PGI Report (December Month) डॉक्टरों और रिसर्च स्कॉलरों के लिए ई-लाइब्रेरी एप लॉन्च, महज एक मिनट में मिलेगी हर जानकारी

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डॉक्टरों और रिसर्च स्कॉलरों के लिए ई-लाइब्रेरी एप लॉन्च, महज एक मिनट में मिलेगी हर जानकारी

चंडीगढ़: पीजीआइ चंडीगढ़ स्थित डॉ. तुलसी दास लाइब्रेरी द्वारा माइ लाइब्रेरी आॅन फिंगर टिप्स (एलओएफटी) लॉन्च किया गया। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और चेयरमैन लाइब्रेरी कमेटी प्रो. एके गुप्ता की ओर से यह ई-लाइब्रेरी एप लॉन्च किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए पुस्तकालय के प्रयासों की सराहना की। इस एप के जरिए अब पीजीआई के फैकल्टी मेंबर, रेजिडेंट, रिसर्च स्कॉलर व अन्य मेंबर एप के जरिए लाइब्रेरी में उपलब्ध सभी प्रकार की जानकारी अब एक मिनट के अंदर अपने मोबाइल पर या वेब पर इस एप के जरिए पा सकेंगे। इस एप के जरिए उपयोगकतार्ओं को सामग्री को डाउनलोड करने और आॅफलाइन पढ़ने के लिए कहीं से भी सहेजने की अनुमति देता है। प्रो. एके गुप्ता ने इस एप्लिकेशन के महत्व पर चर्चा की और इसे विपणन पर जोर दिया ताकि सब्सक्राइब किए गए ई-संसाधनों का पूरी तरह से संस्थान उपयोगकतार्ओं द्वारा उपयोग किया जाए। उन्होंने डॉ. तुलसी दास लाइब्रेरी द्वारा इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की और उपयोगकर्ता जागरूकता सत्रों की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

वर्धमान ग्रुप ने पी.जी.आई.के अडवांस्ड आई सेंटर में आई बैंकिंग और कोर्नियल ट्रांसप्लांटेशन के लिए 36 लाख रूपयों का दान दिया

वर्धमान ग्रुप ने पी.जी.आई.के अडवांस्ड आई सेंटर में आई बैंकिंग और कोर्नियल ट्रांसप्लांटेशन के लिए 36 लाख रूपयों का दान दिया है। ग्रुप की ओर से यह दान राशि का चेक वर्धमान ग्राप के चेयरमैन एवं पद्म भूषण अवार्डी श्री एस.पी.ओस्वाल जी ने पी.जी.आई.के निदेशक प्रो. जगत राम को भेंट किया। इस मौके पर ग्रुप के इंडीपेंडेंट डायरेक्टर ए.के.कुंदरा भी मौजूद रहे। पी.जी.आई.के निदेशक प्रो. जगत राम ने वर्धमान ग्रुप का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि इस से पी.जी.आई में मौजूदा आई बैंकिंग की सुविधाओं को और बल मिलेगा। उन्होंने बताया कि पी.जी.आई. में 2500 के करीब रोगी आज भी कोर्नियल ट्रांसप्लांटेशन के लिए वेटिंग लिस्ट में हैं जबकि हर साल 700-800 रोगी ही उक्त कोर्नियल ट्रांसप्लांटेशन प्राप्त कर पाते हैं। हाल ही में पी.जी.आई. के अडवांस्ड आई सेंटर ने आई डोनेशन अवेयरनेस वीक भी मनाया था। इसके तहत विभाग ने ट्राइसिटी में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया।

चंडीगढ़ में डॉक्टरों की कमी अब एमडी स्टूडेंट पूरी करेंगे, एमसीआई ने पास किया प्रोग्राम

चंडीगढ़ के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी अब मेडिकल कालेज के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट पूरी करेंगे। पिछले हफ्ते नई दिल्ली में मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की नवगठित बोर्ड आफ गवर्नर की पहली बैठक में डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम के प्रस्ताव को पास किया गया है। यह प्रोग्राम मेडिकल कालेज के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट (एमडी की पढ़ाई करने वाले डाक्टरों) के पाठ्यक्रम में शामिल होगा। इसके तहत तीन महीने उन्हें शहर के जिला अस्पताल में प्रैक्टिस करनी होगी। चंडीगढ़ में सेक्टर 16, 22, 45 और मनीमाजरा जिला अस्पताल की श्रेणी में आते हैं। मरीजों की संख्या के अनुपात के मुताबिक यहां पर डाक्टरों की बेहद कमी है। ये कमी अब डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम से दूर होगी। बीते हफ्ते नई दिल्ली में आयोजित बैठक की अध्यक्षता बोर्ड आफ गवर्नर के चेयरमैन डॉ. वीके पाल ने की। बैठक में पेश किए एजेंडे के मुताबिक यह स्कीम सरकारी मेडिकल कालेज के अतिरिक्त प्राइवेट व डीम्ड यूनिवर्सिटी में भी लागू होगी। पीजी कोर्स का हिस्सा होने की वजह से प्राइवेट व डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को भी तीन महीने की सेवाएं जिला अस्पताल में देनी होंगी। ट्रेनिंग पीरियड के दौरान उन्हें डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंट कहा जाएगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण क्लॉज यह है कि फाइनल एग्जाम में बैठने से पहले हर स्टूडेंट को संतुष्टि प्रमाण पत्र दिखाना होगा। यह प्रमाण पत्र जिला अस्पताल के हेड या स्टेट गवर्नमेंट देगी। जिस स्टूडेंट्स के पास यह सर्टिफिकेट नहीं होगा, उसे एग्जाम में बैठने की इजाजत नहीं मिलेगी। विशेषज्ञों ने बताया कि रोटेशन प्रक्रिया के तहत एक के जाने के बाद दूसरे आने की नीति लागू रहने से एमडी स्टूडेंट की जगह खाली नहीं रहेगी। वह जगह स्थाई बनी रहेगी।
डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम लागू होने से कई फायदे हैं। पहला डॉक्टरों की कमी दूर होगी। दूसरा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में क्वालिटी केयर में इजाफा होगा। टर्शरी केयर इंस्टीट्यूट या मेडिकल कालेज में जाने वाले काफी मरीजों का इलाज जिला हॉस्पिटल में हो सकेगा। इससे बड़े अस्पतालों से भीड़ कुछ कंट्रोल होगी। तीसरा फायदा यह होगा कि पीजी स्टूडेंट्स को कम्युनिटी के साथ काम करने का मौका मिलेगा। इससे जब वे पीजी की पढ़ाई करने के बाद जब किसी दूसरे हॉस्पिटल में जाएंगे तो मरीज और उनके बीच अच्छा संवाद बनेगा।

चंडीगढ़ में इसलिए होती है डॉक्टरों की कमी

यहां के अस्पतालों में मरीजों का जितना अनुपात है, उसके मुताबिक डॉक्टरों की कमी बनी ही रहती है। दूसरा यहां पर डॉक्टर डेपुटेशन या यूपीएससी के तहत आते हैं। डेपुटेशन पर वे पंजाब व हरियाणा से आते हैं। वहां पहले से ही डॉक्टरों की कमी है। यूपीएसएसी के तहत आने वाले डॉक्टरों की अपनी मुसीबतें हैं। एक तो सैलरी कम है और दूसरा चयन प्रक्रिया बहुत लंबी है। इस वजह से यहां डॉक्टरों की कमी बनी रहती है।

मध्य मार्ग पर पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच बनेगा अंडरपास, प्रशासक सहमत

चंडीगढ़: पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच पैदल यात्री अंडरपास के निर्माण को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को लेकर एक प्रेजेंटेशन दी और बताया कि पीजीआई और पीयू आने-जाने वाले हजारों लोगों को गाड़ियों की आवाजाही के बीच रोजाना सड़क पार करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें काफी मुसीबत झेलनी पड़ती है। कई लोग तो हादसे का शिकार भी हो चुके हैं। प्रशासन के अधिकारियों ने सर्वे करने के बाद बैठक के दौरान पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर प्रशासक ने सहमति जता दी है। प्रशासक की आधिकारिक तौर पर मंजूरी के बाद अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने सर्वे कर अंडरपास बनाने के लिए जगह को भी चिह्नित कर ली है। गौरतलब है कि पीजीआई में प्रतिदिन हजारों की संख्या में स्थानीय और दूसरे राज्यों से मरीज व उनके तीमारदार का आना-जाना होता है। इन लोगों को मरीजों के साथ पीजीआई जाने और आने के लिए मध्य मार्ग की रोड को ट्रैफिक के बीच पार करना पड़ता है। इससे कई समस्याएं आती हैं। इससे निपटने के लिए पिछले साल यूटी प्रशासन के अफसरों और पीजीआई डायरेक्टर की बीच एक बैठक हुई थी। इसके प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र का सर्वे किया गया और एक अंडरपास बनाने पर सहमति बनी। इस अंडरपास के बनने से पीयू आने व जाने वाले छात्रों को भी सड़क क्रास करने की जरूरत नही होगी।

अंडरपास के लिए बुनियादी ढांचे का भी अध्ययन

प्रशासक के निर्देश पर अंडरपास बनाने के लिए एक योजना बनाई गई। इंजीनियरिंग विभाग ने सर्वे कर अंडरपास के निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित किया। सर्वे द्वारा अंडरपास के लिए पाइप और अन्य बुनियादी ढांचे का भी अध्ययन किया गया, जिसकी जानकारी सोमवार को प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को दी गई। यूटी इंजीनियरिंग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीजीआई में आने और जाने वाले मरीजों की सुविधा को देखते हुए अंडरपास बनाने का फैसला किया गया है।

ट्रैफिक रूट जाएगा बदला

अंडरपास का निर्माण शुरू होने पर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक रूट का अध्ययन किया जा रहा है। अंडरपास का निर्माण कार्य हो जाने के बाद आम लोगों को सड़क पार करने में जहां आसानी होगी, वहीं वाहनों का आवागमन भी आसानी से हो सकेगा।

पीजीआई चंडीगढ़ में बच्चे की मौत, नर्स पर लापरवाही के आरोप, जांच के लिए कमेटी गठित

चंडीगढ़: पीजीआई में 12 वर्षीय लड़के की मौत पर उसके परिजनों ने नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि नर्स ने गलत इंजेक्शन लगा दिया, जिससे बच्चे की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इस मामले की शिकायत पीजीआई डायरेक्टर से की। डायरेक्टर ने तुरंत मामले की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों की एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। कमेटी में बाल रोग विशेषज्ञ व प्रमुख डा. सुरजीत सिंह, इंटरनल मेडिसिनर के डा. संजय जैन, नेफ्रोलाजी विभाग के डा. मनीष राठी व फोरेंसिक मेडिसिन व हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रतिनिधि को भी शामिल किया गया है। बाबूराम के मुताबिक, वह मूलरूप से मुरादाबाद (यूपी) के रहने वाले हैं और यहां ढकोली (जीरकपुर) में रहते हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनका 12 वर्षीय बेटा सोनू बुखार व उल्टी से पीड़ित था। 11 नवंबर को उसे सिविल हास्पिटल फेज छह में भर्ती कराया गया। वहां पर कोई सुधार नहीं होने पर उसे 16 नवंबर को पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में उसकी हालत में सुधार होने लगा था। बाबू राम का कहना है कि पीजीआई के डाक्टर ने उन्हें एक इंजेक्शन लाने को कहा। वे अमृत फामेर्सी से इंजेक्शन ले आए। इंजेक्शन लगते ही बच्चे की हालत खराब होने लगी और उसे दोबारा से वेंटिलेटर पर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। उन्होंने पीजीआई को लिखित में शिकायत दी है कि उन्हें शक है कि उनके बेटे की मौत गलत इंजेक्शन के लगने से हुई है। इस पर पीजीआई नर्सिंग एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सतबीर डागर का कहना है कि मौत की क्या वजह रही है, वो तो जांच कमेटी से पता करेगी लेकिन नर्स ने गलत इंजेक्शन नहीं लगाया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलेगा, बच्चे की मौत गलत इंजेक्शन से हुई या नहीं

12 वर्षीय बच्चे की मौत के मामले में पीजीआई ने जांच शुरू कर दी है। पीजीआई ने उसके शव का पोस्टमार्टम करा दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल जाएगा कि उसकी मौत की वजह क्या थी? परिजन गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगा रहे हैं। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से साफ हो जाएगा कि बच्चे के शरीर में इंजेक्शन गया है या नहीं। हालांकि, नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि परिजन केमिस्ट से गलत इंजेक्शन लाए जरूर थे, लेकिन उसे लगाया नहीं गया है। बच्चे के पैरेंट्स की शिकायत पर पीजीआई में वरिष्ठ चिकित्सकों की अगुवाई में एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में बाल रोग विशेषज्ञ व प्रमुख डॉ. सुरजीत सिंह, इंटरनल मेडिसिनर के डॉ. संजय जैन, नेफ्रोलाजी विभाग के डॉ. मनीष राठी व फोरेंसिक मेडिसिन व हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रतिनिधि को भी शामिल किया गया है। कमेटी अपनी रिपोर्ट इस हफ्ते दे देगी। दूसरी ओर, परिजनों ने मंगलवार को ट्रामा सेंटर के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि वे इंसाफ चाहते हैं। उनके बच्चे की मौत के जिम्मेदार को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। बच्चे के पिता बाबू राम ने बताया कि 11 नवंबर को उसके बेटे सोनू की तबियत खराब हो गई थी। उसे सेक्टर छह हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया है। पीजीआई में दाखिल उसका बेटा ठीक होने लगा था, लेकिन रविवार शाम दिए एक इंजेक्शन से उसकी तबियत खराब होने लगी और उसने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि डाक्टर ने उन्हें वैंकोमाइसिन इंजेक्शन लिखकर दिया था। परिजन अमृत फामेर्सी पहुंचे तो वहां उन्हें रोक्रोनियम इंजेक्शन दे दिया गया। नर्स ने बिना देखे उसे लगा दिया और बच्चे की मौत हो गई। पीजीआई से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वेंकोमाइसिन बैक्टीरियल इंफेक्शन पर दिया जाता है, जबकि रोक्रोनियम मांसपेशियों को ढीला करने के लिए। दोनों की शीशी में काफी अंतर है। वेंकोमाइनसिन की शीशी चौड़ी और गोल है, जबकि रोक्रोनियम पतली शीशी में आता है। हाथ में आते ही पहचान लिया जाता है कि कौन सा इंजेक्शन है। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर इस तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। फिर भी किसी ने आरोप लगाए हैं तो उसकी जांच होनी चाहिए। आखिर बच्चे की मौत का मामला है। उधर, पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।

5000 कर्मियों को वापस देना होगा तीन साल का दिवाली बोनस, पीजीआई के निर्देश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक आदेश से पीजीआई के पांच हजार कर्मियों के होश उड़ गए हैं। मंत्रालय ने पीजीआई को निर्देश दिया है कि वे ग्रुप बी, सी और डी के कर्मियों से साल 2015-16 से 2017-2018 तक दिवाली पर दिए गए बोनस को वापस ले। इस आदेश के बाद पीजीआई को भी समझ में नहीं आ रहा है कि वह इस पर कैसे अमल करे। इस निर्देश के खिलाफ पीजीआई की यूनियनें सख्त हो गई हैं। उनका कहना है कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है। दिवाली पर बोनस हर कर्मी का अधिकार होता है। यदि इस तरह की कोई रिकवरी की गई तो इसका कड़ा विरोध जताया जाएगा।पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने कहा कि वे इस समय बाहर हैं। वापस आने पर इस पर कोई बात कह पाएंगे। पीजीआई प्रवक्ता डॉ. अशोक कुमार ने कहा है कि मामले पर राय ली जा रही है। बताया जा रहा है कि पांच हजार कर्मियों से करीब 10-12 करोड़ की रिकवरी की जाएगी। ग्रुप बी की कैटेगरी में नर्सिंग आफिसर, आफिस सुपरिंटेंडेंट व पर्सनल असिस्टेंट आते हैं, जबकि ग्रुप सी में क्लर्क व ग्रुप डी में हॉस्पिटल व सेनिटेशन अटेडेंट्स शामिल हैं। बताया जा रहा है कि साल 2015 में वित्त मंत्रालय ने स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों को बोनस देने के पत्र पर रोक लगा दी थी। स्थायी वित्त समिति की बैठक में यह मुद्दा उठा था, लेकिन स्थायी वित्त समिति ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि वित्त मंत्रालय ने स्वायत्त निकाय कर्मचारियों के कर्मचारियों को बोनस के भुगतान के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है। साथ ही निर्देश दिया है कि भविष्य में इस तरह के बोनस का भुगतान तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि इस संबंध में आदेश विशेष रूप से पारित नहीं किए जाते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता वाली गवर्निंग बॉडी की बैठक में भी बोनस को रेगुलर दिए जाने के पीजीआई के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था। दूसरी तरफ कर्मचारियों ने भी संस्थान पर बोनस दिए जाने का दबाव बनाया। इस साल भी दिवाली के मौके पर बोनस जारी कर दिया गया, लेकिन शर्त रखी गई कि यदि केंद्र सरकार बोनस की वसूली के लिए कॉल करती है तो रुपया बिना किसी नोटिस के वापस ले लिया जाएगा। अब वसूली के निर्देश जारी हो गए हैं।
यह निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय से आया है, जबकि वित्त मंत्रालय से ऐसा कोई निर्देश नहीं आया है। यह पहली बार होगा कि कांट्रैक्ट कर्मचारियों को बोनस का भुगतान किया जाएगा, जबकि नियमित कर्मचारियों से वसूली की जाएगी।
-अश्विनी मुंजाल, अध्यक्ष, पीजीआई कर्मचारी संघ
यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है। बोनस तो कर्मचारियों का हक होता है। इस मुद्दे पर पीजीआई को कर्मचारियों का साथ देना चाहिए और इस मसले पर मंत्रालय से मजबूती से बात करे।
– सत्यवीर डागर, महासचिव, पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन

800 ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को मिली डिग्रियां, सिक्योरिटी गार्ड और दिव्यांग भी शामिल

सेक्टर-19 सदर बाजार मार्केट कमेटी एवं श्री शिव कावड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी, पंजाब स्टेट ब्रांच, ब्लड बैंक, पीजीआइ एवं रोटो पीजीआइ के सहयोग से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ चंडीगढ़ की एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले द्वारा किया गया। उन्होंने रक्तदान करने वाले लोगों से बातचीत की और उन्हें इस भलाई के कार्य के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही ब्लड डोनर्स को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा, राकेश कुमार संगर, और अन्य लोगों ने रक्तदान करने वालों को कहा कि हम सबको ऐसे कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए तथा युवाओं से यह आह्वान किया कि वे नशीले पदार्थो व अन्य बुराइयों की तरफ ध्यान देने की बजाए रक्तदान जैसे महान कार्यों की ओर ध्यान दें। समाज में फैल रही नशे की लत पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को रक्तदानी बनकर अपनी शक्ति का उपयोग जन-कल्याण के कार्यो हेतु करना चाहिए।

चूड़धार गए पीजीआई के डॉ. सौगात भटनागर की सांस फूलने से मौत

चंडीगढ़/ हरिपुरधार: चूड़धार यात्रा पर गए पीजीआई चंडीगढ़ के 32 वर्षीय डॉ. सौगात भटनागर की सांस फूलने से मौत हो गई है। भटनागर ने शुक्रवार रात को तिसरी नाम की जगह पर दम तोड़ा। गुरुवार सुबह वह अपनी महिला साथी जसमीन के साथ नौहराधार से चूड़धार के लिए रवाना हुए थे। रास्ते में चढ़ाई चढ़ते समय भटनागर की सांसें फूल रही थी। तिसरी नाम की जगह पर पहुंचते ही डॉ. भटनागर बेहोश हो गए। भटनागर की तबीयत बिगड़ने की वजह से दोनों तिसरी में एक ढाबे में ही रुक गए। शुक्रवार सुबह जसमीन चूड़धार के लिए आगे निकल चली गई। उसी दिन देर शाम जब जसमीन तिसरी पहुंची तो डॉक्टर की तबीयत ज्यादा बिगड़ी हुई देखकर उसने हेल्पलाइन नंबर 100 पर कॉल करके मदद मांगी। इस कॉल के बाद तहसीलदार नौहराधार को शुक्रवार देर रात डॉक्टर के बीमार होने की जानकारी मिली। शनिवार सुबह उन्होंने डॉक्टरों की टीम और पुलिस की टीम को नौहराधार से चूड़धार के लिए रवाना किया। राजस्व विभाग की एक टीम के अलावा नौहराधार के स्थानीय लोग भी सुबह ही चूड़धार के लिए रवाना हुए। शाम करीब जब 5 बजे डॉ. भटनागर को सीएचसी नौहराधार पहुंचाया गया तो वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उसके बाद देर शाम को भटनागर के शव को पोस्टमार्टम के लिए राजगढ़ को भेज दिया है। पुलिस ने मृतक के परिजनों को भी सूचित कर दिया है। रविवार को शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। डॉ. भटनागर कोलकाता के रहने वाले थे। उनकी महिला साथी जसलीन भी कोलकाता की रहने वाली है। चूड़धार में इन दिनों हो जाती है आॅक्सीजन की कमी: समुद्र तल से 11885 फीट की ऊंचाई पर स्थित धार्मिक स्थल चूड़धार में इन दिनों आॅक्सीजन की भारी कमी हो जाती है। यहां आने वाले ज्यादातर श्रद्धालुओं को चूड़धार पहुंचने से पहले ही चक्कर आने लगते है। 2 महीने पहले ही चूड़धार में एक महिला की हार्ट अटैक से मौत हुई थी। चूड़ेश्वर सेवा समिति की और से पहले ही एक एडवाइजरी जारी की जा चुकी है कि दिल व दमे के मरीज बिना डाक्टरी जांच के चूड़धार न आए। मगर फिर भी अपनी जान की परवाह किए बिना लोग चूड़धार पहुंच रहे है। 21 नवंबर को ही दी थी चूड़धार न जाने की एडवाइजरी: प्रदेश के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी शुरू होने के बाद तीन जगहों पर ट्रेकिंग के लिए न जाने की एडवाइजरी दी थी। चूड़धार, शिकारीदेवी और कमरूनाम न जाने की ये एडवाइजरी 21 नवंबर को ही दी गई थी। डीसी शिमला अमित कश्यप ने गुरुवार को ही लोगों को चूड़धार न जाने की एडवाइजरी दी थी।

पीजीआई के डॉक्टरों की एंजियोप्लास्टी में खोज,100% हार्ट ब्लॉकेज के दो मरीजों का आधे घंटे में सफल आॅपरेशन

चंडीगढ़: चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर के एचओडी डॉ. यशपाल शर्मा और उनके सहयोगी डॉ. प्रशांत पांडा ने एंजियोप्लास्टी के 100 फीसदी ब्लॉकेज के दो मरीजों का सीसीटी तकनीक से सफल आॅपरेशन कर नई टेक्नीक इजाद की है। डॉ. इस नई तकनीक को ‘यश-प्रशांत पीजीआई चंडीगढ़ तकनीक’ नाम दिया गया है । इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट(आईपीआर) के अंतर्गत कॉपी राइट करवाया जा रहा है । इसी सिलसिले में जापान मेडिकल एसोसिएशन ने डॉक्टर शर्मा को पत्र भेज कर सीसीटी तकनीक 2019 कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित किया था। पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर के प्रमुख डॉक्टर यशपाल शर्मा ओर डॉक्टर प्रशांत की टीम ने नई तकनीक पर काम करते हुए सफलता हासिल की। प्रो. शर्मा ने बताया कि पहले 100 फीसदी आर्टरी ब्लॉकेज होने पर सर्जरी करने में 4 से 6 घंटे का वक्त लगता था, लेकिन अब इस तकनीक से दो मरीजों की सर्जरी की गई। इसमें एक मरीज पर 30 से 45 मिनट का वक्त लगा। प्रो. शर्मा ने यह भी दावा किया कि इस तकनीक से इलाज काफी सस्ता होगा।

अब कम रिस्क में इलाज करना संभव: प्रो. शर्मा

प्रो. शर्मा ने बताया कि काम्पलेक्स कार्डियोवस्कुलर थैरापैटिक (सीसीटी) तकनीक से आसान, सस्ती एवम कम समय में मरीज का इलाज हो सकेगा। पहले यह इलाज बहुत जटिल एवं रिस्क में रहकर करना पड़ता था। उन्होंने बताया यह तकनीक बहुत कम रिस्क में रह कर किए जाने वाला इलाज है । डॉक्टर शर्मा ने बताया हाल ही में उनके जापान दौरे के दौरान सीसीटी फैकल्टी कांफ्रेंस में उन्होंने इस तकनीक पर मुख्य लेक्चर में बताते हुए इसकी इसे नई इन्वेंशन बताया है। जापान की मेडिकल टीम ने इसमें गहरी रुचि दिखाई।

पी.जी.आई. के पैडियाट्रिक हीमॉटोपैथॉल्जी विभाग में पढ़ रहे पी.एच.डी. स्कॉलर डा. अदित्य सिंह को प्रतिष्ठित जे सी पटेल सम्मान से नवाजा गया

पी.जी.आई. के पैडियाट्रिक हीमॉटोपैथॉल्जी विभाग में पढ़ रहे पी.एच.डी. स्कॉलर डा. अदित्य सिंह को नई दिल्ली में इंडियन सोसायटी आॅफ हीमोटोलोजी एंड ब्लड ट्रांस्फयूजन की 60वीं वार्षिक बैठक में बेस्ट रिसर्च पेपर के चलते प्रतिष्ठित जे सी पटेल सम्मान से नवाजा गया है। याद रहे डा. आदित्य सिंह पैडियाट्रिक हीमॉटोपैथॉल्जी विभाग के एसोसिएट प्रो. डा. प्रतीक भाटिया के निर्देशन में काम कर रहे हैं और वही उनके चीफ गाइड भी हैं। डा. अदित्य ने जीन एडिटिंग एंड साइलेंसिंग आॅफ बी सी आर-ए बी एल फ्यूजन ट्रांस्क्रिप्ट यूजिंग नोवल आर.एन.ए.-सी.आर.आई. एस.पी.आर. कास 13 ए पर खास काम किया है।

विश्व मधुमेह दिवस के मौके पर पी.जी.आई. के अडवांस्ड पैडियाट्रिक सेंटर ने टाइप1 डायबटीज़ बच्चों तथा उनके परिजनों के लिए एजुकेशन डे का आयोजन किया

विश्व मधुमेह दिवस के मौके पर पी.जी.आई. के अडवांस्ड पैडियाट्रिक सेंटर की एंडोक्राइनोल्जी एंड डायबटीज़ युनिट ने टाइप1 डायबटीज़ बच्चों तथा उनके परिजनों के लिए एजुकेशन डे का आयोजन किया। इस में 50 से ज्यादा डायबटिक बच्चों तथा उनके परिजनों ने भाग लिया। इस मौके पर प्रो. देवी दयाल ने डायबटिक बच्चों को रोजमर्रा के प्रबंधन के बारे में बताया। इस मौके पर प्रो. अनिल भंसाली ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की। उन्होंने मधुमेह के क्षेत्र में अपने 40 सालों का तजुर्बा शेयर किया। डा. नैंसी साहनी ने डायबटिक बच्चों की खुराक के प्रबंधन में विस्तृत जानकारी दी।




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Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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