बैंकरों में कड़ी मेहनत, ईमानदारी और लक्ष्य को समय पर हासिल करने का जज्बा, देश की अर्थव्यवस्था काफी मजबूती प्रदान कर सकता है : पी.के.श्रीवास्तव, रीजनल हैड, यूनियन बैंक आॅफ इंडिया

चंडीगढ़: बैंकरों में कड़ी मेहनत, ईमानदारी और लक्ष्य को समय पर हासिल करने का जज्बा, देश की अर्थव्यवस्था काफी मजबूती प्रदान कर सकता है, ऐसा कहना है, यूनियन बैंक आॅफ इंडिया चंडीगढ़ के रीजनल हैड श्री पी.के.श्रीवास्तव जी का।
बैंक स्कुवायर से खास बातचीत में श्रीवास्तव जी बताया कि आज देश की कुल जनसंख्या में युवाओं की संख्या का अनुपात सबसे अधिक है और यह युवा शक्ति देश की अर्थव्यवस्था को मजबूदी प्रदान करने में अहम भूमिका अदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि यही बात बैंकिंग में भी लागू होती है। युवा बैंकर ज्यादा टेक्नॉल्जी की खासी जानकारी रखते हैं गर वे अपने सीनियरर्स के साथ मिलकर इस टेक्नॉल्जी बैंक की ग्रोथ के लिए ज्यादा इस्तेमाल करकें तो बैंकिंग उद्योग काफी तरक्की कर सकता है।
यूनियन बैंक आॅफ इंडिया में तीन दशक बिता चुके श्रीवास्तव जी मानते हैं कि उनका बैंक आये दिन, दिन दोगुनी और रात चोगुनी रफतार के साथ तरक्की के मार्ग पर अग्रसर है। इसका श्रेय केवल और केवल इस बैंक में काम करने वाले हजारों कर्मठ कर्मचारियों और जुझारू अधिकारियों को जाता है जिन की बदौलत आज पूरे देश को उनके बैंक पर न केवल भरोसा है बल्कि फख्र भी है।
गर हम श्रीवास्तव जी के निजी जीवन की बात करें तो यूं तो आप उत्तर प्रदेश में लखनउ के डालीगंज के पास उन्नाव जिले से ताल्लुक रखते हैं मगर बैंक की जॉब के चलते आप लगभक पूरा देश घूम चुके हैं। आपकी बुनियादी शिक्षा यहीं अच्छे अंकों से संपन्न हुई। इसके बाद आपने ग्रेज्युएशन विद इकनॉमिक्स लखनउ विश्व विद्यालय से अच्छे अंकों से पास की और पोस्ट ग्रेज्युएशन -एम.एस.डबल्यू भी इसी विश्व विद्यालय से अच्छे अंकों से पास की। बैंकिंग को अपना करियर बनाने की प्रेरणा आपको अपने बड़े भाई साहिब जी से मिली जो उस समय सिंडीकेट बैंक में एक अच्छे पद पर कार्यरत थे। पोस्ट ग्रेज्युएशन के बाद आपने बैंकिंग के लिए आवश्यक सी ए आई आई बी भी पास की। आपके पिता जी उन्नाव जिले में बोर्ड आॅफ रेवन्यू में एक वरिष्ठ अधिकारी हुआ करते थे अतैव काम के प्रति ईमानदारी, कड़ी मेहनत और अपने काम को समय सीमा में पूरा करने का जज्बा आपको संस्कारों में ही मिला है। आपकी माता जी होम मेकर हैं जो पूरे परिवार की एक मजबूत स्पोर्ट बनकर सामने आती रहती हैं और आज भी आ रही हैं।
वर्ष 1986 में जैसे ही आपने बैंक में जॉब के लिए आवेदन किया तुरंत आपको यूनियन बैंक आॅफ इंडिया से जॉब की आॅफर आ गई,आप मना न कर सके। आपकी पहली ज्वाइनिंग वर्ष 1986 में आजम गढ़ के पास मउ नाथ भंजन जिले में बतौर कलर्क हुई। दिन रात की कड़ी मेहनत और ईमानदारी के मद्देनजर आपकी पदोन्नति बतौर आॅफीसर हो गई और आपके लखनउ में पोस्ट किया गया। इसके बाद आपको शाहजहांपुर में काम करने का मौका मिला। आपने द सिटी ब्युटिफुल चंडीगढ़ में बतौर चीफ मैनेजर काम किया। इसके बाद आपको बतौर ए.जी.एम.मध्य प्रदेश के इंदौर में नियुक्त किया गया। इस पद पर दो साल रहे। बैंक ने आपकी परफार्मेंस, काम करने की शैली और काम में दक्षता के मद्देनजर आपको डी.जी.एम. के पद से नवाजा और बिहार के समस्तीपुर में रीजनल मैनेजर के पद की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी सौंपी। अभी इस पद पर आपको एक ही साल बीता था कि इसी बीच बैंक को आपकी जरूरत उत्तरांचल के देहरादून में पड़ी आपने वहां बतौर रीजनल हैड का कार्यभार सहर्ष संभाला। यहां आप दो साल रहे। बैंक ने आपके काम से प्रसन्न होकर आपको 23 अप्रैल 2019 को आपको चंडीगढ़ रीजनल हैड का महत्वपूर्ण पदभार सौंपा दिया। मौजूदा हालात में आप चंडीगढ़ की 10, हरियाणा की 24 और हिमाचल प्रदेश की 20 ब्रांचों का सफल नेतृत्व कर रहे हैं।
32 वर्षों का उल्लेखनीय तजुर्बा लिए अनुभवी श्रीवास्तव जी ने अपने कार्यकाल में हर क्षेत्र में किया है और जहां जहां भी आपकी पोस्टिंग रही है आपने अपनी श्रेष्ठ परफार्मेंस दी है। श्रीवास्तव जी को बैंकिंग के हर क्षेत्र में काम करने का बेहतरीन तजुर्बा है मगर बावजूद इसके आपको आॅप्रेशनल, एडमिनिस्ट्रेशन,ह्युमन रिसॉर्सिस और बिजनेस डवेल्पमेंट विद रिलेशनशिप में खासी रूचि है।
तीन दशकों में उनका बैंकिंग में कैसा अनुभव रहा इस पर पूछे गये सवाल के उत्तर में वे मुस्कुरा दिये और उन्होंने बताया कि उन्हें कुल मिला कर काफी अच्छा अनुभव प्राप्त हुआ है। मुझे अपने पूरे सर्विस के दौरान अपने सीनियर्स से काफी कुछ सीखने को मिला है और अपने से छोटों के लिए बतौर मार्गदर्शक बनने का भी मौका मिला है। वे मानते हैं कि बैंकिंग में उन्हें सबसे ज्यादा अच्छा ऐसे लोगों की सेवा करना लगता है जिन्हें वास्तव में बैंक से वित्तीय मदद की दरकार रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरा इन खास लोगों से अभिप्राय उन लोगों से है जो या तो गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे होते हैं या फिर पूरी तरह से गरीब होते हैं, ऐसे लोगों की गर समय के रहते मदद करें तो वे स्वयं तो रोजगार हासिल करते ही हैं साथ में अन्य बेरोजगारों का भी सहारा बनते हैं और उनके लिए प्रेरणास्रोत का भी काम करते हैं। इनके अलावा सीनियर सिटीजन तथा किसानों की मदद करके भी बतौर बैंकर मुझे खासी संतुष्टि मिलती है, ऐसा कहना है रहमदिल श्रीवास्तव जी का।
श्री वास्तव जी को बैंक के नेतृत्व के अलावा स्थानीय गैर सरकारी संगठनों द्वारा समय समय पर विभिन्न सम्मानों से नवाजा जाता रहा है। आपने बैंक द्वारा दिये गये हर पैरामीटर पर उल्लेखनीय भूमिका अदा की है। जिसे बैंक ने समय समय पर एक्नॉलेज भी किया है। इंदौर की मिड कार्पोरेट ब्रांच में बतौर इंचार्ज आपने आॅल इंडिया लेवल पर इसे श्रेष्ठ ब्रांच बनाया तो देहरादून और फिर बिहार के समस्तीपुर में भी आपकी परफार्मेंस काबिल ए तारीफ दिखायी दी।
श्रीवास्तव जी का कहना है कि बैंकिंग में आज पूरी तरह से बदलाव आ चुका है। मैने मैनुअल वर्क से फिनेकल 10 तक सब स्तर पर काम करके देखा है। बैंकिंग आज भी ट्रांस्फोर्म के दौर से गुजर रही है पहले बैंकों में मैनुअल वर्क के चलते सीमित लोगों की मदद की जाती रही है मगर आज टेक्नॉल्जी के आधार पर हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को केटर कर रहे हैं यह एक क्रांति नहीं तो और क्या है। हम बैंकिंग के अलावा केंद्र सरकार द्वारा निर्देशित मुद्रा लोन, रैलीगेयर, इंश्योरेंस, ए.पी.वाई और आधार से संबंधित वे सभी सेवाएं दे रहे हैं जिन से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होती है।
श्रीवास्तव जी काफी मिलनसार, सरल मगर गंभीर व्यक्तित्व के स्वामी हैं। आपकी धर्मपत्नि जी होम मेकर हैं जबकि सुपुत्र बी एस सी कर रहा है आपकी दो बेटियां सैटल्ड हैं। श्री वास्तव जी सदैव युवा बैंकरों को बैंक की ग्रोथ के लिए ज्यादा से ज्यादा कड़ी मेहनत का संदेश देते हैं ताकि उनका बैंक जो आज देश के शीर्ष के बैंकों की श्रंखला में है और पहले पायदान पर पहुंच सके।
-खत्म-

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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