पी.जी.आई. चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. जगत राम की अगुवाई में संस्थान ने वर्ष 2018 में हासिल किये कई नये आयाम

चंडीगढ़:वर्ष 2018 पी.जी.आई.चंडीगढ़ के लिए बेहतरीन साल साबित हुआ है। इस साल जहां पी.जी.आई. ने निदेशक प्रो. जगत राम की अगुवाई में अपनी चिकित्सा पद्धति, रोगियों के श्रेष्ठ इलाज और चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान से अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल की है तो वहीं कई ऐसी नयी तकनीकों को भी शुरु किया है जिससे रोगियों का भला हो सके।
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के इन्शिएटिव से स्वास्थ्य क्षेत्र वर्ग में पी.जी.आई. की
दूसरे रैंक से नवाजा गया। इस संबंध में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेडकर ने पी.जी.आई.के निदेशक प्रो. जगत राम को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पुरस्कृत किया ।
– सरकारी संस्थानों की श्रंखला में कायाकल्प के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने पी.जी.आई.चंडीगढ़ को दूसरे पुरस्कार से सम्मानित किया है।
-पी.जी.आई.के ट्रांस्फ्यूजन मेडिसिन विभाग का चयन प्रतिष्ठित
इंट्रनेशनल सोसायटी आॅफ बल्ड ट्रांस्फ्यूजन फार द इयर 2018
सम्मान के लिए किया गया। इस विभाग को उक्त सम्मान रक्त दान की एच्छिक सेवाओं, वायरल मार्कर के लिए न्युलिक एसिड टेस्टिंग जैसे रक्त सुरक्षा के प्रयोगों को लागू करने और शिक्षा, ट्रेनिंग तथा रिसर्च के क्षेत्रों में अहम भूमिक निभाने के लिए दिया गया है।
-पी.जी.आई.के साइकेट्री विभाग के द ड्रग डी एडिक्शन एंड ट्रीटमेंट सेंटर ने शराब तथा ड्रग बंदी और बेस्ट रिसर्च तथा इनोवेशन के क्षेत्र में श्रेष्ठ काम करने के चलते प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार आर्गेनाइजेशन आॅफ एक्सीलेंस हासिल किया। पी.जी.आई.को उक्त पुरस्कार देश के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने दिया।
-स्थानीय न्युक्लीयर मेडिसिन विभाग ने पहले से मौजूद न्युक्लीयर कार्डियोलोजी सुविधा में स्पेक्ट गामा कामेरा प्रस्तुत करके पी.जी.आई.को देश का पहला ऐसा संस्थान बना दिया जहां यह सुविधा मौजूद है। विभाग ने इस सुविधा को अडवांस्ड कार्डियक सेंटर के पास स्थापित किया है। इससे कोरोनरी आर्टरी रोग से ग्रस्त रोगियों की जांच की जायेगी।
-रेडियोडायग्नॉसिस विभाग द्वारा कैंसर के नये इलाज क्रायोब्लेशन को शुरु किया गया। यह विधि कैंसर के उन रोगियों के लिए प्रस्तुत की गई है जो सर्जरी के लिए तैयार नहीं होते हैं। अब विभाग एक ही छत्त के नीचे हर तरह की अब्लेशन मोडेल्टीज़-रेडियोफ्रीक्युएंसी अब्लेशन, माइक्रोवेब अब्लेशन, इररिवर्सिबल इलेक्ट्रोपोरेशन, हाइ इन्टेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड तथा अब क्रायोब्लेशन करने के काबिल हो गया है।
-अडवांस्ड पेडियाट्रिक सेंटर में द नेक्स्ट जैनरेशन सीक्विेंसिंग सुविधा को शुरु किया गया है यह उन रोगियों के लिए होती है जो इन्हेरिटड जेनेटिक कंडीशन्स तथा कैंसर से जूझ रहे होते हैं।
-इ एन टी विभाग ने अर्ल्जी क्लीनिक की शुरुआत की है।
-पी.जी.आई. ने बच्चे को जन्म देने वाली महिला को लीवर ट्रांस्पलांट करने में अनूठी सफलता हासिल की है।
-पी.जी.आई. ने लीवर और रीनल फेल्योर वाले रोगी का सफलतापूर्वक लीवर और किडनी दोनों ही ट्रांस्पलांट करके उल्लेखनीय उपलब्धी हासिल की है।
-पी.जी.आई.के न्युरोसर्जनों ने मिनीमली इन्वेसिव स्पाइनल एंडोस्कोपी के जरिए बड़े इंट्राड्युरल स्पाइनल ट्यूमर का इलाज किया है। उक्त ट्यूमर 7 सें.मी. का था।
-पी.जी.आई. का स्ट्रोक को लेकर तैयार किया गया बड़ा डाटा अमरीका के प्रतिष्ठित इंटरनेशनल जरनल में छपा था। उक्त डाटा एस ए एच यानि सबआर्कनॉयड हैमरेज से संबंधित था। इसमें रोगी के दिमाग में मौजूद न्युरिज्म के अचानक फटने से रक्त निकलता है। जिससे रोगी के दिमाग में तेज दर्द होने लगता है।
-स्थानीय हैमेटोलोजी विभाग द्वारा लीवर रोग से ग्रस्त रोगियों पर स्टैम सेल थैरेपी को लेकर जो दो स्टडीज़ की गई थी वे प्रतिष्ठित इंटरनेशनल जरनल हैपेटोलोजी एंड क्लीनिकल गैस्ट्रोएंट्रोलोजी एंड हीपेटोलोजी में छपी थीं।
-कैंसर केयर सेवाओं तथा इससे संबंधित प्रशिक्षण और रिसर्च और बेहतर बनाने के लिए पी.जी.आई. चंडीगढ़ तथा अमेरिकन सोसायटी आॅफ क्लीनिकल ओंकोलोजी में एक एम.ओ.जी.साइन हुआ है।
-पी.जी.आई.चंडीगढ़ और कोल इंडिया लिमिटेड के बीच थैलेसीमिया ट्रांस्पलांट के लिए दो करोड़ रुपया मुहैया कराने को एक एम.ओ.यू.साइन किया गया है।
-पी.जी.आई. ने इस साल फैकल्टी में 176 नये पद पैदा किये हैं जबकि ओ टी टेक्नीशियन के लिए 43नये पद मुहैया करवाये गये हैं।
-नये प्रोजेक्टों में 250 बैड वाले नये अस्पताल का काम जनवरी 2019 में पूरा कर लिया जायेगा।
-संगरूर में पी.जी.आई.के सैटेलाइट सेंटर का काम भी जनवरी 2019 में पूरा हो जायेगा।
-मदर एंड चाइल्ड सेंटर तथा न्युरोसाइंसिस सेंटर का निर्माण कार्य भी जनवरी 2019 में शुरु हो जायेगा।
-पी.जी.आई. ने आॅनलाइन डोनेशन की सुविधा शुरु की है यह सुविधा पी.जी.आई.की आॅफीशियल वेबसाइट के जरिए शुरु की गई है।
-पी.जी.आई. के निदेशक प्रो. जगत राम ने अडवांस्ड ट्राउमा सेंटर के पास छठे नये अमृत सस्ती दवाओं तथा इंप्लांट मुहैया करवाने के नये आउट लेट का उद्घाटन किया है।
-साइकेट्री विभाग द्वारा न्युरो-डवेल्पमेंटल डिस्आॅर्डर से पीड़ित बच्चों और व्यस्कों के लिए नया वार्ड फार चाइल्ड एंड अडोल्सेंट साइकेट्री शुरु किया है।
-अडवांस्ड कार्डियक सेंटर में रोगियों की सुविधा के लिए चार नई लिफ्ट लगा दी गई हैं। अब यहां कुल 9 लिफ्ट हैं जिससे रोगियों को कोई खास दिक्कत नहीं होगी।
-पी.जी.आई.में इस साल मानसून के मौसम में 250 पौधों का पौधारोपण किया गया। इसके अलावा 500 मिश्रित प्रजातियों के पेड़ संस्थान के विभिन्न स्थानों पर लगाये जायेंगे।
-पी.जी.आई.के निदेशक प्रो. जगत राम ने यहां के आहार (डाइटेटिक )विभाग में नयी चपाती मेकिंग मशीन स्थापित की है। इस मशीन को स्थापित करने में विभाग प्रमुख सुनीता मल्होत्रा का खासा योगदान रहा है।
-पी.जी.आई. में इस साल जनवरी 2018 से दिसंबर तक कुल 33 कैडावर डोनेशन हुए हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर यहां 175 आर्गन डोनेशन हो चुके हैं जो अपने आप में बड़ी बात है। उक्त डोनेशन से पी.जी.आई. अब तक 417 मौत के मूंह में लगभग जा चुके मरीजों को बचा कर लाया है। यहां 67 किडनी, 16 लीवर, 2 हार्ट, 7 पैंक्रियाज तथा 776 कोर्नियाज़ हार्वेस्ट तथा ट्रांस्पलांट किये गये।
-पी.जी.आई.के निदेशक प्रो. जगत राम, माइक्रोबायोलोजी विभाग की प्रो. कुसुम शर्मा, पल्मनरी मेडिसिन विभाग के अडीश्नल प्रो. डा.नवनीत सिंह तथा स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ के अडीश्नल प्रो.डा. रविंद्र खईवाल ने अपने अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने के चलते इंट्रनेश्नल सम्मान हासिल किये हैं।
-डीन अकादमिक प्रो. राजेश कुमार, डीन रिसर्च प्रो. अरविंद राजवंशी, एम.एस.प्रो. ए.के.गुप्ता, इम्युनोपैथॉल्जी के प्रो. सुनील कुमार अरोड़ा, इंटर्नल मेडिसिन के प्रो. अमन शर्मा, स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ के प्रो. जे एस. ठाकुर, रेडियोडायग्नासिस विभाग के प्रो. मनदीप गर्ग, प्रो. महेश प्रकाश तथा प्रो. कुश्लजीत सिंह सोढ़ी, साइटोल्जी विभाग के प्रो. प्रणब डे तथा पैडियाट्रिक सर्जरी विभाग के अडीश्नल प्रो. डा. मोनिका बावा ने अपने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के चलते प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान हसिल किये हैं।



चंडीगढ़ आर्कीटेक्ट विभाग के बाबूओं की मेहरबानी का मोहताज है पी.जी.आई. के इमरजेंसी और ट्राउमा सेंटर विभागों को जाने वाला सीधा रास्ता
पी.जी.आई.के मुख्य गेट पर पहुंचने के बावजूद रोगी समय पर नहीं पहुंच पाते हैं अस्पताल , फंसे रहते हैं वाहनों के लंबे जाम में

चंडीगढ़: जी हां यह बात सौलह आने सच है कि नगर प्रशासन के चीफ आर्कीटेक्ट विभाग के बाबूओं की लाप्रवाही के चलते पी.जी.आई. के इमरजेंसी और ट्राउमा विभागों में गंभीर अवस्था में आने वाले रोगी अक्सर पी.जी.आई.के मुख्य द्वार पर लगे वाहनों के जाम में ही फंसे रह जाते हैं और वे चाह कर भी पी.जी.आई. की इमरजेंसी और ट्राउमा सेंटर में दाखिल नहीं हो पाते इस लिए इलाज के लिए जो उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए वह समय पर नहीं मिल पाती नतीजा कई रोगियों को गंभीर परिणामों से गुजरना पड़ता है, यह हम नहीं बल्कि पी.जी.आई.प्रशासन कह रहा है।
हद तो तब हो जाती है जब पी.जी.आई.के चीफ सिक्योरिटी आॅफीसर इस गंभीर समस्या को लेकर प्रशासन का बार बार ध्यान आकृषित करते हैं बावजूद इसके नगर प्रशासन का चीफ आॅर्कीटेक्ट विभाग बजाय कि पी.जी.आई. की इस गंभीर समस्या का हल ढूंढने के उल्टा पी.जी.आई.को ही अपने से सुलझाने के
भिन्न भिन्न सुझाव बताने लगता है जो व्यवहारिक तौर पर पूरी तरह से आधारहीन हैं। नतीजा समस्या आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है।
सिटी दर्पण से खास बातचीत में पी.जी.आई.के चीफ सिक्योरिटी आॅफीसर श्री पी.सी.शर्मा ने बताया कि पी.जी.आई.चूंकि चंडीगढ़ के मध्यमार्ग पर नगर के अंतिम छोर पर स्थित है और इसके ठीक सामने पंजाब विश्व विद्यालय का मुख्य गेट है। पहले चूंकि पी.जी.आई.के आगे चंडीगढ़ के सिवाय इक्का दुक्का गांवों के कोई खास एक्सटेंशन नहीं हुई थी जिससे उक्त क्षेत्र विकसित नहीं था आज जबकि पी.जी.आई.के आगे पंजाब ने अपने क्षेत्र में न्यू चंडीगढ़ का निर्माण कर दिया है और नये स्टेट हाईवे बना दिये हैं जो आगे हिमाचल प्रदेश के बद्दी और नालागढ़ तथा पंजाब के कुराली और रोपड़ मिलते है, नतीजतन अब हर कोई शार्ट-कट के चक्कर में इसे ही मुख्य मार्ग के तौर पर प्रयोग करने लगा है। जिससे अब इस मार्ग पर पहले से ज्यादा वाहनों की भीड़ लगने लगी है। कई बार तो उक्त वाहनों की भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती है कि पी.जी.आई.के मुख्य गेट के सामने वाहनों का जाम लग जाता है। इस जाम पर गौर फर्माते हुए पी.जी.आई. प्रबंधन ने अपने मुख्य गेट के सामने वाला डिवाइडर बंद करवा दिया था ताकि पी.जी.आई.में दाखिल होने वाले वाहन अन्य वाहनों की श्रंखला में न फंस जायें। अब पी.जी.आई. में दाखिल होने वाले हर वाहन को पी.जी.आई.के मुख्य गेट से 500 मीटर दूरी पर स्थित चौंक से यू टर्न लेकर अंदर आता है। मगर चूंकि मध्यमार्ग से होकर हिमाचल और पंजाब जाने वाले वाहनों की संख्या में ताबड़तोड़ वृद्धि हो रही है इससे इन वाहनों का जाम अब कई बार पी.जी.आई.के मुख्य गेट से 500 मीटर दूर चौंक तक भी लगने लगा है। जिससे अब पी.जी.आई.के इमरजेंसी और ट्राउमा सेंटर में दाखिल होने वाले वाहन पी.जी.आई.के मुख्य गेट से 500 मीटर दूर स्थित चौंक पर ही फंसे रह जाते हैं जिन दुर्घटना ग्रस्त अथवा सीरियस मरीजों को पी.जी.आई.के इमरजेंसी और ट्राउमा सेंटर में तुरंत पहुंचना होता है वे खासी देर जाम में फंसे होने के चलते समय पर पी.जी.आई.के अंदर दाखिल नहीं हो पाते नतीजा उक्त रोगियों को न चाहते हुए भी गंभीर परिणामों से हो कर गुजरना पड़ता है।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश से गंभीर अवस्था में आने वाले कई रोगियों के परिजनों और वाहन चालकों ने सिटी दर्पण को बताया कि वे अपने रोगी का समय पर इलाज कराने के लिए 50 से 100 कि.मी. क ा जो रास्ता तेजी से पूरा करते हुए चंडीगढ़ पी.जी.आई.के समीप पहुंच जाते हैं तो भी यहां अक्सर लगने वाले जाम के चलते वे चाहकर भी पी.जी.आई.के अंदर समय पर दाखिल नहीं हो पाते नतीजा उनके मरीज गंभीर हालत में वाहनों में ही पड़े रह जाते हैं। इसका उन्होंने की बार पी.जी.आई. प्रशासन को भी जिक्र किया है।
दूसरी ओर पी.जी.आई.के चीफ सिक्योरिटी आॅफीसर पी.सी.शर्मा ने बताया कि उन्होंने कई बार इस समस्या के बारे में नगर प्रशासन के चीफ इंजीनियर और चीफ आर्कीटेक्ट को लिखित में अवगत करवाया है मगर समस्या का हल नहीं निकल पाया है।
सूत्रों के मुताबिक पी.जी.आई.ने इस संबंध में नगर प्रशासन के चीफ इंजीनियर को भी लिखा जब उन्होंने इस संबंध में चीफ आर्कीटेक्ट से राय मांगी तो उन्होंने बजाय कि उक्त समस्या को हल करने के आधारहीन सुझाव दे डाले। पी.जी.आई.के चीफ सिक्योरिटी आॅफीसर का कहना है कि गर नगर प्रशासन पी.जी.आई.की बाउंड्री वॉल के बाहर बनी सर्विस लेन को पी.जी.आई.के मुख्य गेट के साथ मिला दे तो उक्त समस्या का हल निकल सकता है। पी.जी.आई.के इमरजेंसी तथा ट्राउमा सेंटर विभागों में आने वाले रोगी पी.जी.आई.के बाहर सर्विस लेन जो मध्यमार्ग पर लगने वाले जाम से अल्ग है को प्रयोग करके उक्त संबंधित विभागों में समय पर पहुंच सकेंगे।
दूसरी ओर वास्तविक्ता यह है कि पी.जी.आई.के बाहर बनी सर्विस लेन पर टेक्सी चालकों, ढाबा वालों और अन्य सामान रखने वाले फड़ी वालों का कब्जा है जिससे नगर प्रशासन के कई विभाग गैरकानूनी रूप से हफता वसूलते हैं वे चाह कर भी पी.जी.आई.की उक्त समस्या का हल नहीं होने देते और इस अवैध अधिग्रहण को नहीं हटाते इससे न केवल पी.जी.आई.में इलाज करवाने आने वाले गंभीर रोगी परेशान होते हैं बल्कि इन गंभीर रोगियों का इलाज करने वाला पी.जी.आई.भी। चंडीगढ़ के आर्कीटेक्ट विभाग के उक्त बाबूओं की वजह से बरकरार इस समस्या का हल कब होगा इसका उत्तर फिलहाल समय के गर्भ में है।

 




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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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