Dr Rajiv Kapila

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य रक्षा

गर्भावस्था में माता तथा उसके शिशु के स्वास्थ्य की रक्षा काफी जरूरी होती है। इस लिए माताओं को अपने स्वास्थ्य के साथ साथ अपने शिशु की भी सेहत पर त्वज्जो देनी चाहिए।
इस अवस्था में माताओं को क्या करना चाहिए:-
-उपलब्ध संसाधनों में स्वादानुसार आहार लेना चाहिए।
-दूध व दूध से बने पदार्थ भ्रूण के पोषण एवं शक्ति के लिए उपयोगी होते हैं। दूध से निर्मित पदार्थों में मक्खन, घृत, रसाला (दहीं से बना व्यंजन) को भरपूर मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।
-ताजा फल: मुख्य रूप से गर्भावस्था के प्रथम तीन माह के दौरान पके हुए पीले फल जैसे आंवला, कटहल, अंगूर और संतरे के जूस का प्रयोग करें।
-लौह तत्व से परिपूर्ण फल जैसे सूखे मेवे, मुनक्का, किशमिश, हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं।
-फॉलिक एसिड से भरपूर पदार्थ जैसे अनाज, अंकुरित गेंहू, हरी फूलगोभी और लोबिया, सेम आदि का सेवन करना चाहिए।
-सब्जियां जैसे गाजर, चुकंदर, कच्चा केला और फलों में सेब, अंगूर चीकू केले और अनार को अधिकतम रूप से अपने भोजन में शामिल करें।
-गर्भिणी के लिए पर्याप्त मात्रा में मीट सूप लेना अच्छा है।
-मधु और शर्करा जच्चा व बच्चा दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। परंतु शर्करा का प्रयोग मधुमेह के रोगियों के लिए अहितकर हैं।
-गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में तरल अथवा अर्ध-तरल आहार लिए जा सकते हैं।
इस अवस्था में माताओं को निम्नलिखित कतई नहीं करना चाहिए:-
-बहुत अधिक गर्म, ठंडा और बासी भोजन तो कतई नहीं करना चाहिए।
-ज्यादा मसालेदार, तीखा, खट्टा, नमकीन और मीठी खाद्य सामग्री नहीं लेनी चाहिए।
-आवश्यकता से अधिक कभी न खाएं।
-अत्यधिक चाय या कॉफी का प्रयोग न करें।
-लंबे समय तक भूखे और प्यासे नहीं रहना चाहिए।
-खाने के तुरंत बाद लेटे नहीं, थोड़ा टहल लें।
-हमेशा खुश रहें।
-रात में 8 घंटे की नींद लें और दिन में लगभग 2 घंटे आराम करें।
-प्रतिदिन स्नान करें और स्वच्छता बनाए रखें।
-साफ, मुलायम, आरामदायक और ढीले कपड़े पहनें।
-रोजमर्रा के काम करते रहें।
-नियत काल पर डॉक्टर के पास जाते रहें।
-लाक्षा तैल के साथ मृदु अभ्यंग करें।
-सदैव मृदु शय्या का प्रयोग करें।
-गर्भवती महिला के पति एवं परिवार के अन्य सदस्यों को गर्भवती महिला के साथ सहयोग करना चाहिए तथा प्रसन्नचित व्यवहार बनाए रखना चाहिए।
-उत्तान अवस्था में लंबे समय तक न सोएं।
-विशेषत: दूसरी त्रैमासिक अवस्था में ज्यादा देर तक खड़े न हों।
-कूदना, भागना और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर सफर न करें व भारी काम करने से बचें।
-किसी भी रूप में शराब, मादक द्रव्य, धूम्रपान या तंबाकू का सेवन न करें।
-चिकित्सक की सलाह के बिना किसी भी प्रकार की दवाई न खाएं अन्यथा यह भ्रूण के लिए हानिकारक हो सकती है।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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