PGI Report (November Month) द वीक हंसा रिसर्च सर्वे में पीजीआई चंडीगढ़ देशभर में दूसरे नंबर पर

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द वीक हंसा रिसर्च सर्वे में पीजीआई चंडीगढ़ देशभर में दूसरे नंबर पर

वीक-हंसा रिसर्च सर्वे 2019 में देश के टॉप गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स की रैकिंग में पीजीआई को दूसरा स्थान मिला है। पहले नंबर पन नई दिल्ली का एम्स है। सर्वे में पाया गया है कि मेडिकल एजुकेशन, रिसर्च और पेशेंट केयर में पीजीआई पूरे देश में दूसरे नंबर का हॉस्पिटल है। सर्वे में यह भी बताया गया है कि पीजीआई का कौन सा डिपार्टमेंट किस नंबर पर रहा है। सर्वे के मुताबिक पीजीआई का पल्मोनोलॉजी पूरे देश में टॉप रहा है। दूसरे नंबर पर पीडियाट्रिक, चौथे नंबर पर आथोर्पीडिक्स व डायबिटिक केयर, पांचवें नंबर पर न्यूरोलाजी व छठे नंबर पर गेस्ट्रोएंट्रोलाजी, आठवें पर कार्डियोलाजी, नौवें नंबर पर आॅप्थमोलाजी व 12वें नंबर पर आंकोलाजी। सिटी के बेस्ट हास्पिटल की भी रैंकिंग जारी की गई। इसमें पीजीआई पहले, मेडिकल कालेज दूसरे नंबर व मैक्स सुपर हॉस्पिटल तीसरे नंबर पर आया है। हालांकि इससे पहले भी जो सर्वे होते रहे हैं, उनमें पीजीआई देश का दूसरे नंबर संस्थान रहा है।
ऐसे किया गया सर्वे
द वीक हंसा सर्वे देश के 17 शहरों में किया गया है। इसमें दिल्ली, एनसीआर, चंडीगढ़, लखनऊ, जयपुर, इंदौर, हैदराबाद, बंगलूरू, चेन्नई, कोच्चि, कोलकाता, पुणे, मुंबई व अन्य शहर शामिल हैं। सर्वे में 726 फिजीशियन व 1307 स्पेश्लिस्ट को शामिल किया गया। सर्वे इन मापदंडों पर परखा गया है। इनमें ओवरआॅल ख्याति, डाक्टरों की क्षमता, इन्फ्रास्ट्रक्चर व सुविधाएं, पेशेंट केयर, हास्पिटल इन्वायरमेंट व रिसर्च और इनोवेशन।

नर्सिंग कोर्स कर चुकी युवतियों के लिए पीजीआई में नौकरी पाने का सुनहरा मौका, तैयारी में जुट जाएं
नर्सों की कमी से जूझ रहे पीजीआई चंडीगढ़ में जल्द ही नए स्टाफ की भरती होगी। पीजीआई ने 78 नए नर्सिंग आफिसर की भरती की स्वीकृत दे दी है। इन पदों के भरती के लिए विज्ञापन भी प्रकाशित कर दिया गया है। इच्छुक उम्मीदवार 22 नवंबर तक इसके लिए अपने आवेदन कर सकते हैं। पीजीआई में नर्सों की भारी कमी है। पीजीआई में जिस तरह से बिल्डिंगों का विस्तार हो रहा है, उसके अनुपात के मुताबिक नर्सों की संख्या में भारी कमी है। मौजूदा समय में पीजीआई के पास करीब 2572 नर्सों की पोस्ट हैं। इनमें से करीब 2300 नर्सें काम कर रही हैं, जबकि 1500 नई नर्सों की जरूरत है। हालांकि इनका प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक मिनिस्ट्री ने इसे पास नहीं किया गया है। पीजीआई नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सतवीर सिंह डागर का कहना है कि पीजीआई विस्तार तो करता जा रहा है, मगर नर्सिंग स्टाफ की संख्या पर ध्यान नहीं दे रहा। पहले स्टाफ पूरा करना होगा, तभी विस्तार सक्सेसफुल हो पाएंगे। उनका कहना है कि नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति का फैसला अच्छा है, लेकिन जब तक डिपार्टमेंटल प्रमोशन नहीं होंगे, तब तक नर्सों की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक पीजीआई में सीनियर नर्सिंग आफिसर की 120 पोस्ट, असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट की 25 और डिप्टी नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट की 15 पोस्टें खाली हैं। यह सब पोस्टें प्रमोशन के आधार पर भी भरी जा सकती हैं। इस बारे में कई बार डायरेक्टर को अवगत कराया जा चुका है।

चंडीगढ़: आयुष्मान और राष्ट्रीय आरोग्य निधि के बीच फंसे मरीज, एक के साथ दूसरे का नहीं मिलता लाभ
चंडीगढ़ पीजीआई में आने वाले मरीज आयुष्मान और राष्ट्रीय आरोग्य निधि के बीच फंस गए हैं, क्योंकि एक के साथ दूसरे का लाभ नहीं मिलता। जयदीप ब्लड कैंसर मल्टीप्ल मायोलामा से पीड़ित हैं। उनका इलाज पीजीआई में चल रहा है। कीमोथैरेपी से उनका कैंसर कंट्रोल में आ चुका है। अब डाक्टरों ने एहतियात के तौर पर उन्हें बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। इसमें करीब पांच लाख रुपये का खर्च आएगा। जयदीप के लिए इतना खर्च उठा पाना नामुमकिन है। मगर उन्हें इस बात का सुकून है कि वह आयुष्मान के लाभार्थी हैं।
इस योजना में कार्डधारक को पांच लाख रुपये तक के इलाज का प्रावधान है। लेकिन जब वह आयुष्मान की खिड़की पर गए तो उसकी यह उम्मीद भी पल भर में धूमिल हो गई। आयुष्मान में बोनमैरो ट्रांसप्लांट का प्रावधान ही नहीं है। इस बीच जयदीप को किसी ने राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) योजना के बारे में बताया। इस योजना में भी गरीब व्यक्तियों के इलाज की सुविधा है। इसमें मरीज की 15 लाख रुपये तक की मदद की जा सकती है। जयदीप व उनके परिजनों जब पीजीआई में पता किया तो पता चला कि वे वे इसका फायदा नहीं उठा सकते क्योंकि इस योजना में एक शर्त यह भी है कि आयुष्मान भारत के दायरे में आने वाली फैमिली को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता। अब जयदीप काफी परेशान हैं। वह दोनों में से किसी भी योजना का फायदा नहीं उठा सकते। यह स्थिति सिर्फ जयदीप ही नहीं बल्कि ऐसे कई मरीज हैं, जो दोनों योजनाओं के बीच फंस कर रह गए हैं। दरअसल, कुछ बीमारियों का इलाज आयुष्मान भारत में शामिल नहीं किया गया है जबकि उन बीमारियों के इलाज का प्रावधान आरएएन में रखा गया है। दिक्कत यह है कि आयुष्मान के लाभार्थी इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। बताया जा रहा है कि इस संबंध में कई सारे सेंटरों को दिक्कतें आ रहीं हैं। इसमें नई दिल्ली का एम्स भी शामिल है। एम्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया। हालांकि अभी पीजीआई की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
देखिए, कौन सी बीमारी किस योजना में कवर होती है
बीमारी आयुष्मान आरएएन
हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हां
इंट्रा ओरेटिक बैलून पंप नहीं हां
बोन मैरो ट्रांसप्लांट नहीं हां
गुलियन-बारे सिंड्रोम नहीं हां
एक्यूट व क्रोनिक आटोइम्यून नहीं हां
मेटाबोलिक बोन डीसीज नहीं हां
किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हां
लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हां
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट नहीं हां
आस्टियोपोरोसिस नहीं हां
ग्लाइकोजेन स्टोरेज डिसआर्डर नहीं हां
आरएएन का कौन है लाभार्थी
– व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित और गरीबी रेखा से नीचे हो
– सहायता सिर्फ सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए लागू है
– केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारी पात्र नहीं हैं
नियमों के मुताबिक जो व्यक्ति आयुष्मान का लाभार्थी है, उसे आरएएन योजना का लाभ नहीं मिल सकता। आरएएन के लाभार्थी को पात्रता के हिसाब से लाभ दिया जाता है।
– मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई

जो काम न करें, उसे आउट करें और मेहनतकश को प्रमोट करने में कोई कसर न छोड़ें- डॉ. सरित दास
चंडीगढ़ पीजीआई के सातवें वार्षिक रिसर्च डे के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में रोपड़ आईआईटी के डायरेक्टर डा. सरित दास ने दो टूक कहा कि रिजल्ट चाहिए तो कड़े फैसले लेने होंगे। जो काम न करें, उसे आउट करने में बिल्कुल भी हिचकिचाना नहीं चाहिए। जो टैलेंटेड हो, उसे प्रमोट करने में कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। उसके लिए भले ही आपको आउट आॅफ द बाक्स जाकर फैसला लेना पड़े। क्वालिटी रिसर्च पर जोर देना होगा। बहानेबाजी और डिपार्टमेंटल पॉलिटिक्स करने के बजाए क्वालिटी रिसर्च पर बात करनी होगी। उन्होंने बताया कि रोपड़ आईआईटी में टैलेंटेड फैकल्टी लाने के लिए कम से कम दस देशों का दौरा किया। वहां जाकर खुद इंटरव्यू किया। अच्छी फैकल्टी लेकर आए। क्वालिटी रिसर्च के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और माहौल बनाया। यही दोनों रिसर्च को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पीजीआई और रोपड़ आईआईटी को सस्ती स्वास्थ्य सेवा की सामाजिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए अनुसंधान में हाथ मिलाने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि अनुसंधान पर खर्च बढ़ाने की बात पर भी जोर दिया। वर्तमान में जीडीपी का मात्र 0.6 प्रतिशत है। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर डा. अरुण ग्रोवर ने कहा कि क्षेत्रीय अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र के विभिन्न संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। पीजीआई के पूर्व डीन व नेत्र विशेषज्ञ डा. आमोद गुप्ता ने इस दौरान विवादास्पद रिसर्च की कहानियों को साझा किया। उन्होंने नैतिक मानकों का पालन करने के साथ नैतिक नुकसान से बचने के लिए अतीत से सीखने पर जोर दिया। प्रोफेसर जगतराम ने कहा कि पिछले साल पीजीआई ने सभी मानकों को पालन करते हुए 1850 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए। रिसर्च डे के मौके पर 400 से ज्यादा पेपर डिस्पले किए गए। इस मौके पर 31 से ज्यादा रिसर्चरों को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर डा. राजेश कुमार डीन एकेडमिक्स, डा. अरविंद राजवंशी डीन रिसर्च मौजूद रहे।

रिसर्च डे पर इन प्रोफेसरों को मिला सम्मान
पल्मोनरी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. इंदरपाल एस सहगल, पल्मोनरी मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. वालियापन मुट्टू, हीप्टोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. निपुन वर्मा, स्कूल आफ पब्ल्कि हेल्थ के एडिश्नल प्रोफेसर डा. रविंद्रा खैवाल, स्किन डिपार्टमेंट के डा. एमएस कुमारन, पल्मोनरी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डा. नवनीत सिंह, पीडियाट्रिक के प्रोफेसर डा. एम जयश्री, पल्मोनरी मेडिसिन के प्रोफेसर डा. रितेश अग्रवाल, हीप्टोलाजी के प्रोफेसर डा. अजय डुसेजा, आई डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मोहित डोगरा, न्यूरोसर्जरी के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मंजुल त्रिपाठी, आथोर्पीडिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सिद्धार्थ शर्मा, न्यूरोसर्जरी के एडिशनल प्रोफेसर डा. डांढापानी, न्यूरोसर्जरी के एडिशनल प्रोफेसर डा. प्रवीण सालुके, आई डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डा. रीमा बंसल, आथोर्पीडिक्स के प्रोफेसर डा. आदित्य के अग्रवाल, आई डिपार्टमेंट की डा. वैशाली गुप्ता, एनेस्थीसिया की प्रोफेसर डा. काजल जैन, हीप्टोलाजी के डा. श्रीजेश एस, साइटोलाजी के डा. परीक्षा गुप्ता, इम्यूनोपैथोलाजी की डा. सीमा छाबड़ा, फामार्कोलाजी की डा. स्मिता, मेडिकल माइक्रोबायोलाजी की डा. अनूप के घोस, डा. बलविंदर मोहन, डा. शिवाप्रकाश, डा. रूद्धमुर्थि व डा. कुसुम शर्मा, बायोफिजिक्स की डा. शालमोली भट्टाचार्य, मेडिकल माइक्रोबायोलाजी की पीएचडी स्कालर डा. गुंजीत कौर, डा. सैकत पॉल, पैथोलाजी की सीनियर रेजिडेंट डा. सानिया शर्मा व पीडियाट्रिक की डा. मोनिसा को सम्मानित किया गया।

पटाखों की चिंगारी ने छीन ली चार लोगों की आंखों की रोशनी, इलाज को पी.जी.आई. पहुंचे 11 मरीज
पीजीआई एडवांस आई सेंटर दिवाली की देर रात 11 मरीजों को सेंटर में लाया गया। जिनकी आंखें पटाखों की चिंगारी के चलते गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
चंडीगढ़: दिवाली पर इस बार पटाखों की चिंगारी ने चार लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन ली। पीजीआइ एडवांस आई सेंटर दिवाली की देर रात 11 मरीजों को सेंटर में लाया गया। जिनकी आंखें पटाखों की चिंगारी के चलते गंभीर रूप से घायल हो गई थी। पटाखे जलाने से 11 को आंखें गंभीर रूप से झुलस गई है । इनमें से चार घायलों की आंखों की रोशनी लौटने की संभावना नहीं है। जो चार गंभीर रूप से घायल हैं । उनमें पंजाब से एक हरियाणा से दो और हिमाचल के सोलन से एक है। पीजीआइ के एडवांस आई सेंटर में इनकी रात को सर्जरी की गई है । डॉक्टरों का कहना है कि दोपहर बाद इनकी पट्टी खोलने की बाद ही बताया जा सकेगा कि इनका विजन कितना परसेंट वापस आएगा। इसके अलावा आठ अन्य की भी आंखें झुलस गई है। हालांकि फिलहाल यह लोग खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अभी मरीजों के आने का सिलसिला जारी है। यह आंकड़ा रात 8:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक का है।
डॉक्टरों का कहना है कि दूरदराज के इलाकों से मरीजों के आने का सिलसिला जारी है। गौरतलब है कि पीजीआई मैनेजमेंट की ओर से पीजीआई के एडवांस आई केयर सेंटर में शनिवार से मंगलवार तक के लिए 24 घंटे इमरजेंसी में डॉक्टर विशेष टीम तैनात की गई है। इसके अलावा 20 बेड इसके लिए खाली रखे गए हैं। पीजीआई के डायरेक्टर प्रोफेसर जगत राम ने बताया कि घायलों का इलाज चल रहा है कोशिश है कि किसी की आंखों की रोशनी न जाए।
जीएमसीएच 32 में 8 मरीज आए
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सेक्टर 32 में दीवाली की रात 8 मरीजों को आई केयर सेंटर में भर्ती कराया। इनमें से छह मरीजों की आंखों में पटाखों की वजह से कोई मामूली क्षति को डॉक्टर ने फौरन इलाज कर दूर कर घर के लिए भेज दिया। इनमें से दो मरीज ऐसे थे, जिनकी आंखें गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उनका इलाज जारी है। घायलों का इलाज किया जा रहा है।
मोहाली सिविल अस्पताल में पहुंचे 15 लोग
वहीं मोहाली में दीवाली पर पटाखों की चपेट में आए लगभग 15 लोग सिविल अस्पताल में भर्ती हुए हैं। घायलों में ज्यादातर युवा व बच्चे शामिल हैं। पटाखों की वजह से शहर में दो-तीन जगह पर आग भी लगी है। कई जगह पर आग से नुकसान भी बताया जा रहा है।

पी.जी.आई. में सभी खाली पद छह महीने के अंदर भरे जाएं, हाई कोर्ट ने दिया आदेश
चंडीगढ़: पीजीआइ चंडीगढ़ में स्टाफ की कमी व उससे होने वाले मरीजों को परेशानी पर हाई कोर्ट द्वारा दिए गए संज्ञान पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच के सामने सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पीजीआइ प्रशासन ने रिक्त पड़े पदों की भर्ती बारे अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी। पीजीआइ द्वारा हाई कोर्ट में सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार पीजीआइ टीचिंग स्टाफ के 76 खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां कर दी गई। जबकि अन्य 10 व्यक्तियों ने ज्वाइनिंग के लिए भी समय की मांग की है और जल्द ही ज्वाइन कर लेंगे। पीजीआइ ने हाईकोर्ट को बताया कि अभी पीजीआइ में 117 पद खाली पड़े हैं, जिनको समय रहते अनुसार भर दिया जाएगा। पीजीआइ का पक्ष सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने पीजीआइ को आदेश दिया कि इन रिक्त पड़े पदों पर 6 महीने के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए वह हाईकोर्ट में रिपोर्ट दी जाए। कोर्ट को यह भी बताया गया कि पीजीआइ में बढ़ते मरीजों के कारण यहां पार्किंग एक बड़ी समस्या है। पीजीआइ में बढ़ते वाहनों की पार्किंग के लिए नई ओपीडी के सामने पांच मंजिला पार्किंग बनाई जानी है, जिससे यहां पार्किंग की समस्या काफी हद तक सुलझ जाएगी। ज्ञात रहे कि हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमे सुनवाई के दौरान यह सामने आया था की पीजीआइ में टीचिंग स्टाफ के कई पद खाली पड़े हैं । इस पर हाई कोर्ट ने कहा था कि यह बड़ा गंभीर मामला है, क्योंकि पीजीआइ जहां न सिर्फ चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से लोग अपना इलाज करवाने आते हैं। बल्कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश तक से मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और पीजीआइ को इन खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां किए जाने के निर्देश देते हुए जवाब तलब किया था।

ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग के लिए पी.जी.आई. में महिलाओं की लगी लंबी कतार, मिल रही 30 से 40 दिन की डेट
पीजीआइ प्रशासन भी मरीजों को दी जा रही लंबी डेट को कम करने का प्रयास कर रहा है लेकिन हजारों मरीजों को महज एक मशीन से तत्काल जांच की सुविधा मुहैया कराना संभव नहीं हो पा रहा है। पीजीआइ में ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग के लिए आने वाली महिलाओं को मेमोग्राफी टेस्ट के लिए 30 से 40 दिन की डेट दी जा रही है। स्थिति यह है कि हर दिन रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट की ओपीडी में 60 से 70 महिलाएं जांच कराने पहुंच रही हैं। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक 30 से 40 महिलाओं की ही जांच हो पा रही है। उसके बाद बाकी महिलाओं को अगली डेट देकर वापस कर दिया जा रहा है। महीनेभर की ओपीडी में यह संख्या हजार के पार जा चुकी है। पीजीआइ प्रशासन भी मरीजों को दी जा रही लंबी डेट को कम करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन हजारों मरीजों को महज एक मशीन से तत्काल जांच की सुविधा मुहैया कराना संभव नहीं हो पा रहा है।
महीनों से बंद पड़ी जांच डेढ़ महीने पहले हुई शुरू
पीजीआइ रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट की ओपीडी में 31 अगस्त को एक डिजिटल ब्रेस्ट टोमोसिनथिसिस (डीबीटी) मेमोग्राफी मशीन इंस्टॉल की गई। इस मशीन के लग जाने से अब ब्रेस्ट कैंसर के संभावित मरीजों की जांच सरकारी दर पर संभव तो हो गई, लेकिन मरीजों की लंबी कतार कम करने में इससे ज्यादा मदद नहीं मिल पा रही है। इंस्टॉल की गई मशीन 3डी मेमोग्राफी वाली है। देश के चंद गिने-चुने संस्थानों में इस मशीन से जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसके टोमोसिनथेसिस से ब्रेस्ट संबंधी लक्षणों के साथ-साथ स्क्रीनिंग मेमोग्राफी में कैंसर का पता लगाने और उनका बेहतर इलाज में मदद मिलेगी। इस मशीन में एक कंप्यूटर एडेड घाव का पता लगाने का सिस्टम भी है जो फॉलोअप के केस में मददगार साबित होगा।
रेडियोलॉजी की पुरानी मशीन कंडम
पीजीआइ रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट की पुरानी मेमोग्राफी मशीन लगभग 9 माह से बंद पड़ी है। कर्मचारियों ने बताया कि मशीन 10 साल पुरानी है। कंडम हो जाने के कारण बार-बार खराब हो जाती थी, इसलिए उसे बंद कर दिया गया। आशा ज्योति वैन के माध्यम से पीजीआइ के साथ ही आस-पास के क्षेत्रों में कैंप लगाकर जांच की जाती थी, लेकिन दो महीने से उस वैन की मशीन भी खराब हो गई है। वैन से एक दिन में 20 से 30 मरीजों की जांच होती थी।
जीएमएसएच में ट्रायल बेस पर शुरू हुई जांच
ब्रेस्ट कैंसर के मामलों की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए चंद दिनों पहले ही सेक्टर-16 हॉस्पिटल में मेमोग्राफी टेस्ट शुरू किया गया है। हॉस्पिटल के एमएस डॉ. बीके नागपाल ने बताया कि मशीन इंस्टॉल करके ट्रायल पर हर दिन कुछ केस किए जा रहे हैं। जल्द ही इसकी सुविधा सामान्य तौर पर शुरू कर दी जाएगी।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिखते ही तत्काल उसकी जांच कराकर रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर इलाज शुरू कर देना चाहिए। इस मामले में की गई एक दिन की भी देरी बीमारी को और गंभीर रूप दे सकती है। डॉ. राकेश कपूर, एचओडी रेडियोथिेरेपी डिपार्टमेंट पीजीआइ

देशभर में पी.जी.आई.का डंका : एन एम सी सदस्यों में प्रो. जगतराम का नाम शामिल, डॉ. संदीप को एफ एन ए एम एस अवार्ड
चंडीगढ़: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के 25 सदस्यों के नाम की घोषणा कर दी गई है। इसमें पीजीआइ चंडीगढ़ के डायरेक्टर प्रोफेसर जगतराम भी शामिल हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को इसके सदस्यों के चयन की प्रक्रिया लाटरी द्वारा पूरी की। लाटरी के माध्यम से इनके चुनाव करने का मुख्य कारण इसके लिए राज्य और केन्द्रीय शासित प्रदेशों के साथ ही राज्य चिकित्सा परिषदों से काफी संख्या में नाम भेजा जाना था। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसके नामों की घोषणा करते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों के 10 वाइस चांसलरों, राज्यचिकित्सा परिषदों के नौ प्रतिनिधियों और चार स्वायत्त बोर्डों के चार सदस्यों समेत 25 अंशकालिक सदस्यों को चुना गया है। एनएमसी भारतीय चिकित्सा परिषद के स्थान पर लागू किया जायेगा। इसके लागू होने पर 63 साल पुरानी भारतीय चिकित्सा परिषद कानून समाप्त हो जायेगा।
चार बोर्ड का होगा गठन
एनएमसी एक्ट के तहत चार बोर्डों का भी गठन किया जायेगा। ये बोर्ड अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन, पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन, मेडिकल एक्समेंट एंड रेटिंग और एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन हैं। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, आध्रं प्रदेश, राजस्थान, दादर एवं नगर हवेली, पंजाब और हरियाणा से वीसी को चुना गया है। दिल्ली केगुरु गोविंद सिंह इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के वीसी प्रोफेसर महेश वर्मा, पंजाब के फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी आॅफ हेल्थ साइंसेज के वीसी राज बहादुर को सदस्य चुना गया है। उत्तर प्रदेश, सिक्किम, केरल, कर्नाटक, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश,बिहार, महाराष्ट्र, और मणिपुर के राज्य चिकित्सा परिषद से प्रतिनिधियों को चुना गया है। इसकेअलावा त्रिपुरा, जम्मू और कश्मीर, नागालैंड व मध्य प्रदेश के सदस्य स्वायत्त बोर्ड के तहत चुने गए। उत्तराखंड चिकित्सा परिषद के अजय कुमार खन्ना को सर्च कमेटी के लिए चुना गया है। अन्य सदस्यों में एम्स दिल्ली के डायरेक्टर रनदीप गुलेरिया और पीजीआइ चंडीगढ़ व टाटा मेमोरियल अस्पताल के डायरेक्टर शामिल हैं।

पीजीआइ के डॉ. संदीप को चुना गया फैलो
पीजीआइ के ईएनटी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डा. संदीप बंसल को नेशनल एकेडमी आफ मेडिकल साइंस का फैलो चुना गया है। डॉ. बंसल को आल इंडिया मेडिकल साइंस संस्थान, भोपाल में एक कार्यक्रम में एफएनएएमएस अवार्ड से सममानित किया गया। डा. बंसल का राइनोलॉजी और आॅब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के क्षेत्र में सक्रिय योगदान रहा है। वह आॅल इंडिया राइनोलॉजी सोसाइटी आॅफइंडिया के गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं। वह इंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी के लिए कई कैडेवरिक विच्छेदन पाठ्यक्रम और कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर एक आॅपरेटिंग संकाय का आयोजन करते रहे हैं। उनका प्रयास था कि पीजीआइ में स्लीप प्रयोगशाला शुरू कर सके। यह स्लीप लेबोरेटरी उत्तर भारत में ओटोलर्यनोलोजी विभाग और हेड नेक सर्जरी विभाग में शुरू होने वाली अपनी तरह की पहली में से एक है।
डॉ बंसल ने 60 से अधिक पत्र पत्रिकाओं में समीक्षात्मक पत्रिकाओं में प्रकाशन किए हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अतिथि व्याखयान दिए हैं। रक्तदान शिविरों के आयोजन के रूप में सामुदायिक सेवाओं में उनका महत्वपूर्ण योगदान है और उन्होंने समाज के गरीबों और दलित वर्गों के लिए कई स्वास्थ्य सहायता शिविरों में भाग लिया है। वही पीजीआइ के एनाथिसिया एवं इंटेसिव केयर विभाग की एडिशनल प्रोफेसर. निधि भाटिया, सहायक प्रोफैसर डा. अंकुर गुप्ता, डा. पारुल चावला को नेशनल एकेडमिक आफ मेडिकल साइंस का सदस्य चुना गया है।

कॅरियर और फिगर के चक्कर में देरी से मां बनना पड़ रहा भारी, 70% बढ़ जाता है इस जानलेवा बीमारी का खतरा
चंडीगढ़: अगर अपको ब्रेस्ट कैंसर से बचना है तो कॅरियर और फिगर के चक्कर में मां बनने में देरी करने की गलती मत कीजिए। पीजीआइ रेडियोथिेरेपी डिपार्टमेंट में आने वाले ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 70 प्रतिशत मामलों में बीमारी का कारण मां बनने में देरी के रूप में सामने आ रही है। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से आने वाले ब्रेस्ट कैंसर के मामलों 35 साल के बाद मां बनने वाली महिलाएं सबसे ज्यादा हैं। जागरूकता के अभाव में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। महज 10 साल में ब्रेस्ट कैंसर के मरीज दोगुने से भी ज्यादा हो गए हैं। ओपीडी में इसके एक महीने में 150 से 200 मरीज पहुंच रहे हैं।
ओपीडी में चला जागरूकता अभियान
अक्टूबर में मनाए जा रहे ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के अवसर पर पीजीआइ रेडियोथिेरेपी डिपार्टमेंट की ओर से सोमवार को न्यू ओपीडी बिल्डिंग में कार्यक्रम हुआ। इस दौरान डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. राकेश कपूर ने मरीजों को बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव संबंधी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लड़कियों में शादी करने के उम्र के बढ़ने के साथ ही मां बनने में देरी, खान-पान और रहन-सहन में की जा रही लापरवाही बीमारी को तेजी से बढ़ा रही है। इसलिए करियर बनाने के साथ ही सही उम्र में शादी करना भी बेहद जरूरी है। शादी में देरी के कारण कैंसर जैसी बीमारी होने के साथ ही मां बनने में कई तरह के कॉमप्लीकेशंस के चांस भी बढ़ने लगते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के मामले गांव की तुलना में शहर में ज्यादा हैं।
मेमोग्राफी टेस्ट से डाइग्नोसिस हुई आसान
ब्रेस्ट कैंसर की जांच की यह सबसे आसान और सटीक तकनीक है। इसमें डाइग्नोस के लिए कम रेंज वाली एक्स-रे का उपयोग किया जाता है। इसमें डाइग्नोस को डिजिटल रूप में भी देखा जा सकता है। इसमें गांठ का बहुत जल्द पता चल जाता है।
ये लक्षण दिखे तो हो जाए सचेत
45 साल की उम्र के बाद मेमोग्राफी जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। वहीं कुछ लक्षणों का भी ध्यान रखना चाहिए, जिसके दिखाई देते तत्काल जांच कराना जरूरी है। इसमें ब्रेस्ट में गांठ या स्किन मोटी होना, ब्रेस्ट और कंधे के नीचे की ओर दर्द या सूजन हो, ब्रेस्ट का आकार, रंग में चेंज आए, ब्रेस्ट पर रेशेज आना, बगल में गांठ महसूस होना शामिल है।

पी.जी.आई. में मरीजों की जान से खिलवाड़, फंगल वाले आरएल की हो रही सप्लाई
नेहरू अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीज को चढ़ाने के लिए फंगल वाली आरएल की बोतल की सप्लाई की जा रही है। गनीमत है कि नर्सिंग स्टाफ की नजर उस बोतल पर पड़ गई। देश के टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट में गिने जाने वाले पीजीआइ में मरीजों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थिति यह है कि नेहरू अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीज को चढ़ाने के लिए फंगल वाली आरएल (कंपाउंड सोडियम लेक्टेट इंजेक्शन) की बोतल की सप्लाई की जा रही है। गनीमत है कि मरीज को चढ़ाने से पहले नर्सिंग स्टाफ की नजर उस बोतल पर पड़ गई और उसकी जान बच गई। घटना दो दिन पहले की है। इसकी जानकारी मिलने पर पीजीआइ प्रशासन ने मामले को दबा दिया है, जबकि सूत्रों का कहना है कि आरएल की बोतल में फंगल इंफेक्शन मिलने के पीछे सप्लाई में बड़ी गड़बड़ी की बात सामने आ रही है।
पुराने स्लिप को हटाकर लगाया नया
स्लिप आरएल की बोतल की सप्लाई में कहीं न कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। क्योंकि फंगल वाले बोतल पर लगे स्पिल की जगह पुराने स्लिप का भी कुछ भाग चस्पा हुआ था। जिसे देखकर ऐसा लग रहा था कि पुराने बोतल पर नया स्लिप लगाकर उसकी आपूर्ति की जा रही है। सप्लाई की गई बोतल का बैच नंबर 1902017029 है। इसकी निर्माण तिथि जून 2019 और समाप्ति तिथि मई 2021 है।
जा सकती थी मरीज की जान
विशेषज्ञों का कहना है कि फंगल वाले आरएल की बोतल अगर मरीज को चढ़ा दी जाती तो उसे सीवियर्र ंफेक्शन होने के साथ ही उसकी जान भी जा सकती थी। क्योंकि उसके माध्यम से इंजेक्शन के साथ संक्रमित ग्लूकोज मरीज के बॉडी में चला जाता और उसके लगभग सभी आॅर्गन को संक्रमित कर देता।




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Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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