हमारे देश में एक बार नहीं अनेकों बार मनाया जाता है न्यू ईयर सेलिब्रेशन
चंडीगढ़: भारत के किसी भी धर्म में 1 जनवरी को नया साल मनाने की प्रथा नहीं है। यहां लगभग सभी धर्मों में नया साल अलग-अलग दिन सेलिब्रेट किया जाता है। जैसे पंजाब में नया साल बैशाखी के दिन मनाया जाता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में भी बैशाखी के आस-पास ही नया साल मनाया जाता है। महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के महीने आने वाली गुड़ी पड़वा के दिन नया साल मनाया जाता है। गुजराती में नया साल दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। वहीं, इस्लामिक कैलेंडर में भी नया साल मुहर्रम के नाम से जाना जाता है।
हिंदू नव वर्ष
चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से, हिंदू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। इसे हिंदू नव संवत्सर या नया संवत भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन से विक्रम संवत के नए साल की शुरूआत होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि अप्रैल में आती है। इसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि नामों से भारत के कई क्षेत्रों में मनाया जाता है।
जैन नव वर्ष
दीपावली के अगले दिन से, जैन नववर्ष दीपावली के अगले दिन से शुरू होता है। इसे वीर निर्वाण संवत भी कहा जाता है। इसी दिन से जैन समुदाय अपना नया साल मनाते हैं।
पंजाबी नव वर्ष
पंजाब में नया साल वैशाखी पर्व के रूप में मनाया जाता है। जो अप्रैल में आती है। सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार होली के दूसरे दिन से नए साल की शुरूआत मानी जाती है।
पारसी नव वर्ष
पारसी धर्म का नया वर्ष नवरोज उत्सव के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज का उत्सव मनाया जाता है। 3000 वर्ष पूर्व शाह जमशेदजी ने नवरोज मनाने की शुरूआत की थी।
1 जनवरी से नये साल मनाने की प्रथा शुरू की ईसाईयों ने
1 जनवरी से नए साल की शुरूआत 15 अक्टूबर 1582 से हुई। इसके कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन कैलेंडर है। जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर बनाया। तब से 1 जनवरी को नववर्ष मनाते हैं।
1 जनवरी से शुरू होने वाले कैलेंडर को ग्रिगोरियन कैलेंडर के नाम से जाना जाता है। इस कैलेंडर की शुरूआत ईसाईयों ने क्रिसमस की तारीख निश्चित करने के लिए की, क्योंकि ग्रिगोरियन कैलेंडर से पहले 10 महीनों वाला रूस का जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था, लेकिन इस कैलेंडर में कई गलतियां होने की वजह से हर साल क्रिसमस की तारीख कभी भी एक दिन में नहीं आया करती थी।
क्रिसमस ईसाईयों के बीच बहुत खास होता है। इसी दिन प्रभु यीशु का जन्म हुआ था। यीशु ने लोगों के हितों के लिए अपनी जान दी और इनके इस त्याग को हर साल क्रिसमस के तौर पर मनाया जाता है।
इसी वजह से अमेरिका के नेपल्स के फिजीशियन एलॉयसिस लिलिअस ने एक नया कैलेंडर प्रस्तावित किया। रूस के जूलियन कैंलेंडर में कई सुधार हुए और इसे 24 फरवरी को राजकीय आदेश से औपचारिक तौर पर अपना लिया गया। यह राजकीय आदेश पोप ग्रिगोरी ने दिया था, इसीलिए उन्हीं के नाम पर इस कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन रखा गया 15 अक्टूबर 1582 को लागू कर दिया गया।
आज यही ग्रिगोरियन कैलेंडर पूरी दुनिया में मशहूर है और इसी में मौजूद पहले दिन यानि 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है। यह भी माना जाता है कि नए साल का उत्सव लगभग 4000 साल से भी पहले बेबीलोन में 21 मार्च को मनाया जाता था, जो कि वसंत के आने की तिथि भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी नव वर्षोत्सव तभी मनाया जाता था। रोम के बादशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45 वें वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, तब विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए साल का उत्सव मनाया गया।
पहचान बढ़ाने का अच्छा मौका
नए साल को सेलिब्रेट करते समय बहुत से लोग अपने आस-पास के लोगों के साथ पार्टी करते हुए करीब आते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो जान पहचान बढ़ाने के लिए ये अच्छा मौका है। इस मौके पर जान पहचान वालों के अलावा बहुत से अनजान लोग भी आपको बधाई देते हें। हर आने वाला साल अपने साथ ढेरों उतार-चढ़ाव लेकर आता है। जिनकी मदद से आपको एक बेहतर इंसान बनने में मदद मिलती है।


नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी, 2019 में होगा बुरा साल
हर साल की तरह ही इस बार भी 2019 के लिए फ्रांसीसी कवि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों को लोगों को डरा रही हैं। नास्त्रेदमस के अनुसार, साल 2019 की शुरूआत भयंकर प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और भूकंप से होगी। आतंकवाद बढ़ेगा और मानवीय आबादी का बड़ा हिस्सा बाढ़ में बह जाएगा। ऐसी कई भविष्यवाणियां फ्रांसीसी कवि नास्त्रेदमस ने 2019 को लेकर की थीं। उनके अनुसार 2019 में तीसरा विश्वयुद्ध होगा और मानव आबादी को बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ेगा।
फ्रांस में 16वीं शताब्दी (1503-1566) में जन्मे नास्त्रेदमस ने 400 साल पहले ही आने वाली 20 सदियों की भविष्यवाणियां कर दी थी। आश्चर्य की बात यह है कि उन्होंने जो भी भविष्यवाणी की थी, वे ज्यादातर सटीक साबित हो चुकी हैं। जैसे, ब्रिटिश राजकुमारी डायना की मौत, जर्मनी के शासक एडोल्फ हिटलर का उदय, परमाणु बम, द्वितीय विश्व युद्ध और 9/11 के हमले जैसी अनेक सटीक भविष्यवाणियां नास्त्रेदमस पहले कर चुके थे। उन्होंने 2019 के बारे में भी भविष्यवाणी की थी।
कविताओं के जरिए भविष्यवाणी करने वाले नास्त्रेदमस अपने भयानक वक्तव्य के लिए दुनियाभर में आलोचना का शिकार बनते रहे हैं। आज भी विद्वान उनकी आलोचना करने से नहीं रुकते हैं। नास्त्रेदमस के मुताबिक साल 2019 में धरती के लोगों को भयानक दुख झेलना पड़ेगा। उनकी गणना में कहा गया था कि 2019 में शुरू होने वाला दुख 2046 तक बना रहेगा।
यूरोप में बाढ़, अमेरिका में भूकंप की बात
1555 में लिखी किताब लीस प्रॉपर्टीज में नास्त्रेदमस ने कहा था कि साल 2019 में पूरी दुनिया का सर्वनाश कर देने वाला युद्ध (विश्व युद्ध 3) शुरू होगा, जो करीब 27 साल तक चलेगा। 942 कविताओं से भरी उस किताब में भविष्य के बारे में लिखा गया है। उसके मुताबिक यूरोप में भयंकर बाढ़ आएगी, जो जमकर तबाही मचाएगी। एक विनाशकारी भूकंप भी आएगा, जो कैलिफोर्निया (अमेरिका) से वैंकुवर (कनाडा) के बीच उभर रहा है। विश्व के मध्य पूर्वी देशों में आतंकवाद और धार्मिक उग्रवाद भी काफी तेजी से बढ़ेगा।
दुनिया खत्म होने की बात झूठ निकली
इन सभी बातों के अलावा नास्त्रेदमस ने ये भी भविष्यवाणी की थी कि इंसान, जानवारों से बातचीत करने की क्षमता भी विकसित करेंगे। हालांकि, नास्त्रेदमस ने साल 1999 में ही संसार के खात्मे की भविष्यवाणी की थी, जो बिल्कुल गलत साबित हुई। यही कारण है कि की विद्वान नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से नहीं डरने की बातें कहते हैं।
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समझ और ज्ञान
जसविंद्र सिंह रहेलूः क्या है। समझ को अगर परिभाषित किया जाये तो ज्ञान बन जाता है। समझ ही ज्ञान है। हम जितना ज्यादा समझने की कोशिश करेंगे ज्ञान उतना ही बढ़ता जायेगा। समझ का आखिरी पड़ाव ज्ञान बन जाता है। मैंने समझना है, यही विचार मनुष्य को ज्ञान तक ले जाता है। मैं सब समझता हूं, ऐसा कहना मनुष्य को ज्ञान से दूर ले जाता है। हम धर्म को विज्ञान के हिसाब से देखेंगे तो दोनों एक सी समझ रखते हैं।
वैज्ञानिक पदार्थों की खोज में लगे हैं। वे अपनी समझ का पड़ाव ज्ञान तक ले जाना चाहते हैं। किसी वस्तु का आविष्कार होना यह बता देता है कि समझ ज्ञान तक पहुंच चुकी है। समझ एक (कल्पना) थी, ज्ञान उसका फल होता है कि समझ रूकी नहीं ज्ञान तक पहुंच जाती है। अब अगर विकास यह सोचे मैं सब कुछ समझता हूं तो विकास यकीनन रूक जायेगा। वहां समझ चाह कर भी ज्ञान तक नहीं पहुंच पायेगी।
अब ऐसा ही धर्म के साथ है। समझते तो अपने आप में सब है, पर ज्ञान तक नहीं पहुंच पाते हैं। ज्ञान तक जो पहुंचेगा उसे स्वयं ही पता चल जायेगा कि वह ज्ञान तक पहुंच चुका है। ऐसा नहीं है कि आज तक ज्ञान तक कोई नहीं पहुंच पाया है इस तक बहुत पहुंच चुके हैं और पहुंच रहे भी हैं। फिर चाहे बात कबीर की हो या श्री गुरु नानक देव जी की या फिर रविदास जी की। अनगिणत संत जो अपनी समझ से ज्ञान तक पहुंचे हैं, परमात्मा तक पहुंचे हैं और मनुष्यता को परमात्मा का ज्ञान दिया है। अब अगर बीच के सेतु को निकाल दें तो मनुष्यता अधूरी रह जायेगी।
अब सवाल यह उठता है कि अपनी समझ को ज्ञान तक कैसे लेकर जायें। इसका एक ही उपाय है। हम यह सोचे समझें कि मैं कुछ नहीं जानता मैं जानना चाहता हूं। हमारी यही समझ ज्ञान तक ले जायेगी और विकास हो जायेगा। अगर हम यह सोचें कि मैं जानता हूं विकास आगे बढ़ ही नहीं पायेगा और रूक जायेगा।
समझ दो रास्तों पर चलती है। एक सच के रास्ते पर और एक अंधविश्वास के रास्ते पर। रास्ते हमने चुनने हैं। कौन सा रास्ता है जो हमें परमात्मा तक पहुंचा सके , सच तक पहुंचा सके। कबीर जी के जीवन में एक कहानी मिलती है। कबीर जी के गुरु का नाम रामानंद जी था। एक दिन रामानंद जी ने कबीर जी से कहा कि कबीर यह बर्तन लो दूध लेकर आओ आज श्राद्ध है। पूर्वजों को खाना खिलाना है। कबीर जी बर्तन लेकर निकल गये दूध लेने रास्ते में एक गाय मरी पड़ी थी। कबीर ने गाय को चारा डाला और पास बैठ गये जब सुबह से गये कबीर जी दूध लेकर नहीं आये तो रामानंद जी कबीर जी को देखने चल पड़े कि समय बहुत हो गया है खीर बनानी थी, कबीर जी आये नहीं। अब तक जब रास्ते में कबीर जी को देखते हुए जा रहे थे कि कबीर जी एक मरी हुई गाय के पास बैठे थे। रामानंद जी ने कहा दूध नहीं लाये कबीर। कबीर जी ने कहा चारा डाला है गाय को, खा ले फिर दूध भी दे देगी। रामानंद जी ने कहा कबीर यह गाय तो मर चुकी है चारा कैसे खायेगी, दूध कैसे देगी।
कबीर जी ने कहा गुुरु जी यह तो गाय आज ही मरी है और चारा खा नहीं सकती, मगर आप तो पूर्वज जो 100 साल पहले मर गये थे उन्हें कैसे खाना खिला दोगे। रामानंद जी को अपनी गल्ती का ऐहसास हो गया। बस यही दो रास्ते हैं एक सच का, एक अंधविश्वास का। अब देखना यह है कि हम कौन सा रास्ता चुनते हैं।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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