City Darpan

April 2021

विरासत दिशा दे सकती है नींव तो काम करने से ही बनती है

डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी सिविल सर्जन (रिटा.)

जब से दुनिया अस्तित्व में आई है हर वस्तु मेहनत के बाद ही बनी है। बल्कि इन्सान ने अपनी सुरक्षा तथा सुविधाओं के लिए नये नये साधन बनाये जो कि समय दर समय इतिहास के रूप में लिखे गये तथा पढ़े जा रहे हैं। आज लगता है कुछ ठहराव सा आ गया है। लोग काम से भाग रहे हैं तथा कह रहे हैं हमारा इतिहास बहुत ही गौर्वमयी रहा है। हम तथाकथित जाति अथवा नसल से हैं हमारा भूतकाल बड़ा ही महान है। कोई कह रहा है हमारे दादा पड़दादा बड़े मशहूर हुआ करते थे कोई अपने पिता की जायदाद की धौंस जमा कर बैठा है। मगर यह याद रखना होगा कि बूंद बूंद करके भरा हुआ समुद्र भी खाली हो जाया करता है गर उसमें नयी बूंदें लगातार ना पड़ती रहें या कह सकते हैं कि बैंक में पैसे निकलवाने तथा डालने भी पड़ते हैं तथा जमा करवाये कभी न कभी खत्म हो जाते हैं। मुझे याद है कि एक दोस्त ने मुझे चेतावनी दी जब मैं लंबा समय लालड़ू मेहनत तथा शानदार नौकरी करने के बाद पंजाब राज्य एडज कंट्रोल सोसायटी चंडीगढ़ तबादला हुआ तो वह दोस्त कहने लगा कि जो मेहनत लालड़ू की वह वहीं पर रह गई या फिर वही माहौल इस कार्यालय में बनाना तथा उससे ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। मैने फिर नये ढंग से मेहनत की तथा नतीजे बहुत अच्छे निकले साथ ही आज तक वे कर्मचारी भी याद कर रहे है।
हमारा देश जो किसी समय सोने की चिड़ीया माना जाता था आज गरीबी हो या कुशासन या रिश्वतखोरी, विश्व की पहली कतार में खड़ा पाया जाता है। यही नहीं बीमारियों की भरमार ऊपर से बेईमानी की मार साथ ही आपसी सामाजिक टकराव के अलावा तीसरा स्तंभ न्यायालय तथा चौथा स्तंभ भी डगमगाता नजर आ रहा।
इतिहास को छोड़ जरा साइंस तथा ध्यान मारें तो वैज्ञानिक सदैव कुछ नया करने की दौड़ में होते हैं। उसी का नतीजा है कि भारत के लोगों की औसतन आयु जो 37 वर्ष के करीब आजादी के समय थी आज 67 वर्ष के करीब हो गई है। यह सब वैज्ञानिकों की मेहनत का नतीजा है न कि किसी विरासत की वजह से।
दुख इस बात का है कि भारत के लोग आज विरासत का सहारा लेकर काम छोड़ कर बैठे हैं। किसी ने पगड़ी का रंग अपना लिया किसी ने कपड़े पहनने का तथा कोई गीतों का सहारा ले रहा तथा कोई बड़े बुजुर्गों की भगती का। कोई लिखी हुई लकीरों की पूजा कर रहा है पर समय की जरूरत के मुताबिक इन्साफ के लिए बदलने के लिए तैयार नहीं। लोग कह रहे हैं जो लिखा नहीं वह लिखना नहीं क्योंकि गलत है जो पढ़ा नहीं वह पढ़ना नहीं गलत है जो बोला नहीं वह बोलना नहीं गलत है तथा फिर तरक्की कैसे होगी दोस्तो याद रखो।
तजुर्बा पहला टेस्ट लेता तथा फिर पाठ पढ़ाता। इस करके विरासत को पढ़ो तथा उसको सिद्ध कर लो न कि विरासत के सहारे जीना सीखो। आने वाले समय में काम को मूंह मोड़ अपने भविष्य को खराब करो इसकी ताजा उदाहरण आज जो पंजाब की दशा बनी हुई है उसका सबसे बड़ा कारण पंजाबियों का खाली रहना है भले ही पंजाब की विरासत का कोई साथ नहीं है।
ज़रा सोचो
विरासत सिद्ध दे सकती मगर अस्तित्व बनाना तो काम जरूरी
हिस्ट्री लिख लो पढ़ लो मगर तरक्की करनी तो साइंस जरूरी
फुकरी मारनी तथा मूंछ पर हाथ परस्नेल्टी बनानी तथा सेहत जरूरी
झूठ मारने तथा डरना पड़ना, सच बोलना तथा बेफिकरी हजूरी
दिन काटने तथा तरक्की दूरी जीवन बनाने तो मेहनत जरूरी
समय देख चलना तथा सुविधा ज्यादा समय बदलना ना तो मुश्किल जरूरी
मुल्तानी हर मुश्किल का हल निकलना तो काम करना हर के लिए जरूरी
-खत्म-