वायु सेना के 1000 किलोग्राम के बंबों की बरसात ने दहला डाले सीमापार के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद , हिज्जबुल मुजाहिदीन और लश्क-ए-तयैबा 

डॉ. भुपेंद्र शर्मा, चंडीगढ़: पुलवामा हमले का ठोस बदला लेते हुए भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी की सुबह तीन बजकर 45 मिनट पर पाकिस्तान की सीमा के भीतर बालाकोट के जाबा में स्थित आतंकी संगठनों पर भारी बमबारी करके उन्हें पूरी तरह से नेस्तनाबूत करके रख दिया है। इस कड़ी कार्रवाई में आतंकी संगठन -जैश-ए-मोहम्मद , हिज्जबुल मुजाहिदीन और लश्क-ए-तयैबा के कई ट्रेनर्स, टॉप कमांडर और जिहादी समेत 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने के समाचार हैं।
हालांकि भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने फौज की इस बड़ी कार्रवाई को एयर स्ट्राइक कहने की बजाये नॉन मिल्ट्री प्री-एंप्टिव स्ट्राइक का नाम दिया है मगर इस बात का भरोसा भी दिलाया है कि इस कड़ी कार्रवाई में फौज ने जैश-ए-मोहम्मद गुट के आतंकी अजहर मसूद का साला मौलाना यूसुफ अजहर उर्फ गौरी जो बालाकोट में चलने वाले सारे आतंकी कैंप का संचालन करता था, भी मारा गया है। याद रहे जैश-ए-मोहम्मद उस गुट का नाम है जिसने हाल ही में 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में सी.आर.पी.एफ.के काफिले पर आत्मघाती हमला करवा कर 40 से ज्यादा भारतीय फौजियों को मारने की जिम्मेवारी ली थी। इस दिल दहला देने वाली आतंकी घटना की पूरे विश्व ने निंदा की थी और पाकिस्तान को जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को भी कहा था मगर पाकिस्तान इस पर बेवजह सुबूत मांगता रहा था।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक 26 फरवरी को भारतीय वायू सेना के 12 मिराज-2000 फाइटर जहाजों ने बालाकोट में स्थित आतंकी ठिकानों पर 1000 किलोग्राम के बंब तय स्थान पर लगातार फैंके, जिससे आतंकियों संभलने का मौका ही नहीं मिला और उनकी कबरे उन्हीं के ठिकानों पर बन गईं। भारतीय फौज ने पहली बमबारी 3 बजकर 45 मिनट पर पाकिस्तान के मुज्जफराबाद से महज़ 24 कि.मी.दूर बालाकोट में की। इसके बाद दूसरी बमबारी मुज्जफराबाद में 3 बजकर 48 मिनट पर की गई जबकि तीसरी बमबारी चकोटी में 3 बजकर 58 मिनट पर की गई। भारतीय फौज ने आतंकी ठिकानों को उड़ाने के लिए जानबूझ कर 26 फरवरी का दिन चुना था क्योंकि इस दिन 14 फरवरी की घटना को 12 दिन पूरे होते हैं और वायू सेना ने भी इस अहम आक्रमण के लिए कुल 12 मिराज-2000 जहाजों का चयन किया था जिन्होंने ग्वालियर, आगरा और बठिंडा स्थित अल्ग अल्ग एयर बेस से उड़ान भरी थी।
पूरी तरह से फूलप्रूफ थी यह सर्जिकल-2 स्ट्राइक
जी हां, इस बार की सर्जिकल स्ट्राइक पूरी तरह से फूलप्रूफ बनाई गई थी। भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए इस हमले को फाइटर, जेट और मिड रिफ्यूलर द्वारा अंजाम दिया गया। इस पूरे हमले के बारे में वायुसेना के अधिकारियों ने एन एस ए अजीत डोवाल और पीएम मोदी को पहले ही जानकारी दे दी थी। वायुसेना ने अपने एक एक कदम के बारे में प्रजेंटेशन के माध्यम से एन एस ए और पीएम को बताया था। मंगलवार यानि 26 फरवरी की सुबह इस आॅपरेशन की शुरूआत के लिए वायुसेना के लड़ाकू विमान मिराज 2000 ने ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरी थी। वायुसेना के अर्ली वॉर्निंग जेट विमानों ने पंजाब के बठिंडा एयरबेस से उड़ान भरी। डीआरडीओ के बनाये गये मिनी अवाक्स भी शामिल थे, जो करीब 200 किलोमीटर दूर तक हर हरकत पर नजर रख सकते हैं। वहीं हवा के बीच में ईंधन भरने वाले रिफ्यूलिंग टैंकर ने यूपी के आगरा एयरबेस से उड़ान भरी। इसके साथ ही ऊंचाईं से नजर रखने के लिए वायुसेना ने अपने ड्रोन हेरोन सर्विलांस का भी इस्तेमाल किया था। पाक अधिकृत कश्मीर में मुजफ्फराबाद के पास मिराज काफी नीचे तक गया। हेरोस सर्विलांस द्वारा एयर स्ट्राइक करने से पहले ही इस बारे में पूरी प्रजेंटेशन भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने एनएसए अजीत डोवाल और पीएम मोदी को दिखा दी गई थी।
दुश्मन का ‘विनाशक मिराज’ आखिर है क्या?
इस हमले को अंजाम देने के लिए एयरफोर्स ने जिस ‘मिराज-2000’ का इस्तेमाल किया था वह मिराज-2000 मल्टीरोल, सिंगल इंजन फाइटर प्लेन है। मिराज 2000 एक साथ कई निशाने पर हमला कर सकता है। मिराज हवा से जमीन और हवा से हवा में भी मार करने में माहिर है। इसमें पारंपरिक और लेजर गाइडेड बम को भी गिराने में की क्षमता भी होती है। मिराज 2000 में हथियारों के लिए नौ हार्ड प्वाइंट हैं। प्लेन के नीचे पांच और दोनों तरफ के पंखों पर दो हथियार है। मिराज 2000 की अधिकतम रफ्तार 2,000 किमी/घंटा है। मिराज-2000 ने 1970 में पहली बार उड़ान भरी थी। मिराज 2000 विमानों का निर्माण फ्रांस में किया जाता है। रफाल बनाने वाली कंपनी ही मिराज का निर्माण करती है। दुनिया में भारत समेत 9 देश मिराज 2000 का इस्तेमाल करते हैं। इस समय भारत के पास 51 मिराज 2000 विमानों का बेड़ा है।
भारतीय वायुसेना की इस कार्रवाई के लिए आखिर बालाकोट को ही क्यों चुना ?
तालिबान के खात्मे के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने अपने कैंप बालाकोट में शिफ्ट कर लिए हैं। साल 2000 से 2001 के बीच जैश ने बालाकोट में ट्रेनिंग कैम्प बना लिए थे। अल रहमान ट्रस्ट के नाम से जैश का एक और संगठन इस इलाके में है। इसके अलावा बालाकोट से ढाई सौ किलोमीटर दूर पेशावर में भी जैश के ठिकाने हैं। बालाकोट से 40 किलोमीटर दूर पी.ओ.के.के मुजफ्फराबाद में भी जैश के कैम्प हैं। बालाकोट को आतंकियों का गढ़ माना जाता है। आतंकवादी गतिविधियों की वजह से बालाकोट अमेरिका के भी राडार पर भी रहा है। इन्हीं वजहों से भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में कार्रवाई की।
दूसरी ओर भारतीय वायु सेना की इस कार्रवाई पर पाकिस्तान ने की प्रतिक्रिया व्यक्त
दूसरी ओर पाकिस्तान ने हालांकि भारतीय वायु सेना की इस कार्रवाई को माना मगर यह भी दावा किया है कि बालाकोट में जो बम गिरे हैं वे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में न होकर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में है। सफल या असफल होने की दोनों ही स्थितियों में इसे सिर्फ नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करने की कार्रवाई नहीं बल्कि पूरी तरह से पाकिस्तान में घुसने की कार्रवाई मानी जाएगी। इस लिए यह उनकी संप्रुभता के लिए खतरा है, भारतीय वायु सेना ने उनकी एल.ओ.सी.का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय विमानों को पहले ही रोक दिया गया और उन्होंने बमों को जल्दी गिरा दिया जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ है।
बाद में पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी ने पी एम इमरान खान की अध्यक्षता में बैठक की। बैठक में पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अपने सशस्त्र बलों, नागरिकों से ‘हर तरह के हालात के लिए तैयार रहने’ को कहा है।
पाकिस्तान जवाब देगा: पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान की संप्रुभता का उल्लंघन किया है। पाकिस्तान स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के पत्रकारों को मौके पर भी ले जा रहा है। पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि वह भारत के इस गैर जरूरी आक्रमण का अपनी पसंद की जगह और समय पर जबाव देगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने बैठक के बाद कहा, एक बार फिर भारत सरकार ने अपने उद्देश्य पूरे करने के लिए बेबुनियाद और मनगढ़ंत दावे किए हैं। ये अपनी घरेलू जरूरतें पूरा करने के लिए किया गया है क्योंकि माहौल चुनाव का है और इसके लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल दिया है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने ट्वीट कर जानकारी दी कि भारत के लड़ाकू विमान नियंत्रण रेखा के पार मुजफ़्फराबाद सेक्टर में तीन से चार किलोमीटर भीतर घुस आए थे। गफूर ने भी यह दावा किया है कि पाकिस्तान के तत्काल जवाब के बाद भारत को पीछे हटना पड़ा और कोई नुकसान नहीं हुआ। वहीं कुछ पाकिस्तानी भी अपनी सेना से सवाल पूछ रहे हैं उनकी सेना ने इन भारतीय विमानों को मार क्यों नहीं गिराया? पाकिस्तानी नागरिक फवाद जावेद ने पाकिस्तानी आर्मी से सवाल पूछा है कि भारतीय विमान सीमा पार घुसे कैसे? जावेद ने ट्वीट कर पूछा, ”वे हमारे हवाई क्षेत्र में घुस गए और हमारी सेना ने इन्हें मार नहीं गिराया। अब आप ट्विटर पर केवल फायर कर रहे हैं।”
भारत से कहीं कमजोर है पाकिस्तान को उसकी वायुसेना के एयर सर्विलांस सिस्टम
द इंस्टिट्यूट फोर डिफेंस स्टडीज एंड एनलिसिस के निदेशक लक्ष्मण कुमार बहेरा कहते हैं कि भारत की वायु सेना की तुलना में पाकिस्तान की वायु सेना बहुत कमजोर है। बहेरा कहते हैं, ”पाकिस्तान की वायुसेना ऐसे हमलों का जवाब देने में सक्षम नहीं है। भारतीय वायु सेना की तैयारी इतनी मुकम्मल थी कि पाकिस्तान के लिए अंदाजा लगाना आसान नहीं था। भारत ने बहुत कम समय में इस हमले को अंजाम दिया है। पाकिस्तान का एयर सर्विलांस सिस्टम और जैमर बहुत ही लचर है। इतने कम टाइम के हमले को संभालना पाकिस्तान के मौजूदा एयर सर्विलांस के बस की बात नहीं है।” कहा जा रहा है कि अप्रैल 2000 में भारतीय एयरफोर्स ने रूस से दो अ-50 एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल- एयरक्राफ़्ट खरीदे थे। यह रेडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के लिए काफी अहम था। भारत ने इसे जब खरीदा था तभी पाकिस्तान के रिटायर्ड एयर मार्शल अयाज अहमद खान ने पाकिस्तान के लिए खतरनाक बताया था। अयाज खान ने कहा था कि भारत इस सिस्टम से पाकिस्तान के भीतर और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की जासूसी करने में सक्षम हो गया है। अयाज खान ने चेताया था कि इंडियन एयर फोर्स को इस सिस्टम से पाकिस्तानी एयर फोर्स के बेस की गतिविधियां पहले ही पता चल जाएंगी। खान ने कहा था, ”अ-50 एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल- एयरक्राफ़्ट से भारत को पहले ही पता चल जाएगा कि पाकिस्तानी रेडार सिस्टम कहां लगा है, मिसाइल की तैनाती कहां है और पाकिस्तानी एयर फोर्स कौन सी गतिविधियां कर रहा है। रूस में बना अ-50 एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल- एयरक्राफ़्ट पाकिस्तान की वायुसेना की सभी गतिविधियां पता करने में सक्षम है और पाकिस्तान के लिए चिंताजनक है।” पाकिस्तान में डिफेंस से जुड़े मामलों पर रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट डिफेंस डॉट पीके की एक रिपोर्ट का कहना है कि पाकिस्तान के एयरबोर्न रेडार्स पुराने पड़ गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, ”भारत ने अपने एयरबोर्न सर्विलांस पर काफी खर्च किया है, हालांकि पाकिस्तान ने भी खुद को अपग्रेड करने की कोशिश की है लेकिन भारत बहुत विशाल देश है इसलिए पाकिस्तान के सर्विलांस सिस्टम के लिए बहुत कुछ करना बाकी है।”अयाज खान ने अपनी रिपोर्ट ने कहा है कि भारत के पास रूस से एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल आने के बाद पाकिस्तानी एयर फोर्स का डिफेंस सिस्टम काफी पीछे छूट गया है। एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल टेक्नॉलजी यानी दूसरे देश के एयरफोर्स की गतिविधियों पर नजर रखने वाली टेक्नॉलजी में अमरीका सबसे आगे है। पाकिस्तान रक्षा मामलों में अब लगातार चीन पर निर्भर हो रहा है, लेकिन एयर सर्विलांस के मामले में चीन से पाकिस्तान को बहुत मदद नहीं मिली है। अमरीका की तरफ से पाकिस्तान को मिलने वाली रक्षा मदद और रक्षा तकनीक बिल्कुल बंद हो गई है। ओबामा प्रशासन के आखिर के कुछ महीनों में ही अमरीकी कांग्रेस ने एफ-16 लड़ाकू विमान पाकिस्तान को बेचने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद एफ-16 फाइटर जेट से ध्यान हटाकर चीन के साथ मिलकर जेएफ-17 फाइटर जेट विकसित करने पर काम शुरू किया था। अमरीकी कांग्रेस ने एफ-16 को लेकर पाकिस्तान के साथ कड़ा रुख अपनाया तो पाकिस्तान ने सैन्य साजो सामान की तलाश दूसरे पार्टनर में शुरू कर दी थी। इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार अमरीका और पाकिस्तान के बीच का हथियार सौदा एक अरब डॉलर से फिसलकर पिछले साल 2.1 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है, हालांकि इस दौरान चीन और पाकिस्तान के बीच भी हथियारों के सौदे के आकार में गिरावट आई लेकिन इसकी रफ़्तार काफी धीमी है। चीन के साथ पाकिस्तान का हथियार सौदा 74.7 करोड़ डॉलर से 51.4 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, इसके साथ ही पाकिस्तान को हथियार बेचने के मामले में चीन पहले नंबर पर रहा। अमरीकी डिफेंस वेबसाइट ग्लोबल फायर पावर के अनुसार पाकिस्तान के पास कुल एयरक्राफ़्ट 1281 हैं जबकि भारत के पास 2185 हैं। लक्ष्मण कुमार बहेरा भी मानते हैं कि पाकिस्तान भले परमाणु शक्ति संपन्न देश है लेकिन कई मामलों में भारत की तुलना में बहुत कमजोर है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमा पर 2000 किलोमीटर तक की सर्विलांस क्षमता जल्द ही हासिल कर लेगा।
पुलवामा हमले के बाद सुबूत मिटाने लगा पाकिस्तान
पुलवामा आतंकी हमले का भारत पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जवाब दिया है। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई स्ट्राइक कर जैश-ए मोहम्मद के आतंकियों का सर्वनाश कर दिया है। अब पाकिस्तान बौखलाया हुआ है, और भारत पर दुष्प्रचार के आरोप लगा रहा है। अपनी इस झूठी कहानी को मजबूती देने के लिए वो बाकायदा बालाकोट से शवों का हटा रहा है।

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cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

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