जल्द ही पी.जी.आई.के एडवांस्ड कार्डियक सेंटर में ई.पी.3डी तथा पैडियाट्रिक कार्डियोलोडी ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु कर दिये जायेंगे: प्रो. मनोज कुमार उकद्भाई रोहित


भुपेंद्र शर्मा, चंडीगढ़: पी.जी.आई. के अडवांस्ड कार्डियक सेंटर में युनिट 2 के प्रमुख प्रो. मनोज कुमार उकद्भाई रोहित का कहना है कि संस्थान में आये दिन लगातार बढ़ती रोगियों की संख्या के मद्देनजर यह जरूरी हो गया है कि यहां पर ई.पी.3डी तथा पैडियाट्रिक कार्डियोलोडी ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु कर दिये जायें। उन्होंने बताया कि यूं तो यहां ई पी 3 डी पहले भी की जाती है मगर यह रैगुलर नहीं है हम इसे रैगुलर करना चाहते हैं। इसके अलावा वक्त की नजाकत के चलते यह जरूरी हो गया है कि यहां पैडियाट्रिक कार्डियोलोडी ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु कर दिये जायें।
गौरतलब है कि प्रो. मनोज अपने फील्ड में आॅल राउंडर हैं वे एंजियोप्लास्टी भी करते हैं और इलेक्ट्रो फीजियोलोजी भी तथा पैडियाट्रिक कार्डियोलोजी भी। आपको इलेक्ट्रो फीजियोलोजी भी तथा पैडियाट्रिक कार्डियोलोजी में तो खास महारत हासिल है और ये आपके पंसदीदा विषयों में से एक हैं। आपने जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ और पी.जी.आई. के पूर्व निदेशक प्रो. के के तलवाड़ के साथ इलेक्ट्रो फीजियोलोजी पर सात साल काम किया।
गर हम प्रो. मनोज के निजी जीवन की बात करें तो प्रो. मनोज यूं तो गुजरात के दादरा से ताल्लुक रखते हैं। आपकी प्रारंभिक शिक्षा और 10ऋ 2 तक की पढ़ाई यहीं के सिलवासा में एक सरकारी स्कूल से अच्छे अंकों से पूरी हुई। याद रहे जिस क्षेत्र से आप ताल्लुक रखते हैं आज दो दशकों बाद भी वह क्षेत्र उतना तरक्की नहीं कर पाया है जितना कि गुजरात राज्य। उस क्षेत्र में ज्यादातर लोग आदिवासी हैं। उन हालातों में स्कूल जाना और फिर उसमें अच्छे अंक लेकर देश के जाने माने चिकित्सा संस्थान पी.जी.आई.में कार्डियक सेंटर की युनिट का प्रमुख होना कोई छोटी बात नहीं है। प्रो. मनोज पढ़ाई में शुरु से ही अव्वल हुआ करते थे। हालांकि उस समय सिलवासा में ही इकलौता यही एक स्कूल हुआ करता था जहां आपने 10ऋ2 में मेडिकल और नॉन मेडिकल दोनों विषयों पर ही पढ़ाई की क्योंकि आपके दौर में उस समय कोई ओप्शन नहीं हुआ करती थी। आपको 10ऋ2में दोनों मेडिकल और नॉन मेडिकल विषयों पर एक साथ पढ़ना पड़ने होते थे, जैसे ही आप ने 10ऋ2 अच्छे अंकों से पास की आपको गांधी नगर के वल्भविद्या नगर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने की आॅफर आ गई मगर आपने मेडिकल लाइन का ही चयन किया। प्रो. मनोज मानते हैं कि मेडिकल लाइन एक ऐसी लाइन है जिसमें आपको काम के दौरान समाज की सेवा करने के लाखों मौके मिलते हैं और आप पूरी तरह से समाज सेवा के प्रति समर्पित रहते हैं। अपने परिवार में आप ही पहले ऐसे शख्स हुए हैं जिन्होंने मेडिकल लाइन चुनी हो। आपके पिता जी स्कूल टीचर हुआ करते थे। छोटा भाई मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी ई है जब कि बहनें स्कूल टीचर। प्रो. मनोज बताते हैं कि जब उन्होंने पी.जी.आई. में अपना पहला कदम रखा तो उस समय यहां कार्डियोलोजी और कार्डियोसर्जरी का एक छोटा सा 40 बैड वाला विभाग हुआ करता था और सुविधायें भी सीमित हुआ करती थीं। इस विभाग की वास्तविक तरक्की वर्ष 2004 में पी.जी.आई.के निदेशक प्रो. के के तलवाड़ के आने के बाद हुई। उन्होंने यहा अडवांस्ड कार्डियक सेंटर बनवाया और आज यहां 178 बैड हैं। रोजाना 400 रोगी ओ.पी.डी.में आते हैं। 40-50 एंजियोग्राफी रोजाना की जाती हैं। यहां 4 कैथलैब का प्रोवीजन है जबकि दो पूरी तरह से वर्किंग हैं। अब इस पूरे सेंटर को संभालने के लिए 15 फैकल्टी हैं। देश के सरकारी कार्डियक सेंटरों में इसका स्थान एम्स के बाद दूसरे नंबर पर आता है। प्रो. मनोज रोजाना सुबह 8 बजे अस्पताल ड्यूटी पर आते हैं मगर जाना कब होता है इसका कुछ पता नहीं होता। वे यहां आते ही सारा दिन रोगियों की सेवा में लगा देते हैं।
प्रो. मनोज ने एम.बी.बी.एस. पॉडिचेरी स्थित जिपमेर विश्वविद्यालय से वर्ष 1992 में अच्छे अंकों से पास की। इसके बाद वर्ष 1996 में स्नात्कोत्तर एम डी आॅल इंडिया इंस्टीच्यूट आॅफ मेडिकल साइंसिस नई दिल्ली से पास की और कार्डियोलोजी में डी एम पी.जी.आई.चंडीगढ़ से वर्ष 2001 में पास की। जुलाई 2001 में आपने जिपमेर पॉंडीचेरी में पैडियाट्रिक कार्डियोलोजी में फैलोशिप के लिए चले गये मगर 8 अक्तूबर 2002 को दुबारा पी.जी.आई. में आपने बतौर असिस्टेंट प्रो. ज्वाइन किया। वर्ष 2007 में आपको ऐसोसिएट प्रो. के पद पर पदोन्नत किया गया। वर्ष 2010 में अडीशनल प्रो. तथा जुलाई 2014 में आपकी काबलियत की बदौलत आपको प्रो. के पद से सम्मानित किया गया।
प्रो. मनोज की काम के प्रति सच्ची लग्न, अथाह मेहनत और समाज सेवा के जुनून के मद्देनजर आपको वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ स्थित बी आर अंबेडकर मेडिकल कालेज रायपुर में विजिटिंग प्रो., वर्ष 2009 में अमरीका के वाशिंगटन में यंग लीडरशिप सम्मान, हॉंगकॉंग में एशिया-पेसिफिक कन्जेनीटल हार्ट डिजीज़ सम्मिट में दूसरा पुरस्कार, वर्ष 2007 में सेंट ल्यूकस मेडिकल सेंटर मिलवॉकी अमरीका में पेसिंग तथा इलेक्ट्रफीजियोलोजी में फैलोशिप तथा 2009 में मलेशिया के कुआलालांपुर स्थित नेशनल हार्ट इंस्टीच्यूट में हार्ट फेल्योर एंड कार्डियक रीसाइक्रोनाइजेशन थैरेपी पर ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत चयन करके समय समय पर सम्मानित किया जाता रहा है।
आपको 2005 में कार्डियोवास्कुलर रोगों के क्षेत्र में बेस्ट रिसर्च का काम करने पर डा. वी.के.सैनी गोल्ड मैडल से भी नवाजा गया। इसी प्रकार 2006 में पहला ए वी गांधी गोल्ड मेडल अवार्ड, इकोकार्डियोग्राफी पर 11वें वार्षिक कान्फ्रेंस में दूसरा पुरुस्कार, वर्ष 2006 में डा. वी.के.सैनी गोल्ड मैडल तथा वर्ष 2008 में डा. वी.के.सैनी गोल्ड मैडल और 2014 में तीसरे कावासाकी डिजीज़ सम्मिट पर पोस्ट प्रैजेंटेशन में पहला पुरुस्कार प्रदान किया गया।
विभिन्न संस्थायों ने आपको अपना सदस्य बना कर गौर्वान्वित महसूस किया है। आप नेशनल अकादमी आॅफ मेडिकल साइंसिस के सदस्य, कार्डियोलोजी सोसायटी आॅफ इंडिया के नेशनल लाइफ मैंबर, इंडियन अकादमी आॅफ इकोकार्डियोग्राफी के लाइफ मैंबर, पैडियाट्रिक कार्डियक सोसायटी आॅफ इंडिया के लाइफ मैंबर, इंडियन सोसायटी आॅफ इलेक्ट्रोकार्डियोलोजी के लाइफ मैंबर, इंडियन मीनोपॉज़ सोसायटी के लाइफ मैंबर, इंडियन हार्ट रूदम सोसायटी के सदस्य, इंडियन कालेज आॅफ कार्डियोलोजी के लाइफ मैंबर तथा इंडियन मेडिकल ऐसोसिएशन के लाइफ मैंबर हैं।
आपके अब तक 52 राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पेपर पब्लिश हो चुके हैं। आप कई प्रोजेक्टों की इवेल्यूएशन में प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर रहे हैं। आप मई 2005 से अप्रैल 2011 तक कार्डियक कैथ लैब के आॅफिसर इंचार्ज रहे हैं। आपने प्रो. के के तलवाड़ के साथ पैकेज डील प्रोसीजर में खासा काम किया है। इसमें कोरोनरी एंजियोग्राफी, कार्डियक कैथेट्राइजेशन, पी टी एम सी, एंडोमाइओकार्डियल बायोप्सी, पर्मानेंट पेसमेकर इंप्लांटेशन तथा इलेक्ट्रोफीजियोलोजी एंड आर.एफ.ए. शामिल हैं। आप ने कई वर्कशाप आयोजित की हैं जिनमें डी.एम.सी. के हीरो हार्ट सेंटर लुधियाना, के जी एम सी हॉस्पीटल लखनउ, आर.एम.एल.हॉस्पीटल लखनऊ, एल.पी.एस.कार्डियक इंस्टीच्यूट कानपुर तथा बी आर अंबेडकर मेडिकल कालेज रायपुर छत्तीसगढ़ के नाम शामिल हैं।
प्रो. मनोज को पी.जी.आई. के हृदय रोगियों का उपचार करते हुए 20 से ज्यादा वर्ष हो चुके हैं। आप मानते हैं कि पी.जी.आई. में सेवा करते समय कब 20 साल कब बीत गये पता ही नहीं चला। वे आज इस सेंटर की और तरक्की चाहते हैं। प्रो. मनोज मानते हैं कि वक्त की रफतार के चलते यहां रोगियों की संख्या में ताबड़तोड़ वृद्धि हुई है। क्योंकि चंडीगढ़ से सटे पंजाब, हरियाणा और जम्म काश्मीर राज्यों ने पी.जी.आई.सरीखा कोई भी अस्पताल नहीं है। वहां के रोगी भी यहीं पर इलाज के लिए आते हैं। बावजूद इस रोगियों की संख्या के दबाव के पी.जी.आई. आज भी बेस्ट आॅफ द बेस्ट है। यहां पर 90 प्रतिशत सुविधायें मौजूद हैं। प्रो. मनोज पी.जी.आई. के इस सेंटर में दूरबीन से वाल्व डालना, ई.पी.3डी तथा पैडियाट्रिक कार्डियोलोडी ट्रेनिंग प्रोग्राम को पूरी तरह से चलाना चाहते हैं। जब प्रो. मनोज से यह पूछा गया कि उनके फील्ड में प्राइवेट सेक्टर में ज्यादा ग्रोथ है तो उन्होंने बड़ी सादगी से उत्तर दिया कि उन्हें पैसा नहीं चाहिए, सुकून और समाज सेवा चाहिए। हां पैसा इतना होना चाहिए जिससे आपकी दैनिक जरूरतें पूरी हो सकें। वे भगवान ने जो उन्हें दिया है उससे पूरी तरह से संतुष्ट हैं और भगवान का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। प्रो. मनोज की धर्मपत्नि अंजू गुप्ता भी बाल रोग विशेषज्ञ हैं आपके एक बेटा और एक बेटी हैं दोनों अभी पढ़ाई कर रहे हैं। प्रो. मनोज को ट्रेवलिंग का खासा शौक है खास कर पहाड़ी इलाके में। उन्हें जब भी मौका मिलता है तो वे हिमाचल प्रदेश में घूमने निकल जाते हैं। प्रो. मनोज का कहना है कि हमें सदैव अपना बेस्ट आॅफ द बेस्ट देना चाहिए और जी जान से गरीब व हाशिये पर रह रहे लोगों की सेवा करनी चाहिए क्योंकि वे अस्पताल आने पर आपसे कुछ अपेक्षा रखते हैं उनकी अपेक्षा की कदर करना ही डाक्टर का सच्चा धर्म होता है।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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