Poem of the Month (August Month)-हो गई पराई

हो गई पराई पार्लर जाने को घर से निकली तो चाची ने भावुक हो गले से लगाया आँखें हो गईं नम रुँघे गले से बोली बिटिया हो गई पराई समझो हो गई बिदाई। माँ हुई … Continue reading Poem of the Month (August Month)-हो गई पराई