Special Article (December Month)- समाज सेवक श्री सुभाष गोयल जी ने वायु प्रदूषण को जड़ से मिटाने का उठाया है बीड़ा, बांट रहे हैं हवा शुद्ध करने का अनोख पौधा-स्नेक प्लांट

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समाज सेवक श्री सुभाष गोयल जी ने वायु प्रदूषण को जड़ से मिटाने का उठाया है बीड़ा, बांट रहे हैं हवा शुद्ध करने का अनोख पौधा-स्नेक प्लांट

 

 

 

 

 

 

 

 

चंडीगढ़: जाने माने समाज सेवक, जीवन संचार वेल्फेयर सोसायटी के चेयरमैन, वर्धान आयुर्वेदिक एंड हर्बल मेडिसिन्स प्रा. लि.चंडीगढ़ के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं धन्वंतरी धाम के संस्थापक श्री सुभाष गोयल जी ने वायु प्रदूषण को जड़ से खत्म करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है इसके लिए उन्होंने कभी न खत्म होने वाली एक खास मुहिम चलाई है जिसके तहत वे दो राज्यों की राजधानी एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के हर मुअजिज़ शख्स को हवा को शुद्ध करने का एक खास पौधा स्नेक प्लांट यानि नाग पौधा पूर्णतय नि:शुल्क भेंट कर रहे हैं। श्री गोयल जी ने बताया कि नाग पौधा एक ऐसा पौधा है जो रात को कार्बन डाइयाक्साइड हटाता है और सी ओ टू को आॅक्सिजन में बदलता है। इसकी पुष्टि नासा भी कर चुका है। उन्होंने बताया कि यह आसानी से लगाया जा सकता है क्योंकि इसे बढ़ने के लिए सूर्य की ज्यादा रोशनी नहीं चाहिए होती है। इसकी देखभाल करना भी आसान है क्योंकि यह कम पानी में भी लग जाता है। सर्दियों में इसे अगर महीने में एक या दो बार भी पानी दिया जाए तो भी यह सूखता नही है। यह पौधा प्रदूषित हवा को शुद्ध करता है इसे आप अपने बेडरूम में लगा सकते हैं जिससे आपको शुद्ध हवा मिलेगी। स्नेक प्लांट या नाग पौधा हवा में मौजूद खतरनाक तत्व फॉरमलडिहाइड को फिल्टर करने में भी सहायक होता है।
गौरतलब है कि हमारे देश में साल 2017 में करीब 12 लाख लोगों की मौत केवल और केवल वायु प्रदूषण की वजह से हुई है। यह जानकारी वायु प्रदूषण पर आई एक वैश्विक रिपोर्ट में दी गई है। स्टेट आॅफ ग्लोबल एयर, 2019 रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय तक घर से बाहर रहने या घर में वायु प्रदूषण की वजह से 2017 में स्ट्रोक, मधुमेह, दिल का दौरा, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े की पुरानी बीमारियों से पूरी दुनिया में लगभग 50 लाख लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में बताया गया है, इनमें से तीस लाख मौतें सीधे तौर पर पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 से जुड़ीं हैं। इनमें से करीब आधे लोगों की मौत भारत व चीन में हुई है। साल 2017 में इन दोनों देशों में 12-12 लाख लोगों की मौत इसी वजह से हुई। अमेरिका की हेल्थ इफैक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) द्वारा जारी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में स्वास्थ्य संबंधी खतरों से होने वाली मौतों का तीसरा सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण और इसके बाद धूम्रपान है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस वजह से दक्षिण एशिया में मौजूदा स्थिति में जन्म लेने वाले बच्चों का जीवन ढाई साल कम हो जाएगा। वहीं वैश्विक जीवन प्रत्याशा में 20 महीने की कमी आएगी। साल 2017 में यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत सहित दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण से एक साल से कम उम्र के 1.22 करोड़ शिशुओं के मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ ने कहा था कि वायु प्रदूषण के संकट से लाखों भारतीय बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।
देश की केंद्र और राज्य सरकारें भले ही वायु प्रदूषण को लेकर कोई खास चिंतित नजर न आ रही हों मगर पूरा विश्व इस को लेकर खासा गंभीर है और अब देश की सवोच्च न्यायालय ने भी प्रदूषण पर गहन चिंता व्यक्त करते हुए राज्य और केंद्र सरकारों को जम कर फटकार लगाई है और कहा है कि विस्फोटक लाकर एक बार में ही सबको क्यों नहीं मार देते? सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि समय आ गया है कि राज्य सरकारें यह बताएं कि उन्हें हवा की खराब गुणवत्ता से प्रभावित लोगों को मुआवजा क्यों नहीं देना चाहिए? नागरिकों को स्वच्छ हवा और पेयजल सहित बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना उनका कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही सभी राज्यों को नोटिस जारी कर उनसे वायु की गुणवत्ता इंडेक्स, वायु गुणवत्ता के प्रबंधन और कचरा निस्तारण सहित विभिन्न मुद्दों का ब्योरा भी मांगा है। अदालत ने जल प्रदूषण के मामलों को भी गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीबीसीपी) और अन्य संबंधित राज्यों और उनके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण और गंगा यमुना सहित विभिन्न नदियों में मलशोधन और कचरा निस्तारण आदि की समस्या से निबटने से संबंधित आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया है।
समाज सेवक श्री सुभाष गोयल जी भी वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम कदम उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल उन्होंने स्नेक प्लांट बांटने की इस मुहिम को चंडीगढ़ में चलाया है और जल्द ही वे इस में स्कूली बच्चे और युवाओं को अपने साथ शामिल करेंगे ताकि उनकी इस मुहिम को पहले चंडीगढ़, फिर विभिन्न राज्य और बाद में देश और विदेशों तक फैलाया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा का अधिकार केवल हमारा ही नहीं बल्कि समूची मानव जाति का है। उन्होंने कहा कि वे इसके लिए किसान भाइयों, विभिन्न भट्ठा मालिकों और चिमनी से धूआं छोड़ने वाले उद्योगों के मालिकों और विभिन्न वाहन निर्माता कंपनियों से भी बात करेंगे और उन्हें वायु प्रदूषण के घातक परिणामों से अवगत करायेंगे ताकि वे भी वायु प्रदूषण पर रोक लगाने में एक अहम कदम उठा सकें।
श्री गोयल जी ने बताया कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए स्नेक प्लांट के अलावा कई और भी पौधे हैं जो हमारी प्रकृति को शुद्ध रखने में हमारी मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि इन में ऐलो वेरा पौधा है जो एयर पलूशन को सोखता है, स्किन और बालों को तो सुंदर बनाता ही है, कब्ज और मोटापे को भी कम करता है। इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, इसे सूरज की ज्यादा रोशनी की जरूरत होती है। इसी प्रकार ग्रीन तुलसी भी हवा को ताजा बनाए रखने के लिए काफी अच्छा पौधा है। इसे रोजाना पानी और सूरज की रोशनी चाहिए। असानी से मिल जाता है यह पौधा। सर्दी-जुकाम में राहत के अलावा इम्युनिटी भी बढ़ाता है यह। बोस्टोन फर्न पौधे को आप बालकनी में रख सकते हैं। सेंसेवरिया प्लांट-पलूशन कम करने में काफी असरदार है। यह 100 से भी ज्यादा केमिकल्स को सोख सकता है। यह पौधा रात में भी आॅक्सिजन देता है। इसे बेडरूम में रखें, कमरे में ताजगी बनी रहेगी। इसे कम रोशनी की जरूरत होती है। अशोक के पेड़ को आप अपने घर के चारों तरफ लगा सकते हैं। ये पेड़ पलूशन को कम करने में मदद करते हैं। इन्हें रोजाना पानी और धूप की जरूरत होती है। इनके अलावा नागफनी , रबड़ , राजहंस लिली , बैंबू पाम , पीस लिली , क्रेसेंथिमम , शेफ्रेला आदि पौधे भी हवा साफ करने के लिए लिहाज से काफी अच्छे हैं। नासा की क्लीन एयर स्टडी में इन सभी पौधों को पलूशन कम करने के लिए लिहाज से काफी असरदार पाया गया।
याद रहे दिल्ली के नेहरू प्लेस में एक ऐसी बिल्डिंग है, जो यहां काम करने वालों के लिए खुद ताजा हवा बनाती है। इस बिल्डिंग का नाम पहाड़पुर बिजनेस सेंटर है। इस 6 मंजिला बिल्डिंग में हर शख्स के लिए 4 पौधे हैं और पूरी बिल्डिंग में करीब 1200 पौधे लगाए गए हैं। मीटिंग रूम से लेकर कैफेटेरिया तक में पौधे लगे हुए हैं। यही नहीं, 50 हजार स्केवयर मीटर में फैले इस आॅफिस में पलूशन को चेक करने के लिए मॉनिटर भी लगाए गए हैं। बिल्डिंग को गर्मी से बचाने के लिए पूरी बिल्डिंग पर सफेद रंग किया गया है ताकि अंदर का तापमान न बढ़े। खिड़कियों पर जूट के परदे लगाए गए हैं। इस बिल्डिंग में काम करने वाले लोगों को ताजा और साफ हवा मिलती है। इससे उनके खून में आॅक्सिजन की मात्रा भी ज्यादा रहती है। 2008 में सरकार की ओर से इस बिल्डिंग को दिल्ली की सबसे सेहतमंद बिल्डिंग का टाइटल भी मिल चुका है। इस बिल्डिंग को 1990 में बनाया गया।

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Author

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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