मिशन तंदुरुस्त पंजाब
जागरूक किसानों ने डी.ए.पी. खाद का प्रयोग 29 प्रतिशत घटाया, अब अगला प्रयास यूरिया खाद के अनावश्यक प्रयोग रोकने की तरफ
किसान धान में 3.15 लाख टन अनावश्यक यूरिया खाद डालकर  200 करोड़ रुपए बेकार ख़र्च रहे हैं
चंडीगढ़, 17 जुलाई- पंजाब के कृषि विभाग द्वारा धान की लगवाई के दौरान ज़रूरत अनुसार डी.ए.पी. खाद का प्रयोग करने का संदेश कारगर सिद्ध हुआ है। सावन की फ़सल सीजन के दौरान किसानों ने पिछले वर्ष के तुलनात्मक आधार पर डी.ए.पी. खाद 29 प्रतिशत कम इस्तेमाल किया है। मिशन तन्दुरसत पंजाब के अंतर्गत अब कृषि विभाग ने किसानों को खर्चे घटाने और अधिक झाड़ लेने के लिए धान में समय पर और सिफारिश मात्रा के अनुसार ही यूरिया खाद डालने की अपील की है।
मिशन तंदुरुस्त पंजाब के डायरैक्टर श्री काहन सिंह पन्नूं ने बताया कि पंजाब के किसान हर वर्ष 85,000 टन डी.ए.पी. खाद के प्रयोग करते थे परन्तु तंदुरुस्त मिशन के अंतर्गत कैंपों, गाँवों के दौरों और अन्य प्रचार साधनों के द्वारा जागरूक हुए किसानों ने इस बार डी.ए.पी. खाद 29 प्रतिशत कम इस्तेमाल की है, जो सराहनीय कदम है। उन्होंने बताया कि पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी ने धान की फ़सल के लिए केवल दो थैले नीम कोटिड यूरिया खाद की सिफारिश की है। अगर धान की लगवाई से पहले जंतर /मूँग की दाल की फ़सल बतौर हरी खाद खेत में उगाई हो तो यूरिया खाद केवल एक से डेढ़ थैले ही ज़रुरी हैं। किसानों को चाहिए कि वह पनीरी लगाने के केवल 45 दिनों के अंदर ही यूरिया खाद डालें क्योंकि इसके बाद यूरिया डालने का कोई लाभ नहीं। अगर सिफारिश से ज़्यादा और 45 दिनों के बाद यूरिया खाद डाली जाती है तो हानिकारक कीड़ों खासकर तेला और अन्य बीमारियाँ फैलती हैं तो किसानों का न केवल ख़र्च बढ़ता है, बल्कि फ़सल का झाड़ भी घटता है। इतना ही नहीं इसके साथ धरती और वातावरण में जहर की मात्रा भी बढ़ती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि यूरिया डालते समय खेत में पानी बिल्कुल कम कर दो और यूरिया डालने के तीसरे दिन पानी लगाओ।
श्री पन्नूं ने बताया कि नयी तकनीकोंं और अधिक फ़सली घनत्व करके एक फ़सल से अधिक से अधिक झाड़ लेने की मंशा के अंतर्गत किसानों द्वारा विभिन्न खादों का प्रयोग किया जाता है और किसान उत्पादन बढ़ाने और एक -दूसरे की देखादेखी खादों के अनावश्यक प्रयोग कर रहे हैं। राज्य में सावन की फ़सल के दौरान 30.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की जाती है जिसमें से 25.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में परमल धान की फ़सल और 5.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बासमती की खेती की जाती है। सावन की फ़सल के दौरान 12.5 लाख टन यूरिया खाद का प्रयोग होता है जिसमें से 10 लाख टन धान की फ़सल में इस्तेमाल की जाती है। अगर किसान अधिक झाड़ लेने के चक्कर में सिफारिश से उल्ट 3 से 5 थैले यूरिया प्रति एकड़ इस्तेमाल करते हैं तो इसका सीधा सा भाव है कि किसान धान की फ़सल में 3.15 लाख टन यूरिया खाद अनावश्यक डाल रहे हैं, जिससे 200 करोड़ रुपए बिना ज़रूरत से किसानों की जेब में से ख़र्च हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने और धान की फ़सल में खादों के उचित प्रयोग के लिए किसानों को जागरूक करने हेतु कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा विशेष मुहिम चलाई जा रही है जिसके अंतर्गत किसान प्रशिक्षण कैंप, किसान गोष्टियांं, माहिरों द्वारा गाँवों के दौरे, यूरिया खाद के प्रयोग संबंधी इश्तिहार, पोस्टर और फ्लैक्स बोर्ड और अखबारों, टी. वी. और रेडीयो आदि के द्वारा प्रचार करके अधिक से अधिक किसानों को जागरूक किया जा रहा है जिससे किसान धान में सिफारिश की यूरिया खाद इस्तेमाल करके कम खर्च में अधिक लाभ ले सकें।
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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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