आज जरूरत है पंजाब में नशों के खिलाफ राज्यव्यापी मुहिम को चलाने के लिए डा. दलेर सिंह मुल्तानी सरीखे योद्धाओं की, न कि रिटायर हो चुके एक्सटेंशन पर जी रहे थकेले अधिकारियों की

भुपेंद्र शर्मा, चंडीगढ़: पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नशों के खिलाफ राज्यव्यापी जो मुहिम चलाई हुई है वह सराहनीय योग है मगर क्या इस मुहिम को सही तरीके से लागू करने वाले स्वास्थ्य विभाग के वे अफसरान जो लंबा अर्सा पहले विभाग से तो रिटायर तो हो चुके हैं मगर अब मिलीभुगत के कारण दुबारा उन्हीं पदों पर बतौर एक्सटेंशन काम कर रहे हैं, उपयुक्त हैं मुख्यमंत्री जी के इस बड़े जनकल्याणकारी अभियान को सफलता पूर्वक लागू करने के, यह एक बड़ा सवाल है। पिछले कुछ सालों से उक्त अधिकारियों द्वारा किये गये काम को देखते तो ऐसा लगता है कि मानों वे अपने एक्सटेंशन वाले पदों पर बैठ कर महज़ वक्त को धक्का दे रहे हों। गौरतलब है कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर तथा सिविल सर्जन दोनों पदों पर ही 58 वर्षों की नौकरी का स्वाद चख चुके रिटायर्ड अधिकारी ही एक्सटेंशन के तौर पर तैनात हैं इनकी न तो स्वास्थ्य विभाग से जुड़े किसी विकास के कार्य को करने में रूचि होती है और न ही इस काम को आगे विकसित करवाने में सबोर्डिनेट स्टाफ को गाइड करने में। और तो और इन की दैनिक कारगुजारी से देख कर तो ऐसा लगता है मानों ये गुरुघंटाल उक्त पदों पर रह कर उक्त पदों से मिलने वाली सुविधाओं तथा मासिक लाखों रुपयों के वेतन का आनंद प्राप्त करने ही यह जुगाड़ बिठा कर बैठे हों। इससे जहां एक ओर विभाग में तैनात उस जुझारू सबोर्डिनेट स्टाफ का मनोबल टूटता है जो विभाग के लिए और अंतत: राज्य की जनता के लिए कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा रखता है मगर इन गुरुघंटालों द्वारा समय पर कोई फैसला न लेने के चलते चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता। इसके अलावा यही स्टाफ, चाह कर भी मुख्यमंत्री जी के द्वारा चलाये जा रहे स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों अथवा जन कल्याणकारी नीतियों को लागू नहीं कर पाता। क्योंकि जैसा राजा तथी प्रजा यानि जैसा होगा बड़ा अधिकारी वैसा ही कर्म करेगा उसके अधीन काम करने वाला अधीनस्थ कर्मचारी वर्ग।
यद्यपि विभाग का उच्च अधिकारी ही जीवन के पांच दशक पूरे करके थकेला वर्ग में कदम रख चुका होगा और सदैव काम से जी चुरा कर समय की बर्बादी करता होगा तो उसके अधीन कर्मचारी सिवाय अपने रिटायर्ड मगर एक्सटेंशन पर तैनात अधिकारी को ही खुश करने के और कुछ करने में रूचि नहीं लेगा। यही सब हो रहा है पंजाब के ज्यादातर जिले में तैनात स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ। एक आंकड़े के अनुसार पूरे राज्य में डायरेक्टर और सिविल सर्जनों के कुल 40 पदों में से ज्यादातर पर एक्सटेंशन पर चल रहे अधिकारी ही राज कर रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री जी के पंजाब में से नशे को जड़ से उखाड़ने की मुहिम के लिए राज्य में कोई भी काबिल अफसर नहीं बचा है और न ही उसे स्वास्थ्य विभाग में बुलंदियों तक पहुंचाने का किसी में जज्Þबा शेष बचा है। आज भी राज्य में कई ऐसे जुझारू अधिकारी व कर्मचारी मौजूद हैं जो अपने खर्चे पर, अपने परिवार को दांव पर लगा कर और अपने करियर की परवाह न करते हुए सरकार की हर नीति को लागू करने में अग्रसर रहते हैं मगर उन्हें अपने आला अधिकारियों द्वारा उपयुक्त माहौल न मिलने के चलते वे मन मसोस करके रह जाते हैं। इन्हीं जांबाज़ अधिकारियों में से एक नाम है डा. दलेर सिंह मुल्तानी। मोहाली निवासी डा. मुल्तानी केवल नाम से ही दलेर सिंह नहीं है वह अपने कामों में भी दलेर है यह हम नहीं बल्कि मोहाली, डेराबस्सी, मानसा, फिरोजपुर, सुनाम, होशियारपुर और पटियाला के क्षेत्रों के लोग कह रहे हैं जहां जहां इन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया है और जनता की सेवा की है।
31 वर्ष लगातार पंजाब के जन जन की सेवा कर चुके डा. दलेर सिंह मुल्तानी मौजूदा हालात में मोहाली के प्राइमरी हेल्थ सेंटर बूथगढ़ में एस.एम.ओ. के पद पर तैनात हैं। पंजाब में जहां जहां इन्होंने काम किया है वहीं वहीं इन्होंने काम की अमिट छाप अपने पीछे छोड़ दी है।
वर्ष 1993-93 में डा. मुल्तानी लालड़ू में तैनात थे। वहां 25 बिस्तरों वाला रूरल अस्पताल बनने के बावजूद इसे तत्कालीन सरकार ने टेकओवर नहीं किया था मगर डा. दलेर सिंह मुल्तानी ने अपनी मेहनत और स्थानीय लोगों के सहयोग से इस मिन्नी पी एच सी को न केवल बड़े अस्पताल की भांति चलाया बल्कि इससे लाखों लोगों को फायदा भी पहुंचाया। इसी प्रकार वर्ष 1994 में लालड़ू में ही रात को 12 बजे के करीब जब गैस लीक होने से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए तो उस दौरान इस जांबाज़ डा. दलेर सिंह मुल्तानी ने अपनी जान पर खेल कर न केवल 80 लोगों की जान बचाई बल्कि उनका उचित उपचार भी किया। वर्ष 2001-02 में इसी क्षेत्र के एक झोला छाप डाक्टर द्वारा आम मासूम जनता को स्टीरोइड दिये जाने से भी इन्होंने ही रोका और पुलिस में केस दर्ज करवा कर उसकी दुकान बंद करवाई ताकि वह आइंदा आम जनता के जीवन से खिलवाड़ न कर सके।
वर्ष 2002 में खरड़ में पी सी पी एन डी टी एक्ट के तहत युवा लड़कों को दवा देने वाले एक देशी हकीम के खिलाफ डिकोय पेशेंट बन कर डा. मुल्तानी ने उसका पर्दाफाश किया। वर्ष 2004-05 में पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किये जा रहे घोटालों, शारीरिक शोषण और नियमों कानून की धज्जियां उड़ाने को भी डा. मुल्तानी ने बेखौफ जगजाहिर किया और उसे कड़ी से कड़ी सजा सुनवा कर ही दम लिया। वर्ष 2007 में टोरेक्स कफ सीरप के खिलाफ आवाज़ उठाई क्योंकि इसे युवा बतौर नशे के तौर पर लेने लगे थे इसे बंद करवा कर ही दम लिया। वर्ष 2008 में घड़ूआं गांव की पी.एच.सी. में तैनाती के दौरान डा. मुल्तानी ने स्थानीय कैमिस्ट शाप के खिलाफ आवाज़ उठाई क्योंकि यह उस समय युवाओं को नशा परोस रही थी। वर्ष 2014 में नशों के खिलाफ बड़ा जागरूकता अभियान चलाया और सी.एच.सी.लालड़ू में 500 से ज्यादा नशा करने वालों को नशा छुड़वाने में पूरी मदद की। वर्ष 2014-15 में सिविल अस्पताल में डेरा बस्सी में स्थानीय लोगों के सहयोग से लाखों रुपयों के उपकरण खरीदे और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित आवश्यक्ताओं को पूरा किया। इसी वर्ष पंजाब में फर्जी सर्टीफिकेट बना कर डाक्टर बनाने के मामले को उजागर करने के लिए डा. मुल्तानी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। इसी वर्ष सेवानिवृत्त ए एन एम द्वारा गैरकानूनी प्रेक्टिस किये जाने को भी जगजाहिर भी किया। वर्ष 2016-17 में फिरोजपुर के ममदोट में अस्पताल की ईमारत को इलाज के काबिल भी बनाया। वहां के स्थानीय लोगों का इसमें खासा सहयोग मिला। वर्ष 2017-18 में प्राइमरी हेल्थ सेंटर बूथगढ़ का स्थानीय लोगों के सहयोग से कायाकल्प किया। यहां तंबाकू के खिलाफ, प्रदूषण के खिलाफ, टी बी के रोगियों के लिए खास प्रबंध, बच्चों के लिए दवाएं, गर्भवती माताओं को सुविधाएं मुहैया करवायी और कई आवश्यक टेस्टों की लेबोरेटरी भी स्थापित करवायी ताकि उन्हें बाहर प्राइवेट लेबोरेटरियों के हाथों न लुटना पड़े। इस के अलावा डा. मुल्तानी ने विभिन्न गांवों में जा जा कर मेडिकल कैंप लगाए और स्वास्थ्य संबंधी जागरूक भी किया।
इतना ही नहीं डा. दलेर सिंह मुल्तानी वर्ष 2009 से पंजाब को स्वच्छ रखने के लिए मोहाली में हर 15 दिनों के बाद रविवार को क्लीन तथा गरीन मुहिम लगातार चला रहे हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम को कामयाब बनाने के लिए होशियारपुर जिले के तलवंदी डडीयां गांव में तथा लालड़ू (मोहाली) के स्कूलों की लड़कियों को गोद लेकर उनके लिए इन्फ्रास्ट्र्क्चर मुहैया करवाते हैं यह सब शैल्टर चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
उक्त जनकल्याणकारी कामों के चलते डा. दलेर सिंह मुल्तानी को 26 जनवरी 1995 को डी सी पटियाला, 26 जनवरी 1999 को एस.डी.एम. डेराबस्सी, 15 अगस्त 2001 को डी.सी.पटियाला, 15 अगस्त 2007 को डी.सी.मोहाली, 15 अगस्त 2012 को एस.डी.एम.डेराबस्सी तथा 26 जनवरी 2014 को डी.सी.मोहाली द्वारा समय समय पर सम्मानित किया जाता रहा है। गर पंजाब सरकार ने वाकई राज्य में नशों के चेन को तोड़ना है और नशे से पीड़ित लोगों को ठीक करके पंजाब को खुशहाल बनाना है तो सरकार को डा. दलेर सिंह मुल्तानी सरीखे दलेर डाक्टर अधिकारियों की जरूरत है न कि एक्सटेंशन पर चल रहे उच्च अधिकारियों की जो सिवाय सरकार पर लाइबिल्टी के और कुछ नहीं। गर बावजूद उक्त बातों के सरकार इन लाइबिल्टी को एक्सटेंशन देना जारी रखती है तो इन्हें प्रशासनिक पद देने की बजाय कलीनिकल पद दिये जायें ताकि ये डाक्टरों की कम गिनती की कमी को पूरा कर सकें और जनता की सेवा कर समाज सेवा में अपना योगदान दे सकें।


विश्व के इकलौते धन्वंतरी धाम में गौरीकुल के निर्माण का काम शुरु

चंडीगढ़: धन्वंतरी धाम में जल्द ही गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाली कन्याओं के लिए गौरीकुल बन कर तैयार हो जायेगा जिसके निर्माण का कार्य शुरु हो चुका है, इसकी जानकारी धाम के प्रधान सेवक श्री सुभाष गोयल ने सिटी दर्पण से खास बातचीत में दी। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़-दिल्ली नेशनल हाई वे पर अंबाला जिला के फडोली गांव में स्थित इस गौरीकुल में 14 कमरे बनाये जा रहे हैं जिसमें कन्याओं को निशुल्क सिलाई, कढ़ाई तथा अन्य स्व:रोजगार संबंधी कामों का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जायेगा ताकि वे कन्याएं आगे चल कर अपना रोजगार स्वयं पैदा कर सकें। इससे उनकी इस पुरुष समाज पर निर्भरता कम तो रहेगी साथ में आत्म विश्वास में भी इजाफा होगा। इन कन्याओं को इन कामों के अलावा बुनियादी शिक्षा की भी जानकारी दी जायेगी। याद रहे गोयल जी ने यहां गौरीकुल शिक्षा संस्थान खोलने का फैसला काफी अर्सा पहले ले लिया था, वे चाहते हैं कि यह गौरीकुल लड़कों के गुरुकुल की तरह ही हो। इससे हरियाणा प्रदेश में लड़कियों को प्रोत्साहन देने में भी खासी मदद मिलेगी। इसके जरिए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम को भी आगे ले जा सकेंगे।
गौरतलब है कि धन्वंतरी धाम देश का ही नहीं ब्लकि विश्व का पहला ऐसा धाम है जिसे भगवान धन्वंतरी जी के निवास स्थान के तौर पर विकसित किया गया है। भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के आदि प्रवर्तक एवं स्वास्थ्य के अधिष्ठाता देवता होने से विश्व वंध्य है। स्वास्थ्य या आरोग्य मानव जीवन का आधार है। आयुर्वेद -आयुष्य का अर्थात जीवन का विज्ञान है। जीवन के हित अहित सुख दु:ख का सूक्ष्म विवेचन होने से आयुर्वेद मानव जाति का परम अभीष्ट है। वह पुरुषार्थ चतुष्टय अर्थात धर्म ,अर्थ , काम और मोक्ष का साधन होने से कल्याणमयी है। सभी के लिए जानने योग्य है। इसी आयुर्वेद के ज्ञान से सम्पूर्ण विश्व को आलोकित करने वाले भगवान धन्वन्तरी न सिर्फ चिकित्सक वर्ग अपितु सम्पूर्ण मानव जाति के आराध्य देवता है ।
सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु ने जगत त्राण हेतु 24 अवतार धारण किये हैं। जिनमें भगवान धन्वंतरी 12वे अंशावतार है अर्थात आप साक्षात विष्णु के श्रीहरी रूप है इनके प्रादुर्भाव का रोचक वृतांत पुराणों में मिलता है। श्री गोयल जी इस धन्वंतरी धाम को उसी प्रकार से विकसित करना चाहते हैं जैसे कि शास्त्रों अथवा पुराणों में लिखा है। वे यहां आने वाले रोगियों की हर प्रकार से सहायता करना चाहते हैं। उक्त धाम में गोयल जी ने पिछले लंबे अर्से से वर्दान आयुर्वेद के बैनर तले आम जनता का न केवल निशुल्क इलाज कराना शुरु कर दिया है बल्कि यहां रोगियों कों फ्री दवाएं भी दी जाती हैं। इसके अलावा यहां हर रविवार दोपहर को लंगर की व्यवस्था की जाती है जिस में 700-800 लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। श्री गोयल जी ने बताया कि वर्दान आयुर्वेद में बी ए एम एस, आयुर्वेदा में एम.डी. और पी.एच.डी. स्कॉलर हैं जो यहां गरीब जनता का इलाज करते हैं उन्होंने बताया कि आजकल चमड़ी और जोड़ों के दर्द से पीड़ित रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। श्री गोयल ने बताया कि वे यहां पर 350 बिस्तरों वाला इन्डोर अस्पताल भी बनाने की योजना बना रहे हैं जहां रोगियों को इलाज के दौरान यहां रहने और खाने पीने की सुविधा दी जायेगी। यहां पर उनकी देख रेख के लिए 50 के करीब अपने काम में दक्ष वैद्य रहेंगे। गौरतलब है कि यहां प्रबंधन ने विभिन्न औषधिय पौधों का भी पौधारोपण किया हुआ है। जिनके आगे उनकी नेम प्लेट भी लगी है ताकि आम जनता उस औषधीय पौधों का महत्व और फायदे जान सकें। इस धाम में देशी काले रंग की गाय और उसका बछड़ा रखा हुआ है जिनके दूध, मूत्र और गौबर के कैंसर के रोग के उपचार में खासे फायदे हैं।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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