महज़ 11 माह के बच्चे की किडनी को 38 साल की महिला में ट्रांसप्लांट कर पी.जी.आई.चंडीगढ़ के डाक्टरों ने किया करिश्मा
चंडीगढ़: महज़ 11 माह के बच्चे की किडनी को 38 साल की महिला में ट्रांसप्लांट कर पी.जी.आई.चंडीगढ़ के डाक्टरों ने वाकई करिश्मा कर दिखाया है और यह करिश्मा यहां 15 डाक्टरों की टीम ने पहली बार किया। इस से पहले कभी इतनी नन्हीं उम्र के डोनर के अंगों का ट्रांसप्लांट नहीं किया गया है। इससे पहले पीजीआई तीन साल के बच्चे की किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है। मगर एक साल से कम उम्र के बच्चे की किडनी का ट्रांसप्लांट केवल चंडीगढ़ में ही नहीं पूरे भारतवर्ष में पहली बार हुआ है। जब डॉक्टरों से पूछा गया कि छोटे बच्चे की किडनी बड़ों में कैसे फिट होगी तो उन्होंने बताया कि किडनी धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए कोई दिक्कत नहीं आएगी। इस जटिल सर्जीरी को पूरा करने में 11 घंटों से ज्यादा तक का समय लगा है और इसमें पैडियाट्रिक न्युरोलोजिस्ट के अलावा किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा का खासा योगदान रहा है। पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के एचओडी डॉ. आशीष शर्मा का कहना है कि जब उन्हें इस नन्हें डोनर की सूचना मिली तो सबसे पहले उनके दिमाग में यह बात आई कि उसे ब्रेन डेड कैसे सर्टिफाइड करेंगे। क्योंकि इससे पहले उन्होंने इतनी कम उम्र के बच्चे के अंग ट्रांसप्लांट नहीं किए थे। इस बारे में पीडियाट्रिक न्यूरोलाजिस्ट से संपर्क किया गया। उन्होंने तुरंत एक टीम बनाई। छह-छह घंटे के अंतराल टीम ने बच्चे को दो बार ब्रेन डेड घोषित किया, ताकि कोई गुंजाइश न रहे। उसके बाद डॉ. दीपेश व डॉ. सर्वप्रीत के नेतृत्व में 15 लोगों की टीम गठित हुई। करीब 11 घंटे में बच्चे की किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट कर दी गई। डॉ. आशीष ने बताया कि ब्रेन डेड घोषित होने के बाद जब बच्चा आया था तो उसकी हालत काफी खराब हो गई थी। सिर्फ हार्ट चल रहा था। पल्स ढूढ़ने पर भी नहीं मिल रही थी। जब उसकी किडनी निकाली तो उसका साइज देखकर एक बार लगा कि क्या संभव हो सकेगा। आमतौर पर किडनी का साइज 10-12 सेंटीमीटर के बीच होता है, जबकि प्रीतम की किडनी का साइज मात्र पांच सेंटीमीटर था। फिर भगवान का नाम लिया और ट्रांसप्लांट शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि जिस महिला में किडनी ट्रांसप्लांट की गई है, उसकी स्थिति उस समय ठीक नहीं थी। उसका पति उसे छोड़ गया था। ट्रांसप्लांट के लिए जो रुपये खर्च होने थे, उसके लिए रुपये नहीं थे। उसे हैपेटाइटिस का इंफेक्शन था। डाक्टरों ने इसके लिए एक संस्था से संपर्क किया। उसके बाद संस्था रुपये के लिए राजी हो गई और उसका ट्रांसप्लांट भी हो गया। किडनी ने पूरी तरह से काम करना शुरु कर दिया है अब उक्त महिला की हालत में सुधार आ रहा है।


नेपाल का रहने वाला 11 माह का प्रीतम फरिशता बन कर आया था पी जी आई में
इस में कोई दो राय नहीं कि नेपाल का रहने वाला 11 माह का प्रीतम सच में उस महिला के लिए फरिशता बन कर आया था पी जी आई में, जिसे इसकी किडनी ट्रांसप्लांट की गई है। इलाज के समय तो उस महिला के अपने भी छोड़ भाग गये थे। बच्चे के फूफा भीम बहादुर ने बताया प्रीतम व उसके माता-पिता मूलरूप से नेपाल के रहने वाले हैं। बच्चे का पिता लक्ष्मण सेक्टर-26 के एक होटल में काम करता था, जबकि पत्नी गीता और प्रीतम नेपाल में रहते थे। प्रीतम के पेट में तकलीफ थी। बराबर दर्द रहता था। इलाज के लिए लक्ष्मण प्रीतम को पत्नी के साथ लेकर तीन महीने पहले चंडीगढ़ आया था। छह जुलाई को प्रीतम बेड से नीचे गिर गया और उसके सिर पर चोट आ गई। सिर से खून नहीं आया। बच्चे को लेकर वह पहले मेडिकल कालेज पहुंचे। वहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया। मगर सफलता नहीं मिली। सोमवार को पीजीआई ने ब्रेन डेड घोषित किया। पैरेंट्स चाहते थे कि इस दुनिया से जाने से पहले यदि उसके अंग किसी के काम आते हैं तो वह इसके लिए तैयार हैं।
पी.जी.आई. के डायरेक्टर प्रो. जगत राम का कहना है कि डोनर फैमिली के साथ मेरी पूरी संवेदनाएं हैं। बच्चे की फैमिली ने जो साहस दिखाया है, उसके लिए उन्हें मेरा सलाम। समाज के सामने एक मिसाल भी पेश की है। ट्रांसप्लांट करने वाली पीजीआई टीम को बधाई। दूसरी ओर पी.जी.आई. में आर्गन डोनेशन के लिए नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि बच्चे के माता-पिता पहले से ही आर्गन डोनेशन के बारे में अवेयर थे। वे अंगों के महत्व को जानते थे, इसलिए खुद से वे आगे आए। इस साल यह हमारा 20वां आर्गन डोनेशन है।

पी.जी.आई. ने मनाया स्थापना दिवस
पेरिस के कोचिन हॉस्पीटल विश्वविद्यालय से एमिरट्स प्रो. आॅफ मेडिसिन एंड थेराप्युटिक्स प्रो. लोइक गुलेविन ने पी.जी.आई. के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि द एडवेंचर आॅफ रेयर डिजीज: केयर एंड क्लीनिकल रिसर्च विषय पर एक लेक्चर दिया। उन्होंने बल्ड वेसल्स के सूजने से पैदा होने वाले रोगों को ट्रीट करने के लिए बनाये गये फ्रेंच ग्रुप के बारे में विस्तर से भी बताया उन्होंने इस उपचार के दौरान उन ड्रग्स के बारे में भी जिक्र किया जो रोगी के इम्मून सिस्टम को धराशाई कर देती हैं। उन्होंने कहा कि इससे ग्रस्त रोगी के नाक में खून आना, खांसी में खून आना, किडनी फेल आदि तक हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि वे इस पर आगे अनुसंधान कर रहे हैं ताकि उक्त रोग को समय के रहते रोका जा सके। इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रो. जगत राम ने संस्थान में हुए विकास के कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संस्थान के श्रेष्ठ काम के चलते ब्रिटिश मेडिकल जरनल ने इसे श्रेष्ठ अस्पताल का दर्जा दिया है। प्रो. जगत राम ने बताया कि जल्द ही पी.जी.आई. में न्युरोसाइंसिस सेंटर, मदर एंड न्यू बोर्न केयर सेंटर तथा नया मोड्यूलर आप्रेशन थियेटर कांपलेक्स स्थापित किया जायेंगे। विभिन्न अनुदान राशियों पर उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष संस्थान ने 1100 रिसर्च पेपरों के लिए 33 करोड़ रुपयों की एक्सट्रा मुरल ग्रांट प्राप्त की है। आजतक 5396 छात्र मेडिकल स्पेशिल्टी में तथा 2717 छात्र सर्जीकल स्पेशिल्टी में स्नात्कोत्तर डिग्रियां हासिल कर चुके हैं। इन के अलावा पी.जी.आई. 16 एम.डी. के कोर्स, 4 एम.एस.के कोर्स, 23 डी.एम.के कोर्स तथा 7 एम एक के कोर्स कर रहे हैं। मुख्य अतिथि प्रो. गिलेविन ने इस मौके पर 25 पी.जी.आई. के कर्मचारियों को उनके क्षेत्रों में उल्लेखनीय परफार्मेंस देने के चलते सम्मानित किया।


पी.जी.आई. का कार्डियोलॉजी विभाग बंटा तीन अल्ग अल्ग युनिटों में

रोगियों के उचित उपचार के मद्देनजर पी.जी.आई. के कार्डियोलॉजी विभाग को तीन अल्ग अल्ग बड़ी इकाइयों में बांटा गया है। इन में पहली इकाई के हैड प्रो. यशपाल शर्मा को बनाया गया है। इसकी ओ.पी.डी. सोमवार और गुरुवार लगेगी। मंगलवार और शुक्रवार कैथ डे होंगे। उनके साथ प्रो. अजय बहल, डा. सौरभ मेहरोत्रा, डा. हिमांशू गुप्ता तथा डा. प्रशांत पंडा रहेंगे। इसी प्रकार दूसरी युनिट को प्रो. मनोज कुमार रोहित के अधीन रखा गया है इनकी ओ.पी.डी. मंगलवार तथा शुक्रवार की होगी जबकि बुधवार और शनिवार कैथ डे होंगे। इनके साथ डा. संजीव नागनुर, डा. पराग बरवड़, डा. अंकुर गुप्ता तथा डा. भुपिंद्र सिहाग रहेंगे।तीसरी युनिट के हैड प्रो. राजेश विजेवर्गीय रहेंगे। इनकी ओ.पी.डी. बुधवार और शनिवार रहेगी तथा गुरुवार और सोमवार कैथ डे होंगे। इनके साथ डा. परमिंदर सिंह, डा. सूरज खनाल, डा. बसंत कुमार तथा डा. नीलम रहेंगे।
थैलेसीमिक चिल्ड्रन वेलफेयर ऐसोसिएशन ने 176 वां रक्त दान शिविर लगाया
थैलेसीमिक चिल्ड्रन वेलफेयर ऐसोसिएशन द्वारा आयोजित 176 वें रक्त दान शिविर में 212 रक्त दानियों ने रक्त दान किया। इस शिविर का उद्घाटन पैडलर परपल रेस्तरां के निदेशक विपुल दुआ तथा अशोक दुआ ने किया। संस्था के महासचिव रजिंद्र कालड़ा ने यहां उपस्थित सभी रक्तदानियों का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया।
भारतीय मनोविज्ञान के धनी प्रो. एन एन विग नहीं रहे
पी.जी.आई. में साइकेट्री विभाग को शुरु करने वाले भीष्मपितामह प्रो. एन एन विग का बीमारी के चलते12 जुलाई को देहांत हो गया। पी.जी.आई. के मौजूदा विभाग को फलने फूलने के पीछे उन्हीं को श्रेय जाता है। उन्हीं ने यहां वर्ष 1963 में विभाग की शुरुआत की और इसे बुलंदियों तक पहुंचाया। उनके द्वारा किये गये कामों के मद्देनजर उन्हें लिविंग लिजेंड की उपाधि भी दी जाती रही है।
नेशनल इंस्टीच्यूट आॅफ नर्सिंग एजुकेशन ने एक कार्याशाला का किया आयोजन
नेशनल इंस्टीच्यूट आॅफ नर्सिंग एजुकेशन ने हॉस्पीटल प्रशासन तथा एनस्थीसिया विभाग के साथ मिल कर रोल आॅफ नर्सिस इन ट्राइएज एंड डिसास्टर प्रीपेयर्डनेस विषय पर एक कार्याशाला का आयोजन किया। इस वर्कशाप का उद्घाटन पी.जी.आई. के निदेशक प्रो. जगत राम ने किया। उन्होंने इस प्रकार की पहली वर्कशाप आयोजित करने के लिए नाइन पर प्रिंसिपल डा. संध्य घई को बधाई दी । इस मौके पर नाइन की प्रिंसिपल डा. संध्या घई ने सब का स्वागत किया और डिसास्टर मैनेजमेंट में नर्सों के रोल को खासा अहम बताया। कार्याकारी एम एस डा. विपिन कौशल ने कंटीन्युइंग नर्सिंग एजुकेशन से संबंधित कार्यक्रमों को आगे भी आयोजित करने की जरूरत के बारे में बताया।
पी.जी.आई. के डायटेटिक्स विभाग ने लगाई चपाती मेकिंग की दूसरी मशीन
पी.जी.आई. के डायटेटिक्स विभाग ने नेहरू हॉस्पीटल में चपाती मेकिंग मशीन लगाने के बाद अब अडवांस्ड पेडियाट्रिक सेंटर में दूसरी चपाती मेकिंग मशीन लगा दी है। इसकी जानकारी विभाग प्रमुख सुनीता मल्होत्रा ने खास बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि पेडियाट्रिक विभाग में वे ए.पी.सी.के 300, अडवांस्ड कार्डियक सेंटर के 200, डी एडीक्षण सेंटर के 30, अडवांस्ड आई सेंटर के 100 रोगियों की रोजाना चपातीयां बनाते हैं। चूंकि पहले वे उक्त चपातियां हाथों से बनाते थे जिसमें मैनपावर तो ज्यादा लगती ही थी साथ में वक्त भी ज्यादा लगता था अब वे उक्त नई चपाती मेकिंग मशीन के जरिए आराम से कम समय में हाइजेनिक चपातियां तैयार करके ट्राली के जरिये अन्य विभागों तक पहुंचाने में सफल हो जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने दूध तथा अन्य दूध से बने पदार्थों, फ्रूट और सब्जियों को तरोताजा रखने के लिए पहले से ही कोल्ड रूम तैयार कर रखा है।

पी.जी.आई. में कर्मचारियों की अटैंडेंस के लिए बायोमीट्रिक मशीनें लगनी शुरू
देश के जाने माने स्नात्कोत्तर चिकित्सा एवं शिक्षा संस्थान पी.जी.आई.चंडीगढ़ में कर्मचारियों की अटैंडेंस के लिए बायोमीट्रिक मशीनें लगानी शुरु कर दी गई हैं। सुत्रों के मुताबिक उक्त मशीनें विभिन्न चरणों में लगाई जायेंगी। पहले चरण में कैरों ब्लॉक, न्यू ओ पी डी तथा एम एस आॅफिस के इस्टेब्लीशमेंट सेक्शन में उक्त मशीनें लगाई जा रही हैं। शुरुआती दौर में 10 मशीनों का आर्डर दिया गया है। जैसे ही इनकी सफलता का अंदाजा लगेगा इसके बाद अस्पताल के अन्य खंडों में भी उक्त मशीनों को लगा दिया जायेगा। पी.जी.आई. प्रशासन का मानना है एंट्री गेटों पर लगने वाली इन मशीनों से कर्मचारियों में पंक्चुएलिटी भी बढ़ेगी और स्तर्कता भी।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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