खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे.. और विधानसभा से गायब सुरजेवाला मीडिया में बड़ बड़ बोले : जवाहर यादव
चंडीगढ, 19 जुलाई- हरियाणा विधानसभा और कैथल के लाखों मतदाताओं का अपमान करने वाले रणदीप सुरजेवाला बस बातें करना जानते हैं। जिस विधानसभा का सदस्य बनाने की दुहाई देकर उन्होंने कैथल के लोगों से वोट मांगे थे, उस विधानसभा में आने में अब सुरजेवाला को शर्म आती है। या फिर वे इस गौरवशाली सदन, कैथल की जरूरतों और प्रदेश के विकास को अहमियत ही नहीं देते?
आखिर क्या कारण है कि रणदीप सुरजेवाला अब तक 66 दिन चली हरियाणा विधानसभा में सिर्फ 5 बार पधारे हैं? टीवी पर चिल्ला चिल्ला कर भाजपा सरकार और मोदी जी से सवाल पूछने वाले इस महारथी ने साढ़े तीन साल में विधानसभा में एक भी सवाल नहीं पूछा। सभी मुद्दों पर मीडिया में ज्ञान बांटने वाले इन साहब को विधानसभा में ना तो कभी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने लायक कोई विषय मिला ना इन्होंने कभी किसी मसले पर काम रोको प्रस्ताव लाने की जरूरत समझी। मतलब धुरंधर प्रवक्ता जी का सवाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, काम रोको प्रस्ताव में खाता शून्य है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में झूठ का पुलिंदा परोसने वाले रणदीप सुरजेवाला के पास ऐसे कोई तथ्य नहीं हैं जो विधानसभा में कहे जा सकें क्योंकि विधानसभा में बाते तथ्यों और सच्चाई के आधार पर ही रखी जाती हैं। कोई झूठ बोलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है। बस इसीलिए सुरजेवाला ना वहां आते, ना कोई बात कहते।
सुरजेवाला यह क्यूं नहीं बताते कि 10 साल तक मंत्री होते हुए उन्होंने अपनी सरकार से स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करवाने और किसानों को 50 फीसदी मुनाफे वाला समर्थन मूल्य दिलवाने के लिए अपनी सरकार पर दबाव क्यूं नहीं बनाया। सुरजेवाला यह भी बताएं कि वित्त मंत्री और लोकनिर्माण मंत्री होते हुए भी उनके राज में अंबाला-कैथल-हिसार हाइवे को 4-लेन करने का प्रोजेक्ट लटका ही क्यूं रहा। कांग्रेस की दस साल की सरकार में सुरजेवाला कौन सी सैटिंग के तहत अपने क्षेत्र की सडक़ों को लेकर चुप बैठे रहे।
किसानों की चिंता आपको तब क्यूं नहीं हुई जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा अधिग्रहण का डर दिखाकर किसानों की जमीन बिल्डरों के हाथों लुटवा रहे थे। क्यूं आप उस वक्त चुप रहे जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट किसी ने हाथ में उठा कर भी नहीं देखी।
सुरजेवाला को बताना चाहिए कि ये बातें जो उन्हें अब आती हैं, ये मंत्री की कुर्सी का सुख भोगते हुए 10 साल तक क्यूं नहीं आई? ‘‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’’ कहावत ऐसे ही लोगों के लिए बनी है।
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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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