मंत्रीमंडल द्वारा पराली चुनौती फंड के नियम और शर्तों में संशोधन को मंजूरी
चंडीगढ़, 30 जुलाई- पंजाब मंत्रीमंडल ने पंजाब राज्य किसान और मज़दूर आयोग और पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी के सुझावों के अनुसार पराली चुनौती फंड के नियमों और शर्तों में संशोधन के लिए सहमति दे दी है जिससे पराली को जलाने की समस्या से निपटने के लिए उपयुक्त प्रौद्यौगिकी का हल ढूँढा जा सके।
यह फ़ैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता अधीन सोमवार को हुई मंत्रीमंंडल की मीटिंग में लिया गया ।
 गौरतलब है कि 4 अगस्त, 2017 की मीटिंग के दौरान मंत्रीमंडल की मंजूरी के बाद तारीख़ 15.09.2017 को एक नोटीफिकेशन नंबर 2/27 /06 -एग्री -2(10)/18019 जारी किया गया था जिसके तहत राज्य सरकार ने पराली के तेज़ी से निपटारे के लिए पराली चुनौती फंड स्थापित करने को नोटीफायी किया था ।
मंत्रीमंडल के इस फ़ैसले से पराली चुनौती फंड के लिए नियम और शर्तें आसान और साधारण होंगी जिससे बड़ी संख्या संस्थाएं /व्यक्तियों को इसमें शमूलियत करने के लिए विभिन्न प्रौद्यौगिकी समाधानों की पेशकश के लिए आज्ञा दी जायेगी । इससे न केवल भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाई रखने के लिए मदद मिलेगी बल्कि वातावरण को भी प्रदूषण मुक्त रखा जा सकेगा।
खेतों में ही धान की फ़सल की पराली के प्रबंधन के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी की प्राप्ति के उद्देश्य से पंजाब राज्य किसान और खेती मज़दूर आयोग द्वारा एक मिलियन अमरीकी डालर का फंड स्थापित किया गया है जिसका उद्देश्य खेत में पराली के प्रबंधन के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी प्राप्त करना है । यह प्रौद्योगिकी विश्व भर के निजी /जनतक एजेंसियाँ या व्यक्तियों से मुकाबला के आधार पर प्राप्त की जायेगी ।
धान की फ़सल की पराली के प्रबंधन में तेज़ी लाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मौके तैयार किये गए हैं । गेहूँ की समय पर बीजाई उत्पादन को प्रमुख रूप में निर्धारित करती है । इसके अवशेष के निपटारे के लिए समय को कम से कम किया गया है । इसको 20 दिन से कम रखा गया है। रिवायती बीज ड्रिलों की उपलब्धता अधिक मात्रा में है । इस कारण अवशेष के निपटारे में तेज़ी लाई जा सकेगी और इससे अवशेष को आग लगाने की समस्या का हल करने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी ।
इस सम्बन्ध में विकसित की गई प्रौद्योगिकी के मापदण्डों के लिए ज़ोर दिया जायेगा जिससे कम्बाईन से कटाई करने की सूरत में 20 दिन के अंदर पराली का ज़मीन में ही निपटारा किया जा सके जिससे रिवायती ड्रिल के साथ किसी भी अड़चन से बुवाई की जा सके । इससे थोड़ी और लम्बी मियाद के लिए वातावरण सुरक्षित रहेगा । इससे भूमि, फ़सल की उत्पादकता और मानव स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा । 20 दिन से कम समय में अवशेष के निपटारे का लक्ष्य प्राप्त करने वाली प्रौद्योगिकी व सुरक्षा और कुशलता संबंधी आगे और रैंकिंग लागू की जायेगी। उभरतर हुई प्रौद्योगिकी का धान की फ़सल की सिफारश मौजूदा किस्म पर लागू होने को और लागत पक्ष से उचित होने को यकीनी बनाया जायेगा ।
मंत्रीमंडल ने पराली की चुनौती के सम्बन्ध में दिशा-निर्देशों को भी मंजूरी दी है जिसमें पंजाब राज्य किसान और खेत मज़दूर आयोग को प्रस्ताव पेश करना भी शामिल है जो व्यक्तिगत /संस्थाई /ग्रुप /फर्मों की अंततराष्टीय प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में होगा । इस चुनौती में हिस्सा लेने के लिए अजऱ्ी फीस 1.25 लाख रुपए / 2 हज़ार डालर प्रति दाखि़ला होगा।  प्रौद्योगिकी के विस्तृत प्रोटोकोल से अधिक मानक वाला उत्पाद पंजाब राज्य किसान और खेत मज़दूर आयोग के पास पेश किया जायेगा जो प्रौद्योगिकी के स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए सुविधा मुहैया कराएगा ।
प्रारंभिक डाटा निवेशक द्वारा तैयार किया जायेगा जो मूल्यांकन के लिए दिए जाने वाले प्रस्ताव के साथ पेश किया जायेगा । निवेदकों के दावों का मूल्यांकन माहिर कमेटी द्वारा तजुर्बे के आधार पर दो साल के लिए किया जायेगा । यह कमेटी पंजाब राज्य किसान और खेत मज़दूर आयोग द्वारा गठित की जायेगी । आयोग का फ़ैसला अंतिम होगा । आयोग के पास एक साल का नोटिस देकर ‘चुनौती’ को वापस लेने का अधिकार आरक्षित होगा।
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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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