बिजली के कारण आकस्मिक मौतों के मामले में वित्त विभाग, पीडीडी ने मुआवजे के मुद्दे की समीक्षा की
श्रीनगर, 31 जुलाई 2018- राज्यपाल एन एन वोहरा के निर्देशों पर, बिजली की लाइनों की मरम्मत करते समय विद्युत प्रक्षेपण के कारण आकस्मिक मौत के मामले में मुआवजे के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वित्त विभाग के प्रमुख सचिव नवीन कुमार चैधरी की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई। ज्यादातर मामले उर्जा विकास विभाग के आस्मिक श्रमिकों के प्रक्रिया में अपनी जान गंवा देने के है। आयुक्त, विद्युत विकास विभाग एच के सिंह तथा वित्त व उर्मा विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।
यह सूचित किया गया कि मरम्मत या अन्य कार्यों के समय लाइव बिजली लाइनों से निपटने के दौरान औसतन 15-20 व्यक्ति अपनी जान गंवाते हैं। उनमें से ज्यादातर आकस्मिक श्रमिक हैं और उनके परिवार एसआरओ -43 लाभों के तहत शामिल नहीं हैं। कुछ समय पहले, पीडीसी की प्रबंधन समिति ने ऐसे मामलों में 3 लाख रुपये के मुआवजे को तय करने का फैसला किया था।
इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गई और यह महसूस किया गया कि वर्तमान मुआवजा नीति अस्थायी और अपर्याप्त है। तदनुसार, यह निर्णय लिया गया कि वित्त विभाग की पूर्व सहमति के साथ उर्जा विकास विभाग ऐसे मामलों में मुआवजे में वृद्धि के लिए एसएसी को एक प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा।
समिति ने यह भी फैसला किया कि विद्युत प्रसंस्करण के परिणामस्वरूप स्थायी अक्षमता के मामलों में भी उपयुक्त मुआवजे का हकदार है, क्योंकि सैद्धांतिक तौर पर ऐसे मामले में एसएसी द्वारा तय किए जाने वाले मौत के मामले में राशि का आधा होना चाहिए।
इस तरह के मुआवजे का भुगतान, जहां से फंड बनाने के लिए वित्त विभाग द्वारा प्रदान किए जाने योग्य बड़े पैमाने पर धन के साथ, किया जा सकता है। इसके अलावा, पीडीडी कुछ सीमा के ऊपर बिजली बिलों पर फंड में जमा होने के लिए उपयुक्त सरचार्ज लगा सकते है।
आयुक्त, पीडीडी ने बताया कि वह एसएसी के विचार के लिए सप्ताह के समय के भीतर एक मसौदा कैबिनेट नोट लाएगा।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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