मुख्यमंत्री द्वारा पंजाब यूनिवर्सिटी के मौजूदा रुतबे में किसी भी तरह की तबदाव रद्द, हरियाणा इतिहास को उल्टा चक्कर नहीं दे सकता
कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा राजनाथ सिंह को पत्र
पंजाब सरकार द्विपक्षीय बातचीत के द्वारा यूनिवर्सिटी की अनुदान बढ़ाने के लिए तैयार
चंडीगढ़, 30 जुलाई:  पंजाब यूनिवर्सिटी के मौजूदा रुतबे में किसी भी तरह की तबदीली लाए जाने को सरासर रद्द करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे एक पत्र में कहा है कि उनकी सरकार आपसी विचार-विमर्श के द्वारा यूनिवर्सिटी के लिए गं्राट इन ऐड में विस्तार करने के लिए तैयार है ।
राजनाथ सिंह को लिखे एक अद्र्धसरकारी पत्र में मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही का हरियाणा सरकार फ़ायदा नहीं उठा सकती। उन्होंने लिखा है कि वित्तीय स्रोतों की अस्थाई समस्या और संवेधानिक दावेदारों का संकल्प हरियाणा सरकार को पहले वाली स्थिति के लिए लौटने की इजाज़त नहीं देता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी में अपने हिस्से की बहाली संबंधी हरियाणा सरकार का प्रस्ताव ऐतिहासिक, तर्कपूर्ण, विवेकशील और सांस्कृतिक तौर पर दुरुसत नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा अपनी इच्छा के अनुसार इतिहास को मोड़ देकर इस पर अपना झूठा हक नहीं जता सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 की धारा 72 की उप-धारा) के अनुसार पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चण्डीगढ़ यू.टी. प्रशासन की क्रमवार 20:20:20:40 के अनुसार हिस्सेदारी थी और इसके अनुसार इन द्वारा रख-रखाव सम्बन्धित अनुदान की कमी का भुगतान किया जाता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ने इस हिस्सेदारी वाले प्रबंध में से अपने आप को बाहर निकालने का फ़ैसला किया था। हरियाणा सरकार ने अपने कालेजों की पंजाब यूनिवर्सिटी के साथ ऐफीलिएशन वापस ले ली थी और इन कालेजों को हरियाणा राज्य में दूसरे यूनिवर्सिटियों में तबदील कर दिया था। हरियाणा सरकार का यह फ़ैसला एकतरफ़ा और बिना शर्त था। इस लिए 1976 से पंजाब और चण्डीगढ़ यू.टी. प्रसासन क्रमवार 40:60 के अनुसार यूनिवर्सिटी को रख -रखाव संबंधी अनुदान की कमी का भुगतान करते आ रहे हैं । भारत सरकार ने अपने नोटीफिकेशन तारीख़ 27 अक्तूबर, 1997 के अनुसार पंजाब यूनिवर्सिटी की विभिन्न गवर्निंग बॉडियों में हरियाणा की प्रतिनिधिता को ख़त्म कर दिया।
इसका आगे और वर्णन करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी अपने वित्तीय मामलों का एकतरफा तौर पर प्रबंधन करती आ रही है और इसको चलाती आ रही है। राज्य सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष दौरान इसकी ग्रांट इन एड 20 करोड़ से बढ़ाकर 27 करोड़ रुपए कर दी है जिसमें 35 प्रतिशत विस्तार किया गया है। यह बढिय़ा विस्तार पंजाब यूनिवर्सिटी की ज़रूरतों के अनुरूप नहीं हो सकता परन्तु इसका कारण यह है कि इस संबंध में द्विपक्षीय विचार-विमर्श की प्रक्रिया नहीं है जिसके कारण यूनिवर्सिटी का वित्तीय प्रबंधन प्रभावित हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनिवर्सिटी और पंजाब सरकार में सलाह मशवरे की प्रक्रिया के द्वारा वित्तीय संतुलन पैदा करना समय की ज़रूरत है जिससे एक ठोस योजना उचित समय के लिए तैयार की जाये जो 10 साल की भी हो सकती है और यह सामुहिक रूप में तैयार होनी चाहिए ।
हरियाणा द्वारा चण्डीगढ़ शहर के लक्षण और बनावट में ट्राईसिटी के तौर पर आए कथित परिवर्तन के किये जा रहे दावों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तथ्य को किसी भी सूरत में झुठलाया नहीं जा सकता कि ट्राईसिटी हमेशा ही अस्तित्व में थी और जब हरियाणा ने पंजाब यूनिवर्सिटी से अपने कालेजों की ऐफीलिएशन ख़त्म करने का फ़ैसला किया और इनको अन्य यूनिवर्सिटियों के साथ जोड़ा तब भी ट्राईसिटी था। उन्होंने कहा कि उस समय से ट्राईसिटी के चरित्र में कोई भी तबदीली नहीं आई। हरियाणा सरकार ने उस समय एकतरफ़ा हो कर समझौतों से अपने आप को बाहर किया था और अब इस को अपने पहले रूख में तबदीली करने की आज्ञा नहीं दी जा सकती। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि ट्राईसिटी वाली दलील तर्कहीन है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त हालत के मद्देनजऱ पंजाब सरकार का यह दृढ़ विचार है कि इस यूनिवर्सिटी के चरित्र और अवस्था में कोई भी तबदीली स्वीकृत नहीं की जायेगी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि ऐतिहासिक तौर पर पंजाब के लोग इस यूनिवर्सिटी के साथ बहुत नज़दीक से जुड़े हुए हैं और इसकी शुरूआत से ही अपने आप की यूनिवर्सिटी से पहचान करते हैं । पंजाब यूनिवर्सिटी ने ऐतिहासिक, क्षेत्रीय और संस्कृतिक कारणों करके पंजाबियों के मन में भावनात्मक जगह बना ली है। यह शुरू से ही पंजाब की विरासत के संस्कृतिक चिह्न और विद्या के चिह्न के तौर पर उभरी है और इन कारणों से ही यह पंजाब राज्य के लगभग समानार्थक बन गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी को पंजाब राज्य के एक एक्ट पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट 1947 अधीन पुन: फिर शुरू किया गया इस के बाद 1966 में पंजाब राज्य का फिर गठन हुआ और संसद द्वारा बनाऐ गए पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 की धारा 72 (1) अधीन इसको इंटर -स्टेट बाडी कोरपोरेट घोषित किया गया।
  मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी ने अपनी शुरूआत से ही लगातार और बिना किसी रुकावट से पंजाब राज्य में कार्य किया है। इसको उस समय की पंजाब की राजधानी लाहौर से पहले होशियारपुर और बाद में पंजाब की राजधानी चण्डीगढ़ में तबदील किया गया। इसके साथ पंजाब के 175 कालेज सम्बन्धित हैं जो फाजिल्का फिऱोज़पुर, होशियारपुर, लुधियाना, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और एस.बी.एस. नगर में हैं । इन कालेजों के यह सभी क्षेत्र पंजाब में पड़ते हैं और पंजाब यूनिवर्सिटी का क्षेत्र चण्डीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश में भी पड़ता है ।
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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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