कैप्टन सरकार के यतनों से नशों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषियों की ज़मानत रद्द

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कैप्टन सरकार के यतनों से नशों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषियों की ज़मानत रद्द
चण्डीगढ़, 18 जुलाई:  कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा नशों के विरुद्ध शुरु की गई मुहिम में आज उस समय बड़ी जीत हासिल हुई जब सुप्रीम कोर्ट में नशों के विभिन्न मामलों में शामिल दोषियों को हाई कोर्ट की तरफ से दी ज़मानत पर रोक लगा दी। इस बड़ी सफलता के बाद पंजाब सरकार इन मामलों में अगली कार्यवाही कर सकेगी और ज़रूरत पडऩे पर दोषियों को पुन: गिरफ़्तार भी कर सकेगी।
पंजाब सरकार की दलील को मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए पंजाब सरकार द्वारा दायर 19 स्पैशल लीव पटीशनज़ को स्वीकार करते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा सम्बन्धित दोषियों को नशों के केसों में दी गई जमानत पर रोक लगा दी है। पंजाब सरकार की स्पैशल लीव पटीशनें उन मामलों से सम्बन्धित थीं जिनमें हाई कोर्ट ने नशों के मामलों में दोषी व्यक्तियों को इस कानूनी नुक्ते को आधार बनाकर ज़मानत दे दी थी कि इन मामलों की सुनवाई ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के अधीन विशेष अदालतों द्वारा होनी चाहिए न कि एन.डी.पी.एस. एक्ट के अधीन।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इन मामलों में दोषियों को ज़मानत दिए जाने के बाद इन मामलों में सही ढंग से पैरवी न होने का सख़्त नोटिस लिया और एडवोकेट जनरल को हाई कोर्ट के हुक्मों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए हुक्म किये थे।
पंजाब सरकार की तरफ से दी दलीलों को स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आर.वी. रमंना के नेतृत्व वाले बैंच ने नोटिस जारी करते हुए इन समूह मामलों में स्टे आर्डर जारी किये जिससे हाई कोर्ट द्वारा नशों के मामलों में दी गई ज़मानत पर रोक लग गई है।
सुप्रीम कोर्ट के हुक्मों संबंधी मुख्य सचिव पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस प्रमुख को जानकारी एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा ने दी और यह विनती भी की कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम हुक्मों की पालना यकीनी बनाई जाये और सम्बन्धित अधिकारी अपने स्तर पर यह फैसला लें कि यदि ज़रूरत पड़े तो वह पहले ही ज़मानत पर रिहा हो चुके दोषियों को फिर गिरफ़्तार कर सकते हैं।
नशों के खि़लाफ़ पंजाब सरकार की तरफ से शुरु की गई मुहिम के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी किये गए यह स्टे आर्डर राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि है क्योंकि अब यह दोषी, तकनीकी तौर पर जिस अदालत /कोर्ट में मामला सुनवाई अधीन है, वहां ज़मानत के लिए आवेदन दायर नहीं कर सकेंगे।
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Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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