डिवीजऩ बैंच द्वारा सरकार के नोटिसों को ख़ारिज करने संबंधी फ़ैसले पर रोक गैर-कानूनी ट्रांसपोर्ट परमिटों को रद्द करने का रास्ता साफ
चंडीगढ़, 18 जुलाई: राज्य में नई ट्रांसपोर्ट नीति को अमल में लाने और ग़ैर कानूनी परमिटों का प्रयोग कर रहे निजी ट्रांसपोर्टरों पर नकेल कसने के लिए रास्ता साफ हो गया है। आज पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के डिविजऩ बैंच की तरफ से दिए गए आदेशों के अनुसार एक सिंगल बैंच के जज द्वारा ट्रांसपोर्टरों को जारी किये नोटिसों को रद्द करने के फ़ैसले पर रोक लगा दी गई है।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के दिशा -निर्देशों के अनुसार राज्य में कुल 650 निजी ट्रांसपोर्टरों को ग़ैर -कानूनी पर्मिट रखने के दोष के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस जारी किये गए थे परन्तु ट्रांसपोर्टर हाईकोर्ट पहुँच गए और माननीय अदालत के जज द्वारा 23 मई 2018 को ये सभी नोटिस ख़ारिज कर दिए गए थे।
राज्य सरकार ने कोर्ट से ग़ैर -कानूनी पर्मिट धारक ट्रांसपोर्टरों को दी गई राहत को रद्द करने की माँग की थी और कहा थी कि यदि कोर्ट यह अपील स्वीकार कर लेती है तो राज्य में नई ट्रांसपोर्ट नीति को लागू करने के लिए रास्ता साफ हो जायेगा और इसको सुचारू ढंग से लागू किया जा सकता है। नई ट्रांसपोर्ट नीति हाई कोर्ट की तरफ से विजयंत ट्रैवल्ज़ केस में सुनाए गए फ़ैसले के अनुसार तैयार की गई है जिससे राज्य की ट्रांसपोर्ट नीति को पूर्ण रूप से पारदर्शी बनाया जा सके।
राज्य सरकार की कार्यवाही और नीतियों को सही करार देते हुए पंजाब के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल रमीजा हकीम ने कोर्ट के ध्यान में लाया कि इन पटीशनों को रद्द कर देना चाहिए क्योंकि इसी तरह के एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से फ़ैसला दिया जा चुका है और एक बैंच की तरफ से विजयंत ट्रैवल्ज़ संबंधी सुनाए गए फ़ैसले को लागू करने की निगरानी की जा रही है।
जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व वाले एक डिविजऩ बैंच ने सिंगल जज द्वारा रद्द किये गए कारण बताओ नोटिसों पर सख़्त ऐतराज़ प्रकट करते हुए कहा ‘‘विजयंत ट्रैवलज़ मामले में हमारे अवलोकनों को सिंगल जज की तरफ से पूरी तरह नजरअन्दाज किया गया। हम पंजाब में चल रहे ट्रांसपोर्ट माफिया को ख़त्म करना चाहते हैं जिससे राज्य में नये और साफ़ सुथरे लोग इस ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में आ सकें।’’
सिंगल बैंच की तरफ से ग़ैर -कानूनी पर्मिट धारक को दी राहत को बैंच द्वारा रद्द करने से ही जारी किये गए कारण बताओ नोटिस फिर मान्यता हासिल कर गए हैं और समूह ट्रांसपोर्टरों जिनको यह जारी हुए थे उनको अपने जवाब पेश करने होंगे कि उनके पर्मिट क्यों न रद्द किये जाएँ।
सिंगल जज की तरफ से दिए फ़ैसले और रोक लगाते हुए माननीय अदालत ने निजी ट्रांसपोर्टरों के वकील श्री पुनीत बाली की विनती मंजूर की है जिसके अंतर्गत उनकी तरफ से क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के पास जवाब पेश करने के लिए तीन हफ़्ते के समय की माँग की गई थी।
यह भी हुक्म जारी हुए हैं कि विजयंत ट्रैवलज़ मामले के फ़ैसले को लागू करने संबंधी सभी अपीलों और कार्यवाहियों को चीफ़ जस्टिस के निर्देशों के बाद ही जारी किया जाये। इस मामले संबंधी अगली सुनवाई 23 अगस्त, 2018 को होगी।
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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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