यूं ही नहीं मिलती राही को मंजिल, एक जुनून सा दिल में जगाना होता है, पूछा चिड़िया से कैसे बना आशियाना, बोली-भरनी पड़ती है उड़ान बार-बार, तिनका तिनका उठाना होता है।

भुपेंद्र शर्मा, चंडीगढ़: जीवन एक यात्रा है। हर पल हम टारगेट सेट करते हैं फिर उन्हें अचीव करते हैं और एक्सेलिज्म की ओर बढ़ते जाते हैं, ऐसा कहना है पंजाब के एक नायाब कोहेनूर-डा. ज़ोरा सिंह जी का, जिन्होंने अपना पूरा जीवन ही देश की अगली पीढ़ी यानि युवाओं को श्रेष्ठ गुणवत्ता पर आधारित शिक्षा प्रदान करने पर लगा दिया है ताकि वे अपने भविष्य में सफल प्रोफेशनलज़, मैनेजरज़, उद्यमी तथा टेक्नॉलोजिस्ट्स तो बने हीं साथ में समाज के प्रति जिम्मेदार और जागरूक नागरिकों का अहम रोल अदा करें जिसकी आज खासी जरूरत है।
स्वभाव से गंभीर मगर शालीन डॉ. ज़ोरा सिंह जी का जन्म पंजाब के श्री मुक्सतर जिले में 14 फरवरी 1958 को हुआ। अपने जीवन की बुनियादी शिक्षा आपने स्थानीय गवर्नमेंट कालेज से अच्छे अंकों से पूरी की। चूंकि समाज के प्रति कुछ कर गुजरने की इच्छा आपके संस्कारों में रही है अतैव आपने मेडिकल का नोबल प्रोफेशन चुना और एम.बी.बी.एस. के लिए पटियाला के मेडिकल कालेज में दाखिला लिया यहां भी आपने अच्छे अंकों से एम.बी.बी.एस.की डिग्री हासिल की। पढ़ाई में आप शुरू से ही अव्वल रहते रहे हैं और सदैव जीवन में कुछ कर गुजरने का लक्ष्य आपके ज़हन में संजोया रहता था, इसी प्रतिभा के चलते आप पी.सी.एम.एस.के लिए कीनिया गये यहां भी आपने अपनी श्रेष्ठ परफार्मेंस दी और अभी एक वर्ष ही बीता था कि आपको इंग्लैंड से निमंत्रण आ गया वहां आपने मुश्किल से 6 महीने ही बिताये कि आपको अपने देश की मिट्टी फिर से पुकारने लगी। आप विश्व के सबसे ज्यादा विकसित देश इंग्लैंड को तिलांजलि दे कर सब कुछ छोड़ दुबारा अपने वतन आ गये और यहां तन मन धन से आम मुजÞलूमों की सेवा करने का प्रण लिया और 16 वर्षों तक लगातार बतौर बालरोग विशेषज्ञ जनता की सेवा की।
मगर भाग्य को तो कुछ और ही मंजूर था। कुदरत आपसे केवल समाज सेवा ही नहीं बल्कि इससे भी कुछ महत्वपूर्ण करवाना चाहती थी। आपको किस्मत ने देश की भावी पीढ़ी का भविष्य संवारने की अहम जिम्मेवारी दी जिसे आपने सर झुका कर स्वीकार किया और अपने इस्तेकबाल के साथ ही इस कभी न खत्म होने वाली मुहिम को हर हाल में सफल बनाने में जुट गये।
कड़ी मेहनत, काम के प्रति ईमानदारी और हर काम को अंजाम तक पुहंचाने का जुनून आपकी रगों में है। आपने वर्ष 1996 में अपने पिता जी की याद में पहले कालेज की नींव रखी और इसका नाम देश भगत रखा क्योंकि आपके पिता जी स. लाल सिंह जी उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। इसके चलते नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी ने स्वयं उन्हें अपनी आई एन ए में एक अहम जिम्मेवारी सौंपी हुई थी। देश के इस महान स्वतंत्रता सेनानी को बाद में तामर पत्र जैसे उच्च सम्मान से भी नवाजा गया था। वर्ष 2012 में देश भगत ग्रुप आॅफ इंस्टीच्यूट्स ने संपूर्ण युनिवर्सिटी का रूप अख्तयार कर लिया।
डॉ. ज़ोरा सिंह जी का कहना है कि वे इस युनिवर्सिटी में रिसर्च एजुकेशन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। क्योंकि आज देश के विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ अनुसंधान की आवश्यकता है ताकि हमारा देश विकसित देशों की श्रंखला में अग्रणी स्थान हासिल कर सके। इसी संदर्भ में देश विदेश से यहां पढ़ने के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं को श्रेष्ठ शिक्षा प्रदान की जा रही है।
अनुभवी डा. ज़ोरा सिंह जी से जब यह पूछा गया कि चूंकि वे आज एक सफल ब्युरोक्रेट, चिकित्सक, शिक्षक और उद्यमी हैं, तो उनका अब तक का सफर कैसा रहा और उन्हें कैसा महसूस होता है, इसपर उन्होंने बिना किसी झिझक के एक बार में ही बोला, फुली सेटिस्फाइड- मैं आज पूरी तरह से संतुष्ट हूं। हालांकि संतुष्टि आपको सुस्त न बना दे इस लिए मेरे अंदर ग्रोथ की भूख आज भी है और कल भी रहेगी और यह हर उस इंसान के अंदर रहनी भी चाहिए जो अपने लिए नहीं बल्कि अपने देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की चाह रखता है। हम आज गुणवत्ता पर आधारित उच्च शिक्षा को बरकरार रखने और फैलाने की ओर तवज्जो दिये हैं यह कभी न खत्म होने वाला अखंड मिशन है जिसमें मेरी धर्मपत्नि श्रीमति तेजिंद्र कौर(प्रो वाइस चांस्लर) जी सदैव मेरे साथ कंधे से कंधा मिला कर खड़ी रही हैं, ऐसा कहना है उस महान विजन के मालिक डॉ. ज़ोरा सिंह जी का। डॉ. ज़ोरा सिंह जी की दो संतानों में से एक सुपुत्र स. संदीप सिंह जी हैं जो इस युनिवर्सिटी के वाइस प्रेज़िडेंट का पदभार संभल रहे हंै और बेटी संगमित्रा जी शादी के बाद आगे की पढ़ाई जारी किये हैं।
डॉ. ज़ोरा सिंह जी मानते हैं कि आज कंपिटीटिव एजुकेशन का युग है जिसमें श्रेष्ठता ही सफलता की कुंजी है। जो शिक्षा संस्थान गुणवत्ता की शिक्षा का प्रसार छात्रों में करेगा वही सही व सच्चा संस्थान माना जायेगा। यह छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए आवश्यक भी है और अच्छा भी। उन्होंने माना कि आज कई और पहलुओं की मौजूदगी के चलते शिक्षा संस्थान चलाना खासा चुनौतीपूर्ण हो गया है मगर हमें चुनौतियां का सामना करने की आदत है, कहते ही मुस्कुरा दिये डॉ. ज़ोरा सिंह जी। उन्होंने बताया कि चुनौतियों की धार पर चलते हुए अपने लक्ष्यों पर कायम रहना ही तो प्रफेक्शन की निशानी है, जिसे हम अपनी बुनियाद मानते हैं। आज हम पहाड़ी के शीर्ष पर खड़े हैं और उस भगवान की कृपा से वहीं बरकरार भी हैं और रहेंगे भी, यह जज्बा केवल हमारे बीच ही नहीं बल्कि हमारी देश भगत युनिवर्सिटी से जुड़े उस हर शख्स के मन में है जो इसके लिए कुछ कर गुजरना चाहता है। डॉ. ज़ोरा सिंह जी ने बताया कि वे भविष्य में रिसर्च के अलावा कई नये कोर्सों शुरु करने पर भी तवज्जो देने का विचार कर रहे हैं ताकि समय के रहते वे देश में शिक्षा के नये पैमाने सेट करने में अहम भूमिका अदा कर सकें। गौरतलब है कि देश भगत युनिवर्सिटी में शिक्षा की गुणवत्ता के मद्देनजर हमारे देश से ही नहीं बल्कि सार्क देशों से भी छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं और इस युनिवर्सिटी के प्रबंधन की कोशिश है कि उनके यहां यूरोप तथा अन्य कॉंटीनेंट से भी बच्चे पढ़ने आयें और वे यहां से शिक्षा का अमूल्य ज्ञान हासिल करके अपने अपने देश को रोशन करें।
देश भगत युनिवर्सिटी
देश भगत युनिवर्सिटी मंडी गोबिंदगढ़ हालांकि पंजाब सरकार के देश भगत युनिवर्सिटी एक्ट के तहत अस्तित्व में आई मगर इसका बीजारोपण देश के उन चंद महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक सरदार लाल सिंह जी की उस बहुमूल्य सोच के आधार पर हुआ है, जिस के तहत उन्होंने न केवल देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया बल्कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आई एन ए में जो अहम भूमिका अदा की, वह कभी भुलाई नहीं जा सकती। देश की खातिर अपने आप को न्यौछावर करने वाले स.लाल सिंह जी को वर्ष 1972 में ताम्र पत्र से भी नवाजा गया। देश भगत युनिवर्सिटी उसी महान स्वतंत्रता सेनानी की सोच का नतीजा है।
इस युनिवर्सिटी के कैंपस मंडी गोबिदं गढ़, श्री मुक्तसर साहिब, मोगा, चंडीगढ़ और कीनिया में हैं। युनिवर्सिटी का लक्ष्य सदैव छात्रों को अकादमिक, प्रोफेशनल तथा पर्सनल डवेल्पमेंट के आधार पर उच्च शिक्षा में प्रवीणता प्रदान करना रहा है। यहां डैंटल एग्रीकल्चर साइंसिस, एयर लाइन्ज़, एनिमेशन, अप्लाइड साइंसिस, आर्ट एंड क्राफ्ट एंड फैशन टेक्नॉल्जी, आयुर्वेदा, कामर्स, कंप्यूटर साइंसिस,पब्लिक हेल्थ, एजुकेशन, इंजीनियरिंग, हॉस्पीटेलिटी एंड टूरिज्म, होटल मैनेजमेंट, लैंग्वेजिज, लॉ, मैनेजमेंट, मीडिया, नर्सिंग, परफार्मिंग आर्टस, फिजीकल एजुकेशन, सोशल साइंसिस विषयों पर आधारित विभिन्न कोर्स करवाये जाते हैं। पर्यावरण के करीब स्थित इस युनिवर्सिटी में स्टेट आॅफ आर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर-वाई-फाई कैंपस, ए.सी.क्लास रूम्ज़, डिजीटल लाइब्रेरी के साथ कंप्यूटर लैब्स, हॉस्टल में छात्र-छात्राओं के लिए अत्याधुनिक सुविधायें, सेमिनार, कान्फ्रेंस हॉल, खेल के मैदान तथा बसों की श्रंखला सब कुछ मौजूद है।

Categories: Uncategorized

cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *