केंद्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत के साथ फसलों के मूल्य निर्धारित करने के बाद हरियाणा के किसानों को लगभग 6 से 18 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का लाभ होगा: ओम प्रकाश धनखड़ 
चंडीगढ़, 16 जुलाई- हरियाणा के कृषि मंत्री श्री ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत के साथ फसलों के मूल्य निर्धारित करने के बाद हरियाणा के किसानों को लगभग 6 से 18 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का लाभ होगा। इसके अलावा हरियाणा के किसानों को जोखिम फ्री बनाने के लिए अब तक के कार्यकाल में कुल 3257 करोड़ रुपये किसानों के खातों में मुआवजे के तौर पर दिये जा चुके हैं।
यह जानकारी कृषि मंत्री ने आज यहां आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान दी।
उन्होंने कहा कि किसानों को फसलों के उचित दाम देने के दृष्टिगत केंद्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत के साथ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में जो बढ़ोतरी की गई है उससे हरियाणा में धान किसानों को 6 हजार रुपये प्रति एकड़, कपास किसानों को 18 हजार रुपये प्रति एकड़ और बाजरा किसान को लगभग 7800 रुपये प्रति एकड़ का लाभ होगा, इस तरह कुल मिलाकर किसानों को 6 से 18 हजार रुपये प्रति एकड़ तक फायदा होगा। उन्होंने कहा कि इस बढ़े हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य के अनुसार 1500 करोड़ रुपये अतिरिक्त लाभ के रूप में हरियाणा के किसानों को मिलेंगे, जिसमें केवल 1200 करोड़ रुपये धान के लिए और 300 करोड़ रुपये अन्य फसलों के लिए मिलेंगे। 
उन्होंने कहा कि हरियाणा का किसान आज देश में सर्वाधिक जोखिम फ्री किसान है। हरियाणा सरकार ने किसानों को जोखिम फ्री करने के लिए फसल बीमा योजना के अंतर्गत 491 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर वितरित किये हैं। आपदा प्रबंधन के माध्यम  से 6 से 12 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का मुआवजा किसानों को दिया गया है। वर्ष 2015 में गेहूं पर 1092 करोड़ रुपये और कपास पर 276 करोड़ रुपये वितरित किये गए। इसके अलावा पिछली सरकार का बचा हुआ मुआवजा 268 करोड़ रुपये भी किसानों को वर्तमान सरकार ने दिए। इस तरह अब तक के कार्यकाल में सरकार द्वारा 3257 करोड़ रुपये किसानों के खातों में मुआवजे के तौर पर दिये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढोतरी की जाती रही है, जिसके फलस्वरूप औसत आमदनी 11 हजार रुपये प्रति एकड़ बनती है। हरियाणा के किसानों को लगभग 7335 करोड़ रुपये की बढ़ी हुई आमदनी मिली। 
उन्होंने कहा कि हरियाणा में कुछ संकट हैं और इन्हीं संकटों को हमें अवसरों में बदलना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बड़ा संकट पानी का है। इसके लिए अटल भू-जल योजना के अंतर्गत हरियाणा को 712 करोड़ रुपये 5 वर्षों के लिए मिले हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 36 खंड अधिक शोषित हैं, उनमें सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा 85 प्रतिशत अनुदान राशि दी जा रही है। इसके अलावा भी सूक्ष्म सिंचाई के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में 1.30 लाख हेक्टेयर भूमि सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत आती है। इसके अलावा 1 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई के लिए पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, जिससे सिंचाई का क्षेत्र भी बढ़ा है। इन क्षेत्रों के लिए 75 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। 
उन्होंने कहा कि 54 मंडियों को ई-नैम से जोड़ा गया है। जिन फसलों की सरकारी खरीद नहीं होती, उन फसलों को ई-नैम के माध्यम से खरीदा जा रहा है। इसके अलावा नई मंडियों को भी विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी मंडी जो गन्नौर में 600 एकड़ में बनने वाली है, उसे स्पेशल पर्पस व्हीकल के माध्यम से बनाया जाएगा, जिसकी मंजूरी कैबिनेट द्वारा दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के सेक्टर-52 में 8.62 एकड़ में नीदरलैंड के सहयोग से हरियाणा की पहली फूल मंडी बनाई जा रही है। 
श्री धनखड़ ने बताया कि पंचकूला के सेक्टर- 20 में सेब मंडी बनाई है और इसका विस्तार करने के लिए एचएमटी की 75 एकड़ जमीन पर आधूनिक तथा नई सेब मंडी बनाने का प्रयोजन है। उन्होंने बताया कि डायरेक्ट मार्केटिंग पर जोर दिया गया, जिसके लिए 40 किसान बाजार को विकसित किया गया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में सर्वाधिक सब्सिडी बिजली पर लगभग 6600 करोड़ रुपये प्रति वर्ष दी जा रही है। खाद पर लगभग 3500 करोड़ रुपये और बीज व उपकरणों पर लगभग 800 करोड़ रुपये सब्सिडी दी जा रही है। 
उन्होंने बताया कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय भारत में नबर 2 पर है। इसके अलावा कृषि इंस्टीटयूट में हरियाणा चौथे नंबर पर है। उन्होंने कहा कि हमने एग्री लीडरशीप समिट का आयोजन किया। अब तक 3 एग्री लीडरशीप समिट हो चुके हैं, जिसमें 6 लाख किसान सम्मिलित हुए। 
उन्होंने कहा कि हर मंडी में मृदा लैब बना रहे हैं। इसके अलावा 4-5 गांव मिलाकर कलस्टर रूप में मृदा लैब भी खोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पराली को जलाने से रोकने के लिए पिछले वर्ष 65 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 6338 किसानों को पराली के निपटान के लिए उपकरण दिए गए। 420 समूहों को भी ऐसे उपकरण दिए गए। इस वर्ष 5563 किसानों और 900 समूहों को ऐसे उपकरण दिए जाएंगे, जिसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। 
उन्होंने बताया कि 21 करोड़ रुपये से 14282 किसानों की 2863 हेक्टेयर लवणीय और जलभराव वाली भूमि को सुधारा गया है। इस वर्ष 2100 से अधिक किसानों की 2186 हेक्टेयर भूमि को सुधारा जाएगा। 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री राजीव जैन, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव डॉ० अभिलक्ष लिखी, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक श्री मंदीप सिंह बराड़, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक श्री डी.के. बेहरा उपस्थित थे।
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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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