मुख्यमंत्री द्वारा कोटकपूरा और बहबल कलाँ गोली कांड की जांच सी.बी.आई. को सौंपने का एलान
पीड़तों को वित्तीय सहायता देने संबंधी जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशें मंजूर
मृतकों के परिवारों को एक -एक करोड़ रुपए मुआवज़ा और नौकरी देने का ऐलान
ज़ख्मियों के लिए भी मुआवज़ा का किया एलान
चंडीगढ़, 30 जुलाई:  जस्टिस (सेवामुक्त) रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशों को मंजूर करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बरगाड़ी बेअदबी घटना के बाद कोटकपूरा और बहबल कलां में घटे गोली कांड की जांच राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) को सौंपने के फ़ैसले का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री ने 14 अक्तूबर, 2015 को कोटकपूरा और बहबल कलाँ में घटे पुलिस गोली कांड के पीडि़तों /परिवारों के लिए मुआवज़े और नौकरियों का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग द्वारा सिफ़ारिश के मुताबिक मुआवज़ा राशि बढ़ाने का फ़ैसला लिया है। सरकार द्वारा आयोग की रिपोर्ट विचारने से पहले इसको एडवोकेट जनरल अतुल्य नन्दा द्वारा कानूनी तौर पर जाँचा गया है।
आज यहाँ प्रैस कान्फ्ऱेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग द्वारा जिन व्यक्तियों पर इन घटनाओं में शामिल होने की शंका अभिव्यक्त की गई है, उनके विरुद्ध आई.पी.सी. की धारा 307 अधीन केस दर्ज करने के बाद इसकी जांच सी.बी.आई को इस लिए दी गई है जिससे निष्पक्ष और उद्देश्यपूर्ण जांच को यकीनी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग द्वारा इन घटनाओं में शामिल जिन पुलिस अफसरों के नामों का जि़क्र किया गया है, उनकी जांच सी.बी.आई. द्वारा की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन घटनाओं से संबंधित सभी दस्तावेज़ केंद्रीय जांच एजेंसी के हवाले कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में कई सीनियर अफ़सर भी शामिल हो सकते हैं जिस लिए यह महसूस किया गया कि इस नाजुक मामले की जांच सी.बी.आई. से करवाई जाये।
यह जि़क्रयोग्य है कि सी.बी.आई. पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के अन्य विभिन्न मामलों की पहले ही जांच कर रही है जिन मामलों को राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया था।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जस्टिस (सेवामुक्त) रणजीत सिंह के नेतृत्व वाले जांच आयोग द्वारा 30 जून, 2018 को पहली रिपोर्ट (पहला हिस्सा) सौंपी गई थी। उन्होंने कहा कि चाहे आयोग की पूरी रिपोर्ट अभी आनी है, सरकार ने आयोग द्वारा अब तक की सिफारिशों को स्वीकृत करने का फ़ैसला लिया है।
आयोग द्वारा अपनी जांच प्रक्रिया मुकम्मल कर लेने के बाद इस रिपोर्ट को विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जायेगा। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग की पूरी रिपोर्ट हासिल करने के बाद ही सरकार विशेष सत्र बुला सकती है क्योंकि रिपोर्ट के एक हिस्से की कार्यवाही रिपोर्ट को सदन में पेश नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आयोग की 182 पन्नों की रिपोर्ट के साथ हज़ारों पन्ने सबूतों के भी हैं और यह रिपोर्ट चार हिस्सों में होगी जिनको कार्यवाही रिपोर्ट के साथ सदन में पेश किया जायेगा।
रिपोर्ट के पहले हिस्से में आयोग ने 01 जून, 2015, 26 सितम्बर, 2015 और 12 अक्तूबर, 2015 के पास के समय में गाँव बुर्ज जवाहर सिंह वाला, बरगाड़ी, गुरूसर और मल्लके पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटी घटनाओं को अपनी जांच में शामिल किया है। इस तरह 14 अक्तूबर, 2015 को कोटकपूरा और बहबल कलां में घटे गोली कांड समेत पुलिस की कार्यवाही को जांच का हिस्सा बनाया जिससे दो व्यक्तियों की मौत और अन्य कई ज़ख्मी हो गए थे।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि पीडि़त व्यक्तियों को आयोग द्वारा वित्तीय मुआवज़ा और नौकरियाँ देने की सिफारिशों के प्रति सरकार ने पूरी तरह सहमति व्यक्त की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आयोग द्वारा दोनों मृतकों के परिवारों के लिए 75 -75 लाख रुपए की सिफ़ारिश की गई मुआवज़े की राशि को बढ़ा कर सरकार ने एक करोड़ रुपए कर दिया गया है जबकि गंभीर ज़ख्मी बेअंत सिंह के लिए आयोग ने 35 लाख रुपए मुआवज़ा राशि तय की थी जिसको सरकार ने बढ़ा कर 50 लाख रुपए कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके परिवारों के एक -एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी भी दी जायेगी।
इसके इलावा अजीत सिंह जो जीवन भर के लिए बेकार हो गए थे, के लिए मुआवज़ा भी 40 लाख रुपए से बढ़ा के 60 लाख रुपए किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अजीत सिंह के इलाज पर आने वाले ख़र्च की प्रतिपूर्ति करने के साथ-साथ देखभाल के लिए एक अटेंडेंट भी उपलब्ध करवाया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि लोगों में न्याय के प्रति विश्वास पैदा करने के यतनों के तौर पर गोलीबारी में ज़ख्मी हुए व्यक्तियों को भी 10 -10 लाख रुपए मुआवज़ा देने का फ़ैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस मन्दभागी घटना में अपनी जानें गवां दी, उनको वापस नहीं लाया जा सकता परन्तु पंजाब सरकार द्वारा अपने यतनों से लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाली के यत्न किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग द्वारा अपनी पहली रिपोर्ट में उस समय कोटकपूरा के एस.डी.एम. के विरुद्ध उचित कार्यवाही करने की सिफ़ारिश की गई थी जबकि जो पुलिस अधिकारी किसी अपराधिक कार्यवाही के लिए जि़म्मेदार नहीं थे, वह किसी पुलिस कार्यवाही के लिए जि़म्मेदार नहीं थे। उन्होंने कहा कि कुछ पुलिस अधिकारी बेअदबी की घटनाओं के इलावा कोटकपूरा और बहबल कलाँ में बल का प्रयोग करने संबंधी दर्ज मामलों की योग्य और निष्पक्ष जांच न करने के जि़म्मेदार पाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग द्वारा ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कानून अनुसार अपेक्षित कार्यवाही करने की सिफ़ारिश की गई है।
आयोग द्वारा ख़ास तौर पर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, सब इंस्पेक्टर अरियारजीत सिंह और एस.पी. बिकरमजीत सिंह का जि़क्र करते उनके नाम पुलिस स्टेशन बाजाखाना में दर्ज एफ.आई.आर. नंबर 130 में शामिल करने की शिफारश की गई है और उनकी भूमिका की विस्तृत जांच करने के लिए भी कहा गया है, जो कि अभीतक नहीं की गई।
इसके इलावा आयोग द्वारा से मोगा के समकालीन जि़ला पुलिस प्रमुख चरनजीत सिंह शर्मा की भूमिका संबंधी भी इसी संदर्भ में जि़क्र करने के साथ ही कांस्टेबलों शमशेर सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, परमिन्दर सिंह, एस.एच.ओ. लाडोवाल इंस्पेक्टर हरपाल सिंह की भूमिका की भी बारीकी से जांच करने की सिफ़ारिश की गई है क्योंकि उनके पास बहबल कलाँ में असाल्ट रायफलें थे। इसके इलावा कमांडो पुलिस की भूमिका को भी जांचने की शिफारिश की गई क्योंकि उसके द्वारा अंधाधुन्ध लाठीचार्ज करने से अनेकों लोग ज़ख्मी हो गए थे क्योंकि इसकी अभी तक जांच नहीं की गई।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा पिछले साल अप्रैल में जस्टिस (सेवामुक्त) रणजीत सिंह आयोग की स्थापना की गई थी जिससे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाओं की जांच की जा सके। सरकार ने पिछली अकाली सरकार द्वारा स्थापित ज़ोरा सिंह आयोग की शिफारिशों को रद्द कर दिया है क्योंकि उसकी जांच ‘बेनतीजा ’ थी।
इस अवसर पर मुख्य तौर पर कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा, अरुणा चौधरी, भारत भूषण आशु, पूर्व विदेश राज्य मंत्री महारानी प्रनीत कौर, कांग्रेस पार्टी के पंजाब मामलों कीे इंचार्ज आशा कुमारी, मुख्यमंत्री के सीनियर सलाहकार लैफ. जनरल (सेवामुक्त) टी.एस. शेरगिल्ल, मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, एडवोकेट जनरल अतुल्य नन्दा, मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव गुरकिरत कृपाल सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) एन.एस. कलसी और सचिव गृह कुमार राहुल भी उपस्थित थे।
Categories: Uncategorized

cdadmin

Editor in Chief of City Darpan, national hindi news magazine.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *