जैसी गंभीर विषयों पर आधारित फिल्में देखना पसंद हैं वे हर इंसान को समझने और परखने की ताकत रखते हैं वे मानते हैं कि उनकी हर रचना में कैरेक्टर असली जिंदगी की घटनाओं से लिए होते हैं जिसमें नकलीपन कतई नहीं होता। सपन हर पल हर किसी से कुछ न कुछ सीखने की चेष्टा करते रहते हैं आपका मानना है कि जीवन सीखने का नाम है और जिंदगी का हर पल आपको बहुत कुछ सिखाता है बशर्ते आपके अंदर उससे सीखने का दृढ़ इरादा और इच्छा शक्ति हो। वे अपनी रचनाओं की तारीफ करने वालों से ज्यादा आलोचना करने वालों को पसंद करते हैं आपका मानना है कि आलोचकों से आप को सीखने का और अपनी गल्तियां सुधारने का मौका मिलता है। इस वर्ष आपकी तीसरी पुस्तक मार्केट में आने वाली है जिस पर आप दिन रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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