मंत्रीमंडल द्वारा नयी औद्योगिक नीति अधीन वित्तीय रियायतों के लिए विस्तृत स्कीमों और अमली दिशा-निर्देशों को हरी झंडी
चंडीगढ़, 30 जुलाई:  नयी औद्योगिक नीति को प्रभावी तरीकों से लागू करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाले मंत्रीमंडल ने नयी औद्योगिक नीति अधीन वित्तीय रियायतें प्राप्त करने के लिए विस्तृत स्कीमों और अमली दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी है ।
मंत्रीमंडल की मीटिंग के बाद एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि अमली़ दिशा-निर्देशों को सभी दावेदारों द्वारा गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है । इसमें उनके जायज और लाभदायक सुझावों को शामिल किया गया है जिससे उनको औद्योगिक विकास के अग्र्रणी हिस्सेदार बनाया जा सके ।
मंत्रीमंडल ने पहले आने वाली इकाईयों के लिए स्कीम और सीमावर्ती जोन में पहली इकाई स्थापित करने के लिए स्कीम को भी मंजूरी दे दी है । औद्योगिक इकाईयों को नयी औद्योगिक नीति में प्रवेश करने के लिए सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए मंत्रीमंडल ने नयी औद्योगिक नीति -2017 में माइग्रेशन स्कीम को भी मंजूरी दे दी है । मंत्रीमंडल ने बीमार एम.एस.एम.ई और बड़ी इकाईयों के लिए विशेष राहत पैकेज के लिए भी हरी झंडी दे दी है ।
आज स्वीकृत किये गए अमली़ दिशा-निर्देशों में स्टैंप ड्यूटी के भुगतान से छूट या पुन: भुगतान की स्कीम शामिल हैं । इसके साथ ही दिशा-निर्देशों के अनुसार सीएलयू /ई.डी.सी से छूट की स्कीम को भी मंजूरी दी गई है । मंत्रीमंडल ने बिजली ड्यूटी, जायदाद टैक्स के भुगतान से छूट के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देशों को मंज़ूरी दी है और वैट/एस.वी. एस.टी के फिर भुगतान के द्वारा निवेश सब्सिडी की भी एक अन्य स्कीम स्वीकृत की है । अमली़ दिशा-निर्देशों को एम.एस. एम.ई के लिए ब्याज सब्सिडी और वित्तीय रियायतें उपलब्ध करवाने के लिए भी अंतिम रूप दिया है ।
इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि उद्यम की शुरूआत, एम.एस.एम.ई और बड़ी और एंकर यूनिटों में इकाईयों का श्रेणीकरण अमली़ दिशा-निर्देशों अधीन किया गया है । उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए वित्तीय रियायतें जि़ला स्तर पर मंज़ूर की जाएंगी जबकि बड़ी इकाईयों के लिए यह रियायतें सूबा स्तर पर मंजूरी की जाएंगी । वित्तीय रियायतों के आसान ढंग से वितरण के लिए सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल सभी किस्म के वित्तीय मामलों की प्रक्रिया के लिए पहले ही स्थापित किया जा चुका है ।
एम.एस.एम.ई के नवीनीकरन को उत्साहित करने के लिए नीति दिशा-निर्देशों में बहुत सी स्कीमों शामिल की गई हैं जिसमें एम.एस.एम.ई के लिए प्रौद्योगिकी का स्तर ऊँचा उठाने के लिए सी.एल.सी.एस.एस के तहत अतिरिक्त राजकीय सहायतें प्रदान करना, एन.एस.ई द्वारा स्थापित इमरज़ एक्सचेन्ज प्लेटफार्म के लिए वित्तीय सहायता, एम.एस.एम.ई के लिए प्रौद्योगिकी सहायता शामिल हैं । एम.एस.एम.ई को भारत सरकार की ज़ीरो इफेक्ट ज़ीरो डिफैक्ट (एस.ई.डी) में अतिरिक्त सहायता के लिए रियायतों के इलावा इनको ऊर्जा आडिट, जल आडिट, सुरक्षा आडिट और वातावरण अमल के साथ सम्बन्धित खर्चों के कारण होते खर्चों के पुन: भुगतान की भी सुविधा की गई है ।
नयी अनुसंधान और विकास सरगर्मियों के लिए इन इकाईयोंं को उत्साहित करने के लिए खर्चों के पुन: भुगतान के लिए दिशा-निर्देश तैयार किये गए हैं । पेटैंट रजिस्टरेशन, गुणवत्ता  सर्टीफिकेशन के इलावा कारगुज़ारी और क्रेडिट रेटिंग स्कीम के लिए अतिरिक्त सहायता के कारण होते खर्चों की इसमें व्यवस्था की गई है ।
एम.एस.एम.ई को मंडी समर्थन उपलब्ध करवाने के लिए मंत्रीमंडल ने एम.एस.एम.ई से निर्यात के लिए भाड़ा सहायता स्कीम को मंजूरी देने के इलावा सार्वजनिक और प्राईवेट सैक्टर में इनक्युबेटर को वित्तीय रियायतें उपलब्ध करवाने को भी अंतिम रूप दे दिया है ।
आई.टी सैक्टर और उद्यम की शुरूआत पर ध्यान केंद्रित करते हुए मंत्रीमंडल ने एंकर इकाईयोंं को रोजग़ार पैदा करने पर सब्सिडी और आई.टी /आई.टी.एस के लिए पूँजी सब्सिडी की रियायतें उपलब्ध करवाने के अमली़ दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप भी दे दिया है ।
फूड प्रोसेसिंग उद्योग पर ध्यान केंद्रित करते हुए मंत्रीमंडल ने विभिन्न टैक्सों से इस उद्योग को छूट देने के लिए इस स्कीम को भी मंजूरी दे दी है ।
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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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