Health Article-विबन्ध यानि कब्ज, by Dr. Rajiv Kapila

Share this News:




विबन्ध यानि कब्ज


कब्ज पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। साधारण शब्दों में कब्ज का अर्थ है शरीर से मल नियमित रूप से न निकलना।
सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। एक सप्ताह में 7 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है। कब्ज होने से शौच करने में बाधा उत्पन्न होती है, पाचनतंत्र प्रभावित होता है,जिसके कारण शौच करने में बहुत पीड़ा होती है ,किसी को केवल गैस की समस्या होती है। किसी को खाने का पाचन ठीक से नहीं हो पाता है और आजकल कब्ज की समस्याओ से बच्चे और युवा पीढ़ी दोनों परेशान हो चुके है। व्यक्ति दो या तीन दिन तक शौच नहीं हो पाता है तो कब्ज की समस्या उत्पन्न हो जाती है। पेट में शुष्क मल का जमा होना ही कब्ज है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
कारण
इसके कई कारण होते हैं। जैसे कम रेशायुक्त भोजन का सेवन करना, भोजन में फायबर का अभाव होना, अल्पभोजन ग्रहण करना, शरीर में पानी का कम होना, कम चलना या काम करना, किसी तरह की शारीरिक मेहनत न करना, आलस्य करना, शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना, कुछ खास दवाओं का सेवन करना, बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण (यानि बड़ी आंत में कैंसर),थायरॉयड हार्मोन का कम बनना, कैल्सियम और पोटैशियम की कम मात्रा, मधुमेह के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या, कंपवाद (पार्किंसन बीमारी), चाय, कॉफी बहुत ज्यादा पीना, धूम्रपान करना व शराब पीना, गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना, आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी, दु:ख, चिन्ता, डर आदि का होना, सही समय पर भोजन न करना,बदहजमी और मंदाग्नि (पाचक अग्नि का धीमा पड़ना),भोजन खूब चबा-चबाकर न करना अर्थात जबरदस्ती भोजन ठूँसना, जल्दबाजी में भोजन करना, बगैर भूख के भोजन करना,ज्यादा उपवास करना आदि।
लक्षण
इस के रोगी में सासों की बदबू, लेपित जीब, बहती नाक,भूख में कमी, सरदर्द,चक्कर आना, जी मिचलाना,चहरे पर दाने, मुँह में अल्सर,पेट में लगातार परिपूर्णता आदि के लक्षण पाये जाते हैं।
इलाज
कब्ज से परेशान रोगी को इससे मुक्त होने के लिए रेशायुक्त भोजन का अत्यधित सेवन करना चाहिए, जैसे साबूत अनाज, ताजा फल और सब्जियों का अत्यधिक सेवन करना
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, ज्यादा व्यायाम करना चाहिए जिससे शरीर में गतिविधिया बढ़ती है। कब्ज के समस्या नहीं होती है। वसा युक्त भोजन का सेवेन कम करें, ज्यादा समस्या आने पर चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। इनके अलावा इन्हें खाने में ऐसी चीजें लेनी चाहिएं, जि‍नसे पेट स्‍वयं ही साफ हो जाय।
कुछ घरेलू उपाय
कब्ज के रोगी नमक, छोटी हरड और काले नमक को समान मात्रा में मि‍लाकर पीस लें। नि‍त्‍य रात को इसके दो चाय की चम्‍मच के बराबर मात्रा को गर्म पानी से लेने से दस्‍त साफ आता हैं।
ईसबगोल-दो चाय चम्‍मच ईसबगोल 6 घण्‍टे पानी में भि‍गोकर इतनी ही मि‍श्री मि‍लाकर जल से लेने से दस्‍त साफ आता है। केवल मि‍श्री और ईसबगोल मि‍ला कर बि‍ना भि‍गोये भी ले सकते हैं।
चना-कब्‍ज वालों के लि‍ए चना उपकारी है। इसे भि‍गो कर खाना श्रेष्‍ठ है। यदि‍ भीगा हुआ चना न पचे तो चने उबालकर नमक अदरक मि‍लाकर खाना चाहि‍ए। चने के आटे की रोटी खाने से कब्‍ज दूर होती है। यह पौष्‍ि‍टक भी है। केवल चने के आटे की रोटी अच्‍छी नहीं लगे तो गेहूं और चने मि‍लाकर रोटी बनाकर खाना भी लाभदायक हैं। एक या दो मुटठी चने रात को भि‍गो दें। प्रात: जीरा और सौंठ पीसकर चनों पर डालकर खायें। घण्‍टे भर बाद चने भि‍गोये गये पानी को भी पी लें। इससे कब्‍ज दूर होगी।
बेल-पका हुआ बेल का गूदा पानी में मसल कर मि‍लाकर शर्बत बनाकर पीना कब्‍ज के लि‍ए बहुत लाभदायक हैं। यह आँतों का सारा मल बाहर नि‍काल देता है।
नींबू-नींबू का रस गर्म पानी के साथ रात्रि‍ में लेने से दस्‍त खुलकर आते हैं। नीम्‍बू का रस और शक्‍कर प्रत्‍येक 12 ग्राम एक गि‍लास पानी में मि‍लाकर रात को पीने से कुछ ही दि‍नों में पुरानी से पुरानी कब्‍ज दूर हो जाती है।
नारंगी-सुबह नाश्‍ते में नारंगी का रस कई दि‍न तक पीते रहने से मल प्राकृति‍क रूप से आने लगता है। यह पाचन शक्‍ित‍ बढ़ाती है।
मेथी के पत्‍तों की सब्‍जी खाने से कब्‍ज दूर हो जाती है।
गेहूँ के पौधों (गेहूँ के जवारे) का रस लेने से कब्‍ज नहीं रहती है।
धनिया सोते समय आधा चम्‍मच पि‍सी हुई सौंफ की फ क्की गर्म पानी से लेने से कब्‍ज दूर होती है।
दालचीनी, सोंठ, इलायची जरा सी मि‍ला कर खाते रहने से लाभ होता है।
टमाटर कब्‍जी दूर करने के लि‍ए अचूक दवा का काम करता है। अमाश्‍य आँतों में जमा मल पदार्थ नि‍कालने में और अंगों को चेतनता प्रदान करने में बडी मदद करता है। शरीर के अन्‍दरूनी अवयवों को स्‍फूर्ति‍ देता है।
आहार
प्रात:काल में मुंह और चेहरा धोने के बाद 1 गिलास पानी पियें।
सोने से पहले 1 गिलास गरम दूध में 1 चम्मच घी डाल कर पीना अच्छा होता है।
शिंबी, शुष्क धान्य, गोभी मशरूम, शुष्क भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
खाने में पकाते समय हींग, अदरक, इलायची, सौंफ आदि मसालों का प्रयोग करने से पेट में गैस बनना, पेट साफ न होना आदि से राहत मिलती है।
ज्यादा गरम और मसालेदार पदार्थ सेवन नहीं करना चाहिए तथा जरूर के अनुसार पानी पीते रहना चाहिए।
फल और हरी सब्जियों का प्रयोग अधिकाधिक रूप से करना चाहिए। पपीता एवं गन्ने का सेवन कब्ज कम करने में मदद करता है।
गेंहू के आटे का प्रयोग चोकर रहित ही करना चाहिए।
कब्ज और गैस की समस्या के लिए योग में पाँच योगासन भी अत्यधिक लाभकारी होते हैं।
योग हमारे शरीर को तरोताजा करता है और शरीर में रक्त औरआॅक्सीजन के प्रवाह को भी बढ़ाने में मदद करता है। अधिकांश योग आसनों में श्रोणि का अच्छा संचलन शामिल होने के कारण, योग अभ्यास वास्तव में कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता हैं।
1. मयूरासन
यह आसन पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और अस्वास्थ्यकर भोजन के प्रभाव को नष्ट करता है। यह आसन पेट दबाव को बढ़ाता है ,जो प्लीहा और यकृत एनलार्ज्मेंट्स को कम कर देता है। यह आसन आंतो को भी मजबूत बनाता है। इस तरह से कब्ज की समस्या से राहत दिलाता में मदद करता है।
2. अर्ध मत्स्येंद्रासन
इस आसन के महत्वपूर्ण शारीरिक पहलू यह हैं की – यह अग्न्याशय, जिगर, तिल्ली, गुर्दे, पेट, और आरोही और अवरोही बृहदान्त्र को उत्तेजित करता है , इसलिए मल त्यागने में सुधार और कब्ज से राहत प्रदान करता है।
3. हलासन
4. पवनमुक्तासन
जैसा नाम से ही पता चलता है, यह आसन शरीर से गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। हम में से ज्यादातर नियमित कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए यह एक आम परेशानी है। यह आसन अपच/ मन्दाग्नि सहित कई पाचन संबंधी विकार को भी दूर करने में मदद कर सकता है । यह अम्लपित्त से राहत दिलाने में भी मदद करता है, जो की अपच के कारण ही होता है।
5. तितली मुद्रा
यह आगे झुककर करने वाले आसन से हमारे पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद मिलती है और गैस, ऐंठन और पेट की सूजन से भी राहत दिलाता है। यह आसन तनाव को कम करने में भी मदद करता है जो कि अच्छे पाचन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

Share this News:

Author

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *